ट्रंप का ऐलान: ईरान के पास समझौते के सिवा कोई चारा नहीं, अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 जुलाई 2026 को वाशिंगटन में स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के विरुद्ध संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह सज्ज है, हालाँकि साथ ही कूटनीतिक वार्ता भी जारी है। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को त्यागने पर राज़ी होता है, तो डिप्लोमैटिक समाधान उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी।
व्हाइट हाउस में क्या बोले ट्रंप
व्हाइट हाउस में असैन्य परमाणु ऊर्जा से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, 'हम अभी उनसे बातचीत कर रहे हैं। हम पूरी तरह तैयार हैं और कार्रवाई के लिए तैयार बैठे हैं, लेकिन बातचीत भी जारी है। देखते हैं इससे क्या नतीजा निकलता है।' उन्होंने दो स्पष्ट विकल्पों का उल्लेख किया — सैन्य अभियान को और तेज़ करना, अथवा समझौते की राह पर चलना।
ट्रंप ने कहा, 'एक सैन्य रास्ता है, जिसमें हम मौजूदा अभियान को इसी तरह जारी रखें और चाहें तो इसे और भी ज़्यादा तेज़ कर सकते हैं। दूसरा ज़्यादा समझदारी वाला रास्ता यह है कि समझौता किया जाए। वे भी समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे अभी पूरी तरह तैयार हैं।'
ईरान की 'गंभीरता' पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत में ईरान इस समय पहले के मुकाबले सबसे अधिक गंभीर नज़र आ रहा है। उन्होंने कहा, 'जितना हमने उन्हें पहले कभी गंभीर नहीं देखा, उससे कहीं ज़्यादा गंभीर वे अब नज़र आ रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम समझौते तक पहुँच ही जाएंगे।' हालाँकि उन्होंने किसी समझौते की कोई गारंटी देने से साफ़ इनकार किया।
अमेरिका का मूल संदेश दोहराते हुए ट्रंप ने कहा, 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। बात इतनी ही सरल है। अगर उनके मन में भी परमाणु हथियार का विचार आया, तो हम कहीं ज़्यादा बड़े स्तर पर कार्रवाई जारी रखेंगे।'
वार्ता में शामिल वरिष्ठ अधिकारी
ट्रंप ने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत में जुटे हैं। उन्होंने कहा, 'जेडी, मार्को और कई अन्य लोग कई लोगों से बातचीत कर रहे हैं।'
ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप के दावे
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी दबाव अभियान ने ईरान की सैन्य क्षमता को व्यापक रूप से कमज़ोर कर दिया है। उन्होंने कहा, 'हमने उनके शीर्ष स्तर के नेतृत्व को खत्म कर दिया। फिर दूसरे स्तर के नेतृत्व को भी खत्म किया।' उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के पास 'अब न नौसेना बची है, न वायुसेना, न एयर डिफेंस, न रडार और न ही कोई प्रभावी सैन्य क्षमता।' गौरतलब है कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रंप ने बी-2 बॉम्बर्स की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इन हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य और परमाणु ठिकानों को तबाह किया गया। उन्होंने कहा, 'अगर ऐसा नहीं हुआ होता, तो ईरान के पास परमाणु हथियार होता और इज़रायल का अस्तित्व नहीं बचता।'
रूस और चीन की भूमिका पर ट्रंप का बयान
रूस और चीन द्वारा ईरान की संभावित मदद के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि फ़िलहाल दोनों देशों ने किसी बड़े स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे ईरान के समर्थन में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। ट्रंप ने कहा, 'मुझे उन पर भरोसा है।' हालाँकि उन्होंने माना कि ईरान के इन दोनों देशों के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका एक के बाद एक सरकारों में आर्थिक दबाव, सैन्य रोकथाम और कूटनीतिक संवाद के बीच संतुलन बनाता रहा है। ईरान ने लगातार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इस पर लंबे समय से संदेह जताया है। आने वाले हफ्तों में वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि क्षेत्र में तनाव घटता है या और बढ़ता है।