ट्रंप की ईरान को चेतावनी: 'आधी-अधूरी डील नहीं चाहिए', परमाणु वार्ता अंतिम चरण में
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 मई 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु शांति वार्ता अपने अंतिम दौर में पहुँच चुकी है और वह 'सही जवाब' के लिए कुछ दिन और प्रतीक्षा करने को तैयार हैं। ट्रंप ने साफ़ कहा कि वह किसी भी 'आधी-अधूरी डील' को स्वीकार नहीं करेंगे और यदि समझौता नहीं हुआ तो 'कड़े कदम' उठाने से नहीं हिचकेंगे।
ट्रंप का सीधा संदेश
पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'या तो हमारे बीच समझौता हो जाएगा, या फिर हमें कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो थोड़े कड़े होंगे। लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस बार ईरान को केवल एक मौका दिया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी सीमित समझौते में रुचि नहीं रखते जो केवल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने तक सीमित हो। उनके अनुसार, 'मैं जल्दी में नहीं हूँ — चुनाव आने वाले हैं इसलिए जल्दी करनी है, ऐसा मैं कभी नहीं सोचता।'
तुर्की की मध्यस्थ भूमिका
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि बुधवार को उनकी तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से फोन पर 'बहुत अच्छी बातचीत' हुई। तुर्की को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर हो चुका है, लेकिन वह निर्णायक नहीं रहा।
ईरान की कड़ी चेतावनी
दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को आगाह किया कि यदि अमेरिका और इजराइल की ओर से दोबारा हमला हुआ, तो संघर्ष पश्चिम एशिया की सीमाओं से बाहर तक फैल सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दोबारा युद्ध की स्थिति में उसके परिणाम अमेरिका के लिए 'बहुत बड़े और अप्रत्याशित' होंगे। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस की एक हालिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर दर्जनों विमानों के नुकसान का उल्लेख था।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से इजराइल तथा मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम लागू हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव अभी भी उच्च बना हुआ है और कोई स्थायी राजनयिक ढाँचा नहीं बना है।
आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का 'आधी-अधूरी डील नहीं' वाला रुख वार्ता को और जटिल बना सकता है, क्योंकि ईरान भी अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच अगले कुछ दिनों में कोई निर्णायक संकेत मिलने की उम्मीद है।