पश्चिम एशिया संकट: एडीबी ने बांग्लादेश की विकास दर को घटाकर 4 प्रतिशत किया
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश की विकास दर में कमी का अनुमान 4 प्रतिशत है।
- पश्चिम एशिया में तनाव का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- महंगाई 2026 में लगभग 9 प्रतिशत रह सकती है।
- चालू खाते का घाटा जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- राजनीतिक अनिश्चितता के कारण आर्थिक सुधार में बाधा आ रही है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बढ़ते वैश्विक राजनीतिक तनाव के बीच, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को चालू वित्त वर्ष (जो जून में समाप्त होगा) के लिए 4 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 4.7 प्रतिशत था।
एडीबी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन की बढ़ती कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण यह कटौती की गई है। ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, एडीबी ने अगले वित्त वर्ष (2026–27) के लिए बांग्लादेश की विकास दर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
महत्वपूर्ण है कि एडीबी ने बांग्लादेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमान में तीसरी बार संशोधन किया है। पहले दिसंबर में चालू वित्त वर्ष के लिए 4.7 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया था, जो सितंबर में 5 प्रतिशत और पिछले वर्ष अप्रैल में 5.1 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान परिदृश्य में खपत और निवेश में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है, जिसे आम चुनावों के बाद राजनीतिक अनिश्चितता में कमी से समर्थन मिलेगा।
एडीबी के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई अस्थायी बाधाओं का असर पिछले तिमाही में देखा गया, हालांकि इसके धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।
एडीबी के कंट्री डायरेक्टर हो यून जियोंग ने कहा, “बांग्लादेश एक चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल का सामना कर रहा है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं, घरेलू संरचनात्मक बाधाओं और बाहरी तथा वित्तीय क्षेत्रों के दबाव से प्रभावित है।”
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में महंगाई करीब 9 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो 2027 में घटकर 8.5 प्रतिशत होने का अनुमान है, क्योंकि बाहरी झटके कम होंगे और घरेलू आपूर्ति स्थिति में सुधार होगा।
हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबे समय तक चलता है, तो आर्थिक परिदृश्य के लिए नकारात्मक जोखिम बने रहेंगे।
एडीबी ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, शिपिंग रूट और सप्लाई चेन में व्यवधान से तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ेगा तथा इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाएगा।
इसके अतिरिक्त, चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2027 में बढ़कर 0.6 प्रतिशत हो सकता है।