ईरान परमाणु वार्ता में 'अच्छे संकेत': रुबियो ने कहा — कूटनीति पहली पसंद, विकल्प भी मौजूद
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 21 मई 2025 को मियामी में मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता में 'अच्छे संकेत' मिले हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने अत्यधिक आशावाद से बचने की सलाह दी। रुबियो यूरोप की यात्रा के बाद भारत रवाना होने से पहले पत्रकारों से मुखातिब हुए और स्पष्ट किया कि यदि कूटनीति नाकाम रही तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं।
वार्ता में प्रगति के संकेत
रुबियो ने कहा, 'राष्ट्रपति की पसंद एक अच्छा सौदा करना है — यह हमेशा से उनकी पसंद रही है।' उन्होंने स्वीकार किया कि तेहरान के साथ हालिया संपर्कों में कुछ प्रगति हुई है, हालाँकि उन्होंने ईरानी राजनीतिक ढाँचे की जटिलताओं की ओर भी इशारा किया। रुबियो के अनुसार, 'हमने कुछ प्रगति की है, लेकिन जाहिर है कि हम एक ऐसे सिस्टम से निपट रहे हैं जो खुद थोड़ा टूटा हुआ है।'
पाकिस्तान की भूमिका
रुबियो ने संकेत दिया कि पाकिस्तान इस कूटनीतिक प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि पाकिस्तानी आज तेहरान जाएंगे, इसलिए उम्मीद है कि इससे यह बातचीत और आगे बढ़ेगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों की तनातनी के बाद नए कूटनीतिक संपर्क बन रहे हैं।
सैन्य विकल्पों की चेतावनी बरकरार
रुबियो ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं को लेकर ट्रंप प्रशासन की चेतावनी दोहराई। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ने साफ कहा है, उनके पास दूसरे विकल्प भी हैं। मैं विस्तार में नहीं बताऊंगा कि वे क्या हैं, लेकिन हर कोई जानता है कि वे क्या हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान के पास फिलहाल अमेरिका तक पहुँचने वाली मिसाइलें नहीं हैं, किंतु यूरोप तक पहुँचने में सक्षम मिसाइलें उसके शस्त्रागार में हैं।
नाटो सहयोगियों पर आलोचना
रुबियो ने नाटो के सदस्य देशों की भी आलोचना की और कहा कि वे ईरान के खतरे को तो स्वीकार करते हैं, परंतु ठोस कार्रवाई से पीछे हट जाते हैं। उनके अनुसार, 'नाटो में कई देश हमसे सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता, कि ईरान दुनिया के लिए खतरा है।' उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप उन सहयोगियों से निराश हैं जो अमेरिका के आकलन से तो सहमत हैं, लेकिन कदम उठाने को तैयार नहीं।
आगे की राह
रुबियो ने बार-बार दोहराया कि कूटनीति अमेरिका का पसंदीदा मार्ग है। उन्होंने कहा, 'उनकी पसंद हमेशा एक डील होती है, हमेशा एक समझौता होता है, हमेशा कूटनीति होती है — तो देखते हैं कि हम वहाँ पहुँच पाते हैं या नहीं।' यह वार्ता ईरान की परमाणु गतिविधियों, क्षेत्रीय मिलिशिया और पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा को लेकर महीनों से बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में हो रही है। अगले कुछ दिनों में पाकिस्तानी दूत की तेहरान यात्रा के परिणाम इस वार्ता की दिशा तय कर सकते हैं।