तुर्किए और इजरायल के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा, नेतन्याहू ने एर्दोगन पर गंभीर आरोप लगाए
सारांश
Key Takeaways
- नेतन्याहू ने एर्दोगन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- तुर्किए और इजरायल के बीच तनाव बढ़ रहा है।
- पाकिस्तान ने वार्ता में महत्वपूर्ण मध्यस्थता की है।
- अमेरिका ने ईरान का प्रस्ताव खारिज कर दिया है।
- गाजा संघर्ष के संबंध में नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
दोहा, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि वे अपने ही कुर्द नागरिकों का “नरसंहार” कर रहे हैं और ईरान के “आतंकी शासन” का समर्थन कर रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने कहा, “मेरे नेतृत्व में इजरायल ईरान के आतंकी शासन और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा, जबकि एर्दोगन उन्हें समर्थन देते हैं और अपने ही कुर्द नागरिकों का नरसंहार करते हैं।”
यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता चल रही है।
नेतन्याहू का यह बयान तब आया है जब तुर्किए के अभियोजकों ने गाजा संघर्ष और 2025 के ‘सुमुद फ्लोटिला’ मामले में मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोपों के तहत नेतन्याहू और अन्य इजरायली अधिकारियों के लिए 4,596 साल तक की सजा की मांग की गई है।
इजरायल और तुर्किए के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में तेज हुई है जब दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ रहा है।
इससे पहले राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा था कि यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता नहीं होती, तो तुर्की भी इस क्षेत्रीय युद्ध में शामिल हो सकता था।
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच आमने-सामने की वार्ता जारी है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
पाकिस्तान ने इन वार्ताओं के लिए राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है और रेड जोन स्थित सेरेना होटल को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोनों पक्षों से अलग-अलग मुलाकात कर चुके हैं और अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सभी पक्षों के लिए एक “विश्वसनीय मध्यस्थ” के रूप में उभरा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के प्रारंभिक 10 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।