ईरान के लिए अमेरिका से समझौते की डेडलाइन, राष्ट्रपति के पास है आगे की रणनीति
सारांश
Key Takeaways
- ईरान के पास अमेरिका से समझौता करने के लिए कठोर डेडलाइन है।
- डोनाल्ड ट्रंप ने इस समय को महत्वपूर्ण बताया।
- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियाँ बढ़ाई हैं।
- आगे की रणनीति केवल राष्ट्रपति द्वारा जानी जाएगी।
वॉशिंगटन, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के पास अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम, यानी भारत में बुधवार की सुबह 5:30 बजे तक) का समय है। यह कठोर डेडलाइन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ते तनाव के बीच निर्धारित की है। यह जानकारी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस के साथ चर्चा करते हुए साझा की।
कैरोलिन लेविट ने कहा, “ईरानी सरकार को रात आठ बजे तक का अवसर है कि वह इस मौके को समझे और अमेरिका के साथ समझौता करे। वर्तमान स्थिति और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह केवल राष्ट्रपति ही जानते हैं।”
उनके इस बयान के समय में, डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से एक ओर बड़े खतरे की चेतावनी दी है और दूसरी ओर ईरान में संभव राजनीतिक बदलाव की संभावना भी व्यक्त की है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो सकता है, जो कभी वापस नहीं आएगी। मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन यह संभव है।”
उन्होंने यह भी कहा कि शायद अब एक बड़ा बदलाव आ रहा है, लेकिन जब सत्ता परिवर्तन हो चुका है, जहां अधिक समझदार और कम कट्टर विचारधारा वाले लोग आगे आ सकते हैं, तो कुछ अच्छा और नया हो सकता है। कौन जानता है?”
ट्रंप ने इस क्षण को बहुत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा, “आज रात हमें पता चल जाएगा, यह दुनिया के लंबे और जटिल इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक हो सकता है।”
इससे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के व्यवहार में परिवर्तन लाना है, लेकिन यदि ईरान बातचीत करता है, तो स्थिति को शांत करने का रास्ता अभी भी खुला है।
वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोहराया कि अमेरिका अपने हितों की रक्षा करने और महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा के लिए कड़ा कदम उठाने को तैयार है।
इन सभी बयानों से स्पष्ट है कि सरकार एक ही संदेश दे रही है: कठोर डेडलाइन, गंभीर परिणामों की चेतावनी, और ईरान की सरकार पर निरंतर दबाव।
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। ईरान से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।