14 जुलाई 2026
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8 वर्षीय निक्षा बारोट ने 7 दिनों में एवरेस्ट बेस कैंप फतह किया, बेस कैंप पर किया योग

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8 वर्षीय निक्षा बारोट ने 7 दिनों में एवरेस्ट बेस कैंप फतह किया, बेस कैंप पर किया योग

सारांश

8 साल की उम्र, 130 किलोमीटर का सफर, 7 दिन — और बेस कैंप पर योग। पालनपुर की निक्षा बारोट ने एवरेस्ट बेस कैंप फतह कर साबित किया कि हौसले की कोई उम्र नहीं होती। पर्यावरण बचाने के संदेश के साथ उन्होंने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी की तलहटी से भारत को गर्वित किया।

मुख्य बातें

पालनपुर, गुजरात की 8 वर्षीय निक्षा बारोट ने 22 मई 2026 को एवरेस्ट बेस कैंप (5,364 मीटर) तक ट्रेक सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह अभियान 16 मई को शुरू हुआ और मात्र 7 दिनों में 130 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई।
निक्षा ने बेस कैंप पर योग किया और राष्ट्रगान गाया; 'Save Nature, Save Himalayas' जैसे पर्यावरण संदेश दिए।
इससे पहले 6 वर्ष की आयु में केदारकांठा ट्रेक और 4,556 किमी की 'पेडल टू प्लांट' साइकिल यात्रा भी पूरी की थी।
26 जनवरी को जिला स्तर पर पर्यावरण कार्य के लिए सम्मानित किया जा चुका है।

गुजरात के पालनपुर की 8 वर्षीय निक्षा बारोट ने 22 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (5,364 मीटर / 17,598 फीट) तक की ट्रेकिंग सफलतापूर्वक पूरी कर एक प्रेरणादायक उपलब्धि हासिल की। 16 मई को काठमांडू से शुरू हुई यह यात्रा महज सात दिनों में और 130 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके पूरी हुई।

अभियान का मार्ग और चुनौतियाँ

अनुभवी एवरेस्टर निशा के मार्गदर्शन में आयोजित इस एकल-बाल अभियान की शुरुआत लुकला (लगभग 2,860 मीटर) से हुई। पहले दिन पाखड़िंग तक पहुँचने के बाद नामचे बाजार में ऊंचाई के अनुकूलन के लिए एक दिन का विराम लिया गया। इसके बाद निक्षा ने टेंगबोचे, डिंगबोचे, लोबुचे और गोरखेप के दुर्गम इलाकों को पार किया।

इस यात्रा के दौरान निक्षा को माइनस डिग्री तापमान, कम ऑक्सीजन स्तर और पथरीले खतरनाक रास्तों जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन सब चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

बेस कैंप पर योग और राष्ट्रगान

22 मई को एवरेस्ट बेस कैंप पहुँचने के बाद निक्षा ने वहाँ योग किया और गर्व के साथ राष्ट्रगान गाया। उनके पिता नीलेश बारोट के अनुसार, इस अनूठे दृश्य ने वहाँ मौजूद सभी लोगों में देशभक्ति का एक विशेष वातावरण बना दिया।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

निक्षा ने बेस कैंप से 'Save Nature, Save Himalayas', 'Every Child Should Plant a Tree' और 'Fit India, Green India' जैसे संदेशों वाले प्लेकार्ड प्रदर्शित कर वैश्विक स्तर पर पर्यावरण जागरूकता फैलाई। कम उम्र में पर्यावरण के प्रति यह संवेदनशीलता उन्हें अपने साथियों से अलग बनाती है।

पिछली उपलब्धियाँ

यह निक्षा की पहली बड़ी साहसिक उपलब्धि नहीं है। 6 वर्ष की आयु में उन्होंने उत्तराखंड में केदारकांठा ट्रेक सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बाद उन्होंने अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक लगभग 4,556 किलोमीटर लंबी 'पेडल टू प्लांट' साइकिल यात्रा में भाग लेकर वृक्षारोपण का संदेश दिया। इस पर्यावरण कार्य के लिए उन्हें 26 जनवरी को जिला स्तर पर सम्मानित भी किया गया।

एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक की यह सफलता निक्षा की साहसिक यात्रा में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ती है और देश भर के बच्चों के लिए एक मिसाल बनती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि यह एकबारगी घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित यात्रा है। असली सवाल यह है कि ऐसी प्रतिभाओं को संस्थागत समर्थन और सुरक्षित ढाँचा कब मिलेगा, ताकि हर बच्चे के लिए ऐसे सपने संभव हो सकें।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निक्षा बारोट ने एवरेस्ट बेस कैंप कब और कितने दिनों में पूरा किया?
निक्षा बारोट ने 16 मई 2026 को काठमांडू से यात्रा शुरू की और 22 मई को एवरेस्ट बेस कैंप पहुँचीं, यानी मात्र 7 दिनों में यह अभियान पूरा हुआ। इस दौरान उन्होंने 130 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।
एवरेस्ट बेस कैंप की ऊंचाई कितनी है और यह ट्रेक कहाँ से शुरू हुआ?
एवरेस्ट बेस कैंप लगभग 5,364 मीटर (17,598 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह ट्रेक लुकला (लगभग 2,860 मीटर) से शुरू हुआ और पाखड़िंग, नामचे बाजार, टेंगबोचे, डिंगबोचे, लोबुचे व गोरखेप होते हुए बेस कैंप तक पहुँचा।
निक्षा बारोट ने बेस कैंप पर क्या खास किया?
निक्षा ने एवरेस्ट बेस कैंप पर पहुँचकर योग किया और राष्ट्रगान गाया, जिसने वहाँ मौजूद लोगों में देशभक्ति का वातावरण बना दिया। इसके साथ ही उन्होंने 'Save Nature, Save Himalayas' और 'Every Child Should Plant a Tree' जैसे पर्यावरण संदेशों वाले प्लेकार्ड भी प्रदर्शित किए।
निक्षा बारोट की पिछली साहसिक उपलब्धियाँ क्या हैं?
निक्षा ने 6 वर्ष की उम्र में उत्तराखंड में केदारकांठा ट्रेक पूरा किया था। इसके बाद उन्होंने अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक लगभग 4,556 किलोमीटर लंबी 'पेडल टू प्लांट' साइकिल यात्रा में भाग लिया और 26 जनवरी को जिला स्तर पर सम्मानित भी हुईं।
इस अभियान का मार्गदर्शन किसने किया?
यह अभियान अनुभवी एवरेस्टर निशा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था। यह एकल-बाल अभियान था जिसमें केवल निक्षा ने भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
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