ट्रंप बोले — ईरान में नया नेतृत्व उभरा, परमाणु समझौते और पुनर्निर्माण का मिलेगा मौका
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जून को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की शीर्ष नेतृत्व संरचना को बदल दिया है और तेहरान में अब एक नया नेतृत्व समूह सामने आया है, जो वॉशिंगटन के साथ परमाणु वार्ता के लिए कहीं अधिक तैयार दिख रहा है। ट्रंप ने कहा कि यदि समझौता सफल होता है तो ईरान को अपने देश के पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक अवसर मिल सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं के सामने कहा, 'यह एक तरह से शासन परिवर्तन है, क्योंकि मुझे ये लोग ज़्यादा समझदार और तर्कसंगत लगते हैं, उन लोगों से जो अब हमारे बीच नहीं हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि नए नेतृत्व ने प्रस्तावित समझौते के ढाँचे को मंजूरी दे दी है और वे इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ट्रंप के अनुसार, 'हमने पहले नेतृत्व टीम को खत्म किया, फिर दूसरी को। अब एक अलग तरह का समूह है — अलग स्तर का — और मुझे लगता है कि ये ज़्यादा समझदार है और तर्क से काम करता है।'
ईरान की सैन्य स्थिति पर ट्रंप का आकलन
राष्ट्रपति ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर कड़ा बयान दिया। उनके अनुसार, 'उनकी नौसेना खत्म हो गई है, वायुसेना खत्म हो गई है, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम भी खत्म हो गया है — सब खत्म हो गया है।' ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान उनसे कहीं ज़्यादा इस समझौते को चाहता है।
गौरतलब है कि अमेरिकी सरकारें परंपरागत रूप से ईरान के संदर्भ में 'शासन परिवर्तन' को अपनी नीति का घोषित लक्ष्य बताने से परहेज करती रही हैं। ट्रंप का यह बयान उस परंपरा से स्पष्ट विचलन है।
परमाणु समझौते की संभावना
ट्रंप ने बार-बार रेखांकित किया कि वार्ता का केंद्रीय उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से स्थायी रूप से रोकना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच ऐसा समझौता जल्द संभव है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दीर्घकालिक अंकुश लगाए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संबंध दशकों की तनातनी के बाद एक नए मोड़ पर दिख रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, सैन्य दबाव और कूटनीतिक वार्ता का यह मेल अभूतपूर्व है।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के 'शासन परिवर्तन' संबंधी बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मानदंडों के विपरीत हैं और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि सैन्य दबाव ने वह हासिल किया जो वर्षों की वार्ता नहीं कर सकी।
आगे की परमाणु वार्ता की दिशा और ईरान के नए नेतृत्व की स्थिरता पर सभी की निगाहें टिकी हैं।