ट्रंप का ईरान कार्रवाई पर बचाव: 'यह नया युद्ध नहीं, परमाणु खतरा खत्म करना ज़रूरी था'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 जून 2026 को ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई का कड़ा बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई नया युद्ध नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए अपरिहार्य कदम था। उन्होंने यह भी सिरे से खारिज किया कि इस कार्रवाई ने नए युद्धों से दूर रहने के उनके पुराने चुनावी वादे का उल्लंघन किया है।
साक्षात्कार में क्या बोले ट्रंप
एनबीसी न्यूज़ के चर्चित कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' में दिए एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान पर की गई कार्रवाई उनके 2015 से चले आ रहे उस वादे के विरुद्ध है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को नए युद्धों में नहीं धकेलने की बात कही थी। इस पर ट्रंप ने दो-टूक जवाब दिया: 'नहीं, बिल्कुल नहीं। मुझे एक शक्तिशाली और खतरनाक देश को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, क्योंकि वे उसका इस्तेमाल करते। मैं अपने देश की सेवा कर रहा हूं। अमेरिका सबसे पहले है।'
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी यह गारंटी नहीं दी थी कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में सैन्य कार्रवाई से परहेज करेगा। उनके शब्दों में: 'मुझे अंतहीन युद्ध पसंद नहीं हैं, लेकिन यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं है।'
परमाणु खतरे का तर्क
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उनके सामने दो विकल्प थे — आर्थिक स्थिरता बनाए रखना या ईरान के बढ़ते परमाणु खतरे का सामना करना। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया, मध्य पूर्व और इज़रायल के हित में था।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा के कार्यकाल में हुए ईरान परमाणु समझौते को पहले ही समाप्त कर दिया था और बाद में ईरानी परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति दी। उनका दावा था: 'मैंने समझौता खत्म किया और फिर बी-2 बमवर्षक विमानों को भेजा, जिन्होंने उस ठिकाने को पूरी तरह नष्ट कर दिया।'
सैन्य क्षमता को नुकसान का दावा
ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कुछ ही दिनों में गंभीर रूप से कमज़ोर किया जा चुका है। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा: 'यह कोई दलदल नहीं है। हमने एक बेहद खतरनाक देश की सैन्य क्षमता और परमाणु खतरे को खत्म कर दिया है।'
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर गहरी चिंता में है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई देश संयम बरतने की अपील कर चुके हैं।
कूटनीति अभी भी विकल्प
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने उद्देश्यों के काफी करीब पहुँच चुका है और जल्द ही या तो एक मज़बूत समझौता होगा या फिर अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कूटनीति अभी भी मेज़ पर है, लेकिन किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद पिछले दो दशकों से अमेरिकी विदेश नीति का एक केंद्रीय मुद्दा रहा है। विभिन्न अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों, कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र के ज़रिए ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने की कोशिश करते रहे हैं। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि तेहरान किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या वार्ता की कोई नई राह खुलती है।