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ट्रंप का दावा: अमेरिकी हमलों के दौरान ईरान ने फिर बढ़ाया समझौते का हाथ

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ट्रंप का दावा: अमेरिकी हमलों के दौरान ईरान ने फिर बढ़ाया समझौते का हाथ

सारांश

अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने फिर समझौते का संकेत दिया — लेकिन ट्रंप ने साफ कहा कि भरोसा नहीं है। फॉक्स न्यूज साक्षात्कार में उन्होंने चेताया कि बिना समझौते के तेहरान के पास 'कुछ नहीं बचेगा', और सैन्य दबाव को ही एकमात्र असरदार रास्ता बताया।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जुलाई 2026 को फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में दावा किया कि ईरान ने फिर समझौते की इच्छा जताई है।
ट्रंप के प्रतिनिधियों की ईरानी अधिकारियों से साक्षात्कार से करीब एक घंटे पहले बातचीत हुई थी।
ट्रंप ने कहा — 'वे समझौता करना चाहते हैं' — लेकिन सफलता को लेकर अनिश्चितता भी जताई।
ट्रंप ने ईरान को चेताया: 'आपके पास कुछ नहीं बचेगा, कोई नहीं बचेगा।' ट्रंप के अनुसार पहले एक समझौता लगभग तय था, लेकिन ईरान आखिरी वक्त में पीछे हट गया।
ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियारों से रोकना अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जुलाई 2026 को दावा किया कि ईरान ने एक बार फिर कूटनीतिक संपर्क साधा है और तेहरान की ओर से संकेत मिले हैं कि वह परमाणु मुद्दे पर समझौता करने को तैयार है। ट्रंप ने यह बात फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कही, जो व्हाइट हाउस में आयोजित हुआ।

साक्षात्कार में ट्रंप के मुख्य दावे

ट्रंप ने बताया कि साक्षात्कार से महज एक घंटे पहले उनके प्रतिनिधियों की ईरानी अधिकारियों से बातचीत हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मैंने नहीं, बल्कि मेरे प्रतिनिधियों ने बात की। वास्तव में करीब एक घंटे पहले ही बातचीत हुई है।' जब उनसे पूछा गया कि ईरान का संदेश क्या था, तो ट्रंप ने संक्षेप में कहा, 'वे समझौता करना चाहते हैं।'

हालाँकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें इस ताजा संपर्क से किसी बड़ी सफलता को लेकर भरोसा नहीं है। उन्होंने तेहरान पर बार-बार समझौते तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि अतीत में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता लगभग तय हो गया था, लेकिन ईरान ने आखिरी वक्त में पीछे हटने का फैसला किया।

अमेरिका की कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया: 'बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें। आपके पास कुछ नहीं बचेगा, कोई नहीं बचेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका नागरिक आबादी की सुरक्षा को लेकर सतर्क है, लेकिन सैन्य दबाव जारी रहेगा।

राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल वे तुरंत सीधी बातचीत में रुचि नहीं रखते। उनके अनुसार, 'जैसे-जैसे अमेरिकी सैन्य दबाव बढ़ रहा है, ईरान के पास बातचीत की मेज पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'

परमाणु हथियार रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता

ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका का सबसे अहम रणनीतिक लक्ष्य है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरानी नेतृत्व समझौते को लेकर गंभीर है, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है।'

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सैन्य अभियान जारी बताया जा रहा है और दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। ट्रंप का मानना है कि तेहरान के साथ बातचीत का एकमात्र प्रभावी माध्यम सैन्य ताकत का प्रदर्शन है।

पिछला समझौता क्यों टूटा

ट्रंप के अनुसार, तनाव बढ़ने से पूर्व दोनों पक्षों के बीच एक समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका था, लेकिन ईरान ने अंतिम क्षण में उससे पीछे हटने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, 'हमारे बीच समझौता हो गया था और फिर उन्होंने आखिरी समय में उसे तोड़ दिया।' यह पहली बार नहीं है — ट्रंप ने ईरान पर बार-बार वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

आगे क्या होगा

कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी संभावित समझौते की राह अभी भी कठिन है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर गहरे मतभेद बने हुए हैं। ट्रंप की भाषा और रुख से स्पष्ट है कि वाशिंगटन फिलहाल सैन्य दबाव की नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ताकत दिखाते रहो।' समस्या यह है कि जब राष्ट्रपति खुद कहते हैं कि उन्हें भरोसा नहीं कि इस संपर्क से कुछ निकलेगा, तो यह कूटनीतिक संकेत कमज़ोर पड़ जाता है। ईरान का बार-बार आखिरी वक्त में पीछे हटना और अमेरिका का 'अभी बातचीत नहीं चाहते' का रुख — दोनों मिलकर एक ऐसा गतिरोध बनाते हैं जिसमें समझौते की संभावना तो दिखती है, पर रास्ता साफ नहीं। असली सवाल यह है कि सैन्य दबाव के बीच जो 'समझौते की इच्छा' ईरान ने जताई है, वह रणनीतिक विराम की माँग है या वाकई परमाणु कार्यक्रम पर झुकने की तैयारी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान के समझौते की कोशिश के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने दावा किया कि फॉक्स न्यूज साक्षात्कार से करीब एक घंटे पहले उनके प्रतिनिधियों की ईरानी अधिकारियों से बातचीत हुई और ईरान ने संकेत दिया कि वह समझौता करना चाहता है। हालाँकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें इस संपर्क से बड़ी सफलता मिलने का भरोसा नहीं है।
अमेरिका और ईरान के बीच पहले का समझौता क्यों टूटा?
ट्रंप के अनुसार, तनाव बढ़ने से पहले दोनों पक्षों के बीच एक समझौता लगभग तय हो गया था, लेकिन ईरान ने आखिरी क्षण में उससे पीछे हटने का फैसला किया। ट्रंप ने कहा, 'हमारे बीच समझौता हो गया था और फिर उन्होंने आखिरी समय में उसे तोड़ दिया।'
ट्रंप ने ईरान को क्या चेतावनी दी?
ट्रंप ने ईरान को सीधे शब्दों में चेताया कि यदि समझौता नहीं हुआ तो 'आपके पास कुछ नहीं बचेगा, कोई नहीं बचेगा।' उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत का एकमात्र असरदार तरीका सैन्य ताकत दिखाना है।
क्या ट्रंप अभी ईरान से सीधी बातचीत करना चाहते हैं?
नहीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वे तुरंत बातचीत में रुचि नहीं रखते। उनका कहना है कि बढ़ते सैन्य दबाव के बीच ईरान के पास बातचीत की मेज पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
ईरान को परमाणु हथियारों से रोकना अमेरिका के लिए क्यों सर्वोच्च प्राथमिकता है?
ट्रंप ने साक्षात्कार में कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका का सबसे अहम रणनीतिक मकसद है। यह लंबे समय से अमेरिकी विदेश नीति का केंद्रीय बिंदु रहा है, और ट्रंप प्रशासन इसे सैन्य दबाव के ज़रिये हासिल करने की नीति पर चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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