8 वर्षीय निक्षा बारोट ने 7 दिनों में एवरेस्ट बेस कैंप फतह किया, बेस कैंप पर किया योग
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के पालनपुर की 8 वर्षीय निक्षा बारोट ने 22 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (5,364 मीटर / 17,598 फीट) तक की ट्रेकिंग सफलतापूर्वक पूरी कर एक प्रेरणादायक उपलब्धि हासिल की। 16 मई को काठमांडू से शुरू हुई यह यात्रा महज सात दिनों में और 130 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके पूरी हुई।
अभियान का मार्ग और चुनौतियाँ
अनुभवी एवरेस्टर निशा के मार्गदर्शन में आयोजित इस एकल-बाल अभियान की शुरुआत लुकला (लगभग 2,860 मीटर) से हुई। पहले दिन पाखड़िंग तक पहुँचने के बाद नामचे बाजार में ऊंचाई के अनुकूलन के लिए एक दिन का विराम लिया गया। इसके बाद निक्षा ने टेंगबोचे, डिंगबोचे, लोबुचे और गोरखेप के दुर्गम इलाकों को पार किया।
इस यात्रा के दौरान निक्षा को माइनस डिग्री तापमान, कम ऑक्सीजन स्तर और पथरीले खतरनाक रास्तों जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन सब चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
बेस कैंप पर योग और राष्ट्रगान
22 मई को एवरेस्ट बेस कैंप पहुँचने के बाद निक्षा ने वहाँ योग किया और गर्व के साथ राष्ट्रगान गाया। उनके पिता नीलेश बारोट के अनुसार, इस अनूठे दृश्य ने वहाँ मौजूद सभी लोगों में देशभक्ति का एक विशेष वातावरण बना दिया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
निक्षा ने बेस कैंप से 'Save Nature, Save Himalayas', 'Every Child Should Plant a Tree' और 'Fit India, Green India' जैसे संदेशों वाले प्लेकार्ड प्रदर्शित कर वैश्विक स्तर पर पर्यावरण जागरूकता फैलाई। कम उम्र में पर्यावरण के प्रति यह संवेदनशीलता उन्हें अपने साथियों से अलग बनाती है।
पिछली उपलब्धियाँ
यह निक्षा की पहली बड़ी साहसिक उपलब्धि नहीं है। 6 वर्ष की आयु में उन्होंने उत्तराखंड में केदारकांठा ट्रेक सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बाद उन्होंने अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक लगभग 4,556 किलोमीटर लंबी 'पेडल टू प्लांट' साइकिल यात्रा में भाग लेकर वृक्षारोपण का संदेश दिया। इस पर्यावरण कार्य के लिए उन्हें 26 जनवरी को जिला स्तर पर सम्मानित भी किया गया।
एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक की यह सफलता निक्षा की साहसिक यात्रा में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ती है और देश भर के बच्चों के लिए एक मिसाल बनती है।