चीन-रूस संयुक्त वक्तव्य: बहुध्रुवीय विश्व और नए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की वकालत

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चीन-रूस संयुक्त वक्तव्य: बहुध्रुवीय विश्व और नए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की वकालत

सारांश

चीन और रूस ने 20 मई को एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत की और चार सिद्धांत रखे — खुलापन, सुरक्षा समानता, लोकतंत्रीकरण और सभ्यताओं की विविधता। यह घोषणा पश्चिमी वर्चस्व को सीधी चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

मुख्य बातें

चीन और रूस ने 20 मई 2026 को बहुध्रुवीयता और नए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया।
दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं।
वक्तव्य में चार मूल सिद्धांत रखे गए — खुलापन व समावेशिता, सुरक्षा समानता, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का लोकतंत्रीकरण, और सभ्यताओं की विविधता।
एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रेखांकित किया गया।
औपनिवेशिक मानसिकता से संप्रभु राज्यों पर हित थोपने के प्रयासों को पूरी तरह विफल बताया गया।

चीन और रूस ने 20 मई 2026 को एक ऐतिहासिक संयुक्त वक्तव्य जारी कर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और नए प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के निर्माण का आह्वान किया। वक्तव्य में दोनों देशों ने वैश्विक शक्ति संतुलन को अधिक न्यायसंगत और समावेशी बनाने की प्रतिबद्धता जताई तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से चार मूल सिद्धांतों का पालन करने का अनुरोध किया।

वक्तव्य की पृष्ठभूमि

वक्तव्य में रेखांकित किया गया कि चीन और रूस दोनों समृद्ध ऐतिहासिक सभ्यताओं के वाहक हैं और संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य तथा सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं। दोनों देशों ने स्वयं को बहुध्रुवीय विश्व में महत्वपूर्ण शक्तियों के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि वे वैश्विक शक्ति संतुलन बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की व्यवस्था में सुधार लाने में रचनात्मक भूमिका निभा रहे हैं।

बदलता वैश्विक परिदृश्य

वक्तव्य के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य और शक्ति संतुलन में तीव्र परिवर्तन आए हैं। उपनिवेशवाद की समाप्ति और शीत युद्ध के अंत के बाद वैश्विक स्तर पर संप्रभु राज्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अधिक विविध और जटिल हो गया है।

एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के विकास स्तर और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके साथ ही क्षेत्रीय और अंतर-क्षेत्रीय संगठनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्रों को समेटते हैं। वक्तव्य में यह भी कहा गया कि कुछ देशों द्वारा औपनिवेशिक मानसिकता के साथ विश्व पर अपने हित थोपने और अन्य संप्रभु राज्यों के विकास को बाधित करने के प्रयास पूरी तरह विफल रहे हैं।

चार मूल सिद्धांत

दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से निम्नलिखित चार सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान किया:

पहला — खुलापन, समावेशिता और पारस्परिक लाभकारी सहयोग को बनाए रखना। दूसरा — सुरक्षा समानता और अविभाज्यता को सुनिश्चित करना। तीसरा — अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देना और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार करना। चौथा — विश्व सभ्यताओं और मूल्यों की विविधता को संरक्षित रखना।

आगे की दिशा

वक्तव्य के अनुसार, चीन और रूस बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण और अधिक न्यायपूर्ण नए प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना जारी रखेंगे। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों और अमेरिका के साथ दोनों देशों के संबंधों में तनाव बना हुआ है, और वैश्विक भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अब चीन का समर्थन मिल रहा है। यह वक्तव्य ग्लोबल साउथ को साथ लेने की रणनीतिक कोशिश भी है — एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का उल्लेख इसी दिशा में संकेत करता है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज एक राजनयिक दस्तावेज़ के रूप में देखती है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या यह साझेदारी ठोस बहुपक्षीय संस्थाओं में तब्दील होगी, या केवल पश्चिम-विरोधी बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन और रूस के संयुक्त वक्तव्य में क्या कहा गया है?
20 मई 2026 को जारी इस वक्तव्य में चीन और रूस ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत की और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से चार सिद्धांतों — खुलापन, सुरक्षा समानता, लोकतंत्रीकरण और सभ्यताओं की विविधता — का पालन करने का आह्वान किया। दोनों देशों ने एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक शासन प्रणाली के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का क्या अर्थ है?
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था वह अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली है जिसमें किसी एक देश का वर्चस्व नहीं होता, बल्कि कई शक्तिशाली देश मिलकर वैश्विक मामलों को प्रभावित करते हैं। चीन और रूस इसे अमेरिका-नेतृत्व वाली एकध्रुवीय व्यवस्था के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
इस वक्तव्य का वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों के साथ चीन और रूस दोनों के संबंध तनावपूर्ण हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह ग्लोबल साउथ के देशों को अपने पक्ष में लाने की रणनीतिक कोशिश है, जो वैश्विक भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है।
वक्तव्य में किन क्षेत्रों के देशों का उल्लेख किया गया?
वक्तव्य में एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इन क्षेत्रों के विकास स्तर और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव में अभूतपूर्व वृद्धि को बहुध्रुवीयता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र में क्या भूमिका निभाते हैं?
चीन और रूस दोनों संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य और सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों में शामिल हैं, जिन्हें वीटो का अधिकार प्राप्त है। इस वक्तव्य में उन्होंने इसी स्थायी सदस्यता के आधार पर वैश्विक शासन सुधार में अपनी केंद्रीय भूमिका का दावा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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