चीन-रूस ने मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की, सैन्य व आर्थिक साझेदारी और मज़बूत करने का संकल्प

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चीन-रूस ने मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की, सैन्य व आर्थिक साझेदारी और मज़बूत करने का संकल्प

सारांश

चीन और रूस ने 20 मई को मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी कर सैन्य अभ्यास के विस्तार, आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने और प्रभुत्ववाद व एकतरफावाद के विरोध का संकल्प लिया — ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।

मुख्य बातें

चीन और रूस ने 20 मई 2025 को सर्वांगीण रणनीतिक समन्वय और मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की।
दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री व हवाई गश्ती के विस्तार का संकल्प लिया।
द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक साझेदारी को नए वृद्धि बिंदुओं के साथ और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई।
दोनों पक्षों ने प्रभुत्ववाद और एकतरफावाद का विरोध करते हुए संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की रक्षा का संकल्प दोहराया।
राष्ट्राध्यक्ष स्तर की कूटनीति के नेतृत्व में सरकारों, विधान सभाओं और पार्टियों के बीच आदान-प्रदान की प्रणालियों को सुचारु बनाए रखने पर सहमति बनी।

चीन और रूस ने 20 मई 2025 को सर्वांगीण रणनीतिक समन्वय को और सुदृढ़ करने तथा अच्छे पड़ोसियों के मैत्रीपूर्ण सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा जारी की। यह घोषणा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद की निरंतरता को रेखांकित करती है और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का संकल्प व्यक्त करती है।

राजनीतिक एवं कूटनीतिक प्रतिबद्धताएँ

घोषणा में स्पष्ट किया गया कि दोनों पक्ष राष्ट्राध्यक्षों की कूटनीति के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय आवाजाही को घनिष्ठ बनाए रखेंगे। इसके अंतर्गत सरकारों, विधान सभाओं तथा पार्टियों के बीच आदान-प्रदान की प्रणालियों का कुशल और सुगम संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच संपन्न अहम सहमतियों को चौतरफा तौर पर लागू करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है।

सैन्य सहयोग और सुरक्षा समन्वय

दोनों पक्षों ने अपनी सेनाओं के बीच परंपरागत मित्रता को और मज़बूत करने तथा सैन्य क्षेत्रों में पारस्परिक विश्वास बढ़ाने का संकल्प लिया। घोषणा के अनुसार, सहयोग तंत्र में सुधार करते हुए संयुक्त अभ्यास और संयुक्त समुद्री तथा हवाई गश्ती का विस्तार किया जाएगा। द्विपक्षीय व बहुपक्षीय ढाँचे के तहत समन्वय को प्रगाढ़ कर दोनों देश मिलकर विभिन्न खतरों व चुनौतियों का सामना करेंगे और वैश्विक तथा क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता की रक्षा करेंगे।

आर्थिक एवं व्यापारिक साझेदारी

घोषणा में दोनों पक्षों ने हाल के वर्षों में द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक सहयोग का उच्च मूल्यांकन किया। दोनों देश संबंधित नीतियों के संवाद को मज़बूत करते हुए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएँगे और नए वृद्धि बिंदुओं की खोज करेंगे। वस्तु व सेवा व्यापार की उन्नति को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक साझेदारी के स्वतंत्र विकास के अधिकार की रक्षा करने का भी संकल्प लिया गया है।

वैश्विक व्यवस्था पर साझा रुख

दोनों पक्षों ने घोषणा में दोहराया कि वे प्रभुत्ववाद, एकतरफावाद और विश्व में बल-राजनीति की वापसी का दृढ़ता से विरोध करते हैं। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसकी केंद्रीय भूमिका की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव अपने उच्चतम स्तर पर हैं और पश्चिमी देशों के साथ दोनों देशों के संबंध जटिल दौर से गुज़र रहे हैं।

आगे की राह

यह संयुक्त घोषणा चीन-रूस संबंधों को एक नई संस्थागत मज़बूती देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य और आर्थिक तालमेल वैश्विक शक्ति संतुलन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि 'प्रभुत्ववाद-विरोध' की भाषा स्वयं एक भू-राजनीतिक उपकरण है जो वैश्विक दक्षिण को अपनी ओर खींचने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। भारत जैसे देशों के लिए यह घोषणा एक जटिल संकेत है — जो बहुध्रुवीयता की बात करती है, लेकिन व्यवहार में एक नए द्विध्रुवीय ढाँचे की नींव रखती दिखती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन और रूस की संयुक्त घोषणा में क्या कहा गया है?
20 मई 2025 को जारी इस घोषणा में दोनों देशों ने सर्वांगीण रणनीतिक समन्वय, सैन्य सहयोग के विस्तार, आर्थिक साझेदारी को मज़बूत करने और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की रक्षा का संकल्प लिया। साथ ही प्रभुत्ववाद और एकतरफावाद का विरोध दोहराया गया।
चीन-रूस सैन्य सहयोग में क्या नया होगा?
घोषणा के अनुसार, दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास और संयुक्त समुद्री तथा हवाई गश्ती का विस्तार करेंगे। सहयोग तंत्र में सुधार कर द्विपक्षीय व बहुपक्षीय ढाँचे के तहत समन्वय को और प्रगाढ़ किया जाएगा।
इस घोषणा का वैश्विक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
दोनों देशों ने प्रभुत्ववाद और एकतरफावाद के विरोध में एकजुट रुख अपनाया है और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की रक्षा का संकल्प लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैश्विक शक्ति संतुलन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
चीन-रूस आर्थिक सहयोग की क्या स्थिति है?
घोषणा में दोनों पक्षों ने हाल के वर्षों में द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक सहयोग का उच्च मूल्यांकन किया। वे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए वृद्धि बिंदुओं की खोज करेंगे और वस्तु व सेवा व्यापार को आगे बढ़ाएँगे।
यह घोषणा किस संदर्भ में जारी की गई?
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और पश्चिमी देशों के साथ दोनों देशों के संबंध जटिल दौर से गुज़र रहे हैं। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच कूटनीतिक संवाद की निरंतरता को इस घोषणा के ज़रिये संस्थागत रूप दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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