बीएसएफ की पहली ऑल-वूमेन टीम ने माउंट एवरेस्ट फतह किया, 'मिशन वंदे मातरम' के तहत ऐतिहासिक उपलब्धि
सारांश
मुख्य बातें
सीमा सुरक्षा बल (BSF) की पहली पूर्ण-महिला पर्वतारोहण टीम ने 21 मई 2025 को माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) की चोटी पर तिरंगा फहराया और 'वंदे मातरम' का गान किया — यह उपलब्धि 'मिशन वंदे मातरम' के तहत बल के डायमंड जुबली वर्ष में हासिल की गई। यह पहला अवसर है जब BSF की महिला पर्वतारोहियों ने दुनिया की सर्वोच्च चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।
अभियान दल और उनकी पृष्ठभूमि
इस ऐतिहासिक दल में चार महिला कांस्टेबल शामिल थीं — लद्दाख की कांस्टेबल कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल की कांस्टेबल मुनमुन घोष, उत्तराखंड की कांस्टेबल रेबेका सिंह, और कारगिल की कांस्टेबल त्सेरिंग चोराट। BSF के अनुसार, देश के अलग-अलग कोनों से आई इन पर्वतारोहियों ने भारत की 'एकता में विविधता' की भावना को साकार किया।
यह अभियान 6 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली से BSF महानिदेशक प्रवीण कुमार ने रवाना किया था। चोटी फतह करने के बाद महानिदेशक ने रेडियो लिंक के ज़रिए टीम से सीधी बातचीत की और पूरे बल तथा देश की ओर से बधाई दी।
मिशन का महत्व और प्रेरणा
BSF ने बताया कि यह अभियान दो विशेष अवसरों को समर्पित है — राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ और BSF का डायमंड जुबली समारोह। बल के अनुसार, इस मिशन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के महिला सशक्तीकरण संबंधी संदेशों से प्रेरणा मिली।
गौरतलब है कि BSF इससे पहले 2006 और 2018 में माउंट एवरेस्ट अभियान सफलतापूर्वक पूरे कर चुका है और अब तक 50 प्रमुख चोटियों पर सफल अभियान चला चुका है। यह पहली बार है जब बल ने एवरेस्ट के लिए पूर्ण-महिला दल भेजा।
महानिदेशक की प्रतिक्रिया
BSF महानिदेशक प्रवीण कुमार ने कहा कि यह अभियान बल के जवानों की अदम्य भावना, पेशेवर क्षमता और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने इसे बल और देश दोनों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।
'क्लीन हिमालय' पहल और अगला चरण
'क्लीन हिमालय, क्लीन ग्लेशियर' अभियान के अंतर्गत BSF की टीम एवरेस्ट के ऊंचे कैंपों से 500 किलोग्राम कचरा एकत्र कर उसे नामचे बाज़ार तक पहुंचाएगी, जहाँ उसका उचित निपटान किया जाएगा।
अभियान के अगले चरण में BSF की पुरुष पर्वतारोहण टीम माउंट ल्होत्से (8,516 मीटर) फतह करने का प्रयास करेगी, जो अगले दो-तीन दिनों में संभावित है। 'मिशन वंदे मातरम' महिला सशक्तीकरण, साहसिक खेलों को प्रोत्साहन और वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय गौरव को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।