9 जुलाई 2026
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तेहरान पर नए हमलों के बाद ट्रंप की चेतावनी: 'ईरान समझौता मानेगा या नहीं, पक्का नहीं'

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तेहरान पर नए हमलों के बाद ट्रंप की चेतावनी: 'ईरान समझौता मानेगा या नहीं, पक्का नहीं'

सारांश

तेहरान पर नए जवाबी हमलों के बाद ट्रंप ने माना कि ईरान बातचीत के लिए बेताब है — लेकिन साथ ही संशय भी जताया कि वह किसी समझौते का सम्मान करेगा या नहीं। '20-1' के अनुपात वाला यह सैन्य रुख और परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त बताती है कि अमेरिका-ईरान तनाव अभी लंबा खिंचेगा।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 9 जुलाई को कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उन्हें नहीं पता वह डील का सम्मान करेगा या नहीं।
अमेरिका ने ईरान के हमलों का 20 गुना अधिक ताकत से जवाब देने का दावा किया; ईरान ने तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया था।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह पूरा टकराव ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण पर केंद्रित है।
नाटो शिखर सम्मेलन (तुर्किए) को ट्रंप ने सफल बताया; सहयोगी देश ईरान मामले में मदद के लिए उत्सुक।
सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने हिज्बुल्लाह को लेकर वादा किया — ट्रंप ने पुष्टि की, विवरण नहीं दिया।
ट्रंप ने एयरक्राफ्ट बदलने की खबरों को खारिज किया; कहा — 'ईरान की लिस्ट में मैं हर समय नंबर वन हूं।'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 जुलाई 2026 को कहा कि तेहरान पर नए जवाबी हमलों के बाद ईरान बातचीत की मेज पर लौटना चाहता है, लेकिन उन्होंने साफ़ शब्दों में यह भी कहा कि वे इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि ईरान किसी भी परमाणु समझौते का सम्मान करेगा। तुर्किए में नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते हुए एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए हर ज़रूरी कदम उठाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समय) को पत्रकारों को बताया कि अमेरिका ने ईरानी हमलों का जवाब 20 गुना अधिक ताकत से दिया है। उन्होंने कहा, 'हमने उन पर बहुत कड़ा जवाबी हमला किया। मैं कहता हूं कि अनुपात 20-1 का रहा। वे हर बार हम पर हमला करेंगे, तो हम 20 गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे।' ट्रंप के अनुसार ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की।

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने दो नहीं, बल्कि तीन जहाजों पर हमला किया था। उन्होंने कहा, 'जब उन्होंने हमला किया, तो हमने उससे कहीं अधिक जोरदार जवाब दिया।'

समझौते पर ट्रंप का संशय

जब ट्रंप से पूछा गया कि यदि ईरान समझौता चाहता है, तो वह वाणिज्यिक जहाजों पर हमला क्यों करेगा, तो उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो यह सामान्य बात नहीं है। हालात इतने असामान्य हैं कि वे कुछ हद तक नियंत्रण से बाहर हो गए हैं, लेकिन वे समझौता करने के लिए बेताब हैं।' ट्रंप ने स्वीकार किया, 'मुझे नहीं पता कि वे डील मानेंगे या नहीं; यही समस्या है।'

परमाणु निरस्त्रीकरण पर अमेरिकी रुख

ट्रंप ने कहा कि यह पूरा टकराव ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, 'यह ईरान का डी-न्यूक्लियराइजेशन था, इसलिए यह सब परमाणु हथियार लेने, ईरान को न्यूक्लियर हथियार न बनाने देने के बारे में है।' ट्रंप प्रशासन का रुख है कि सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव के ज़रिए तेहरान को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया जाएगा।

नाटो और सहयोगी देशों की भूमिका

ट्रंप ने तुर्किए में हुए नाटो शिखर सम्मेलन को सफल बताया और कहा कि रक्षा खर्च को लेकर पहले के तनाव के बाद गठबंध ने एकता दिखाई है। उन्होंने कहा, 'यह बहुत, बहुत अच्छी मीटिंग थी और लोग समझते हैं कि अमेरिका के साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया है।' ट्रंप ने यह भी कहा कि जो सहयोगी देश पहले मदद करने से मना कर रहे थे, वे अब ईरान के मामले में सहयोग के लिए उत्सुक हैं — हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें 'सच में मदद की ज़रूरत नहीं है।'

सुरक्षा चिंताएँ और अन्य घटनाक्रम

ट्रंप ने उन अटकलों को खारिज किया कि तुर्किए छोड़ने से पहले आखिरी समय में एयरक्राफ्ट बदलना किसी विशेष सुरक्षा खतरे के कारण हुआ। उन्होंने कहा यह बदलाव एयर बेस पर मौजूद लोगों को विमान दिखाने के लिए किया गया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान से एयर फोर्स वन को कोई भरोसेमंद खतरा था, तो ट्रंप ने कहा, 'उनकी लिस्ट में मैं हर समय नंबर वन पर रहता हूं।' इस दौरान ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की सराहना की और कहा कि अल-शरा ने लेबनान में हिज्बुल्लाह को लेकर वादा किया है, हालांकि विस्तृत जानकारी देने से उन्होंने इनकार किया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बारे में ट्रंप ने कहा कि वे नाटो बैठक के दौरान 'बहुत अच्छे' रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य आदान-प्रदान और वाणिज्यिक शिपिंग पर हमलों के बाद तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है। आगे की कूटनीतिक दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान वार्ता की शर्तों पर कितना लचीलापन दिखाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इतनी आक्रामक भाषा वार्ता की संभावनाओं को संकरा करती है। गौरतलब है कि 2015 का JCPOA समझौता भी इसी तरह के 'अधिकतम दबाव' के बाद बना था, और बाद में ट्रंप ने खुद उसे तोड़ा था। अब जब परमाणु निरस्त्रीकरण को शर्त बनाया जा रहा है — जो ईरान के लिए ऐतिहासिक रूप से अस्वीकार्य रही है — तो असली सवाल यह है कि क्या यह वार्ता की दिशा है या सैन्य विकल्प को वैध ठहराने की पटकथा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान समझौते को लेकर क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता ईरान किसी भी परमाणु समझौते का सम्मान करेगा या नहीं। उन्होंने माना कि ईरान बातचीत के लिए बेताब है, लेकिन साथ ही उसके इरादों पर संशय भी जताया।
अमेरिका ने ईरान पर कितनी ताकत से जवाबी हमला किया?
ट्रंप के अनुसार अमेरिका ने ईरान के हमलों का 20 गुना अधिक ताकत से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया था, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिका-ईरान तनाव का मूल कारण क्या है?
ट्रंप के अनुसार यह पूरा टकराव ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण पर केंद्रित है। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके, और इसके लिए वह सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल कर रहा है।
नाटो शिखर सम्मेलन में ईरान मुद्दे पर क्या हुआ?
ट्रंप ने तुर्किए में हुए नाटो शिखर सम्मेलन को सफल बताया। उन्होंने कहा कि जो सहयोगी देश पहले मदद से मना कर रहे थे, वे अब ईरान के मामले में सहयोग के लिए उत्सुक हैं, हालांकि ट्रंप ने कहा कि उन्हें अभी मदद की ज़रूरत नहीं है।
सीरिया और हिज्बुल्लाह पर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की सराहना की और पुष्टि की कि अल-शरा ने लेबनान में हिज्बुल्लाह को लेकर कोई वादा किया है। हालांकि, ट्रंप ने इस वादे का विस्तृत विवरण देने से इनकार कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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