ईरान ने ट्रंप को निशाने पर लिया, वार्ता विफलता और पोप लियो के अपमान की की निंदा

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ईरान ने ट्रंप को निशाने पर लिया, वार्ता विफलता और पोप लियो के अपमान की की निंदा

सारांश

ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता विफल होने पर ट्रंप की कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पूछा है कि नाक काटकर नुकसान उठाना सही है। क्या यह उचित है?

Key Takeaways

  • ईरान ने ट्रंप की आलोचना की है।
  • वार्ता विफल होने से अविश्वास बढ़ा है।
  • पोप लियो का अपमान अमानवीय है।
  • ईरान अमेरिका के साथ समझौते के लिए तैयार है।
  • बकाई ने डिप्लोमेसी की आवश्यकता पर जोर दिया।

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता के विफल होने और पोप लियो के अपमान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी आलोचना की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या अपनी नाक काटकर अपना नुकसान करना उचित है?

इस्माइल बकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था के खिलाफ 'पसंद का बदला' लेकर एक गैर-कानूनी 'पसंद की लड़ाई' जीती जा सकती है? क्या कभी अपनी नाक काटकर अपना नुकसान करना सही होता है?''

एक अन्य पोस्ट में प्रवक्ता बकाई ने कहा, ''जब बमों की गड़गड़ाहट और हमलावरों का शोर दुनिया की अंतरात्मा पर भारी पड़ रहा है, ऐसे में पोप लियो के शब्द गॉस्पेल की गहरी पुकार को दोहराते हैं: 'शांति बनाने वाले धन्य हैं।' '

बकाई ने कहा कि पोप लियो का अपमान करना न केवल 'ईसाई धर्म के खिलाफ' है, बल्कि यह शांति, न्याय और मानवता के लिए जिम्मेदार वकालत पर एक खुला हमला है।

वार्ता के बेनतीजा होने के बाद बकाई ने कहा कि देश अमेरिका के पिछले वादे तोड़ने को “न भूला है और न भूलेगा”। इससे इस्लामाबाद में बातचीत जारी रहने के बावजूद गहरे अविश्वास का पता चलता है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी एक राउंड की बातचीत में नतीजे की उम्मीद नहीं की थी।

इस्माइल बकाई ने कहा, “हमारे लिए डिप्लोमेसी ईरानी जमीन के रक्षकों के पवित्र जिहाद को जारी रखना है। हम अमेरिका के वादे तोड़ने और गलत कामों के अनुभवों को नहीं भूले हैं और न ही भूलेंगे। ठीक वैसे ही जैसे हम दूसरे और तीसरे थोपे गए युद्धों के दौरान उनके और यहूदी शासन द्वारा किए गए जघन्य अपराधों को माफ नहीं करेंगे।” हालांकि, ईरान बातचीत की शुरुआत से पहले भी दोहराता रहा है कि अमेरिका के साथ विश्वास की कमी है।

वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी अपने एक बयान में संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि समाधान के लिए वाशिंगटन को अपनी तानाशाही छोड़नी होगी और ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना होगा।

Point of View

जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

ईरान ने ट्रंप पर क्यों निशाना साधा?
ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता विफल होने और पोप लियो के अपमान पर ट्रंप की आलोचना की है।
बकाई ने क्या कहा?
बकाई ने ट्रंप के निर्णय को लेकर सवाल उठाया कि क्या अपनी नाक काटकर नुकसान उठाना सही है।
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