दिल्ली सरकार डॉ. भीमराव आंबेडकर की 136वीं जयंती के लिए पांच दिवसीय समारोह आयोजित करेगी
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. भीमराव आंबेडकर की 136वीं जयंती का आयोजन
- 'भीम ज्योति उत्सव' का मुख्य आकर्षण
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और गतिविधियाँ
- सामाजिक समरसता का संदेश
- जनता की भागीदारी की अपील
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के सामाजिक कल्याण मंत्री रविंदर इंद्राज सिंह ने शुक्रवार से 14 अप्रैल तक कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। ये सभी कार्यक्रम भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की 136वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने सभी नागरिकों को इन विशेष आयोजनों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि इस वर्ष बाबा साहेब की जयंती दिल्ली में भव्य और उत्साहपूर्ण तरीके से मनाई जाएगी।
दिल्ली के सामाजिक कल्याण मंत्री ने बताया कि इन समारोहों का मुख्य आकर्षण 'भीम ज्योति उत्सव' होगा, जो इंडिया गेट के पास कस्तूरबा गांधी मार्ग पर आयोजित किया जाएगा। यहां बाबा साहेब से जुड़ी साहित्य सामग्री और उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को एक विशेष गैलरी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में आने वाले लोगों को भीमराव आंबेडकर के जीवन, विचारों और संघर्षों को समझने का अवसर मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रस्तुतियां और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिनके जरिए उनके विचारों को जनता तक पहुँचाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि यह मंच राष्ट्रीय एकता की भावना को दर्शाएगा। देशभर से साधु-संत, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और सामाजिक समरसता के लिए कार्य करने वाले लोग इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
उन्होंने बताया कि बाबा साहेब का मूल संदेश 'राष्ट्र प्रथम' था और वे हमेशा राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते थे।
उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल से 14 अप्रैल तक आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनता से शामिल होने की अपील की।
उन्होंने बताया कि 'भीम ज्योति उत्सव–2026' के तहत राजधानी के विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
यह आयोजन केवल उत्सव नहीं है, बल्कि बाबा साहेब के विचारों, संविधान के मूल्यों और सामाजिक समरसता के संदेश को फैलाने का एक व्यापक अभियान होगा। इसमें पुष्पांजलि, जनभागीदारी गतिविधियां, “संविधान महोत्सव”, प्रदर्शनी, जागरूकता अभियान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, वॉकथॉन, संवाद सत्र, कार्यशालाएं, क्विज और कला प्रदर्शनियां शामिल होंगी, जिनका उद्देश्य युवाओं और छात्रों को संविधान, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है।