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ईरान से बातचीत जारी: ट्रंप बोले — कूटनीति हो या सैन्य बल, जीत अमेरिका की होगी

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ईरान से बातचीत जारी: ट्रंप बोले — कूटनीति हो या सैन्य बल, जीत अमेरिका की होगी

सारांश

ट्रंप का संदेश साफ है — ईरान के साथ बातचीत की मेज़ अभी बिछी है, लेकिन सैन्य विकल्प भी तैयार है। परमाणु हथियारों पर 'ज़ीरो टॉलरेंस' और होर्मुज़ स्ट्रेट की खुली आवाजाही — यही दो शर्तें किसी भी समझौते की बुनियाद होंगी।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 जून 2026 को पुष्टि की कि अमेरिका-ईरान परमाणु बातचीत अभी जारी है।
ट्रंप ने कहा — कूटनीति हो या सैन्य बल, जीत अमेरिका की होगी ; किसी भी समझौते की अनिवार्य शर्त है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए ।
ट्रंप ने ओबामा-युग JCPOA को 'गलत समझौता' बताया और कहा कि उन्होंने उसे इसीलिए खत्म किया था।
ईरान द्वारा अमेरिकी सैनिकों पर हमले की स्थिति में ट्रंप ने 'बहुत जल्दी कार्रवाई' की चेतावनी दी।
होर्मुज़ स्ट्रेट की खुली आवाजाही को ट्रंप ने समझौते का अगला स्वाभाविक परिणाम बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 जून 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत अभी भी सक्रिय रूप से जारी है। ट्रंप ने दो-टूक कहा कि चाहे कूटनीतिक समझौते के ज़रिए हो या सैन्य ताकत के बल पर, अंतिम परिणाम अमेरिका के पक्ष में ही रहेगा।

ट्रंप का मुख्य बयान

ट्रंप ने कहा, 'देखते हैं क्या होता है। हम एक न एक तरीके से जीतेंगे — कागज पर समझौते के ज़रिए या फिर सैन्य ताकत से। किसी भी तरह, जीत हमारी ही होगी।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित समझौते की सबसे बड़ी और अनिवार्य शर्त यह होगी कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके

उन्होंने आगे कहा, 'समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसके बाद होर्मुज़ स्ट्रेट तुरंत खुल जाएगा।' ट्रंप के अनुसार, ईरान को परमाणु हथियार रखने से रोकने के मुद्दे पर लगभग पूरी दुनिया एकमत है।

ओबामा-युग परमाणु समझौते से तुलना

ट्रंप ने संभावित नए समझौते की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से की। उन्होंने कहा, 'ओबामा ने गलत देश चुना था। मैंने उस समझौते को खत्म कर दिया था, क्योंकि वह ईरान को परमाणु हथियार तक पहुँचाने का रास्ता था।' ट्रंप ने दावा किया कि मौजूदा बातचीत 'अच्छी चल रही है', हालाँकि उन्होंने माना कि आगे क्या होगा यह अनिश्चित है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में ओबामा-युग के JCPOA से अमेरिका को एकतरफा बाहर निकाल लिया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता रहा है।

सैन्य कार्रवाई पर सीधी चेतावनी

जब ट्रंप से पूछा गया कि यदि ईरान अमेरिकी सैनिकों पर हमला करता है तो क्या होगा, तो उन्होंने कहा, 'अगर वे अमेरिकी सैनिकों को मारते हैं, तो मुझे लगता है कि मैं बहुत जल्दी कार्रवाई करूँगा।' उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के संदर्भ में यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन माँगने का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही कहा कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका अकेले भी कार्रवाई करने में सक्षम है। उनके शब्दों में, 'हमें उनकी मदद की ज़रूरत नहीं है। दुनिया की सबसे ताकतवर सेना हमारे पास है।'

ईरान के नए नेतृत्व से संवाद की संभावना

ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता के साथ कूटनीतिक संवाद की गुंजाइश बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'मैं मिलना नहीं चाहता, लेकिन अगर मुलाकात हुई तो मुझे सम्मान महसूस होगा। मैं देखना चाहूँगा कि क्या हम कोई समझौता कर सकते हैं।' यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा पर दीर्घकालिक समझौते के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

होर्मुज़ स्ट्रेट का महत्व

होर्मुज़ स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। इस जलडमरूमध्य पर किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को सीधे प्रभावित कर सकती है। ट्रंप की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सत्यापन तंत्र और समयसीमा पर कोई ठोस ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है। होर्मुज़ स्ट्रेट का संदर्भ बताता है कि वार्ता केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है — क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा भी दाँव पर है। यूरोपीय सहयोगियों को 'ज़रूरत नहीं' कहना गठबंधन कूटनीति के लिए एक जोखिम भरा संकेत है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर क्या कहा?
ट्रंप ने 5 जून 2026 को व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका-ईरान बातचीत जारी है और चाहे कूटनीति हो या सैन्य बल, जीत अमेरिका की होगी। उन्होंने किसी भी समझौते की सबसे बड़ी शर्त ईरान का परमाणु हथियार न बनाना बताया।
ट्रंप ने ओबामा के ईरान परमाणु समझौते की आलोचना क्यों की?
ट्रंप ने कहा कि ओबामा-युग का JCPOA समझौता ईरान को परमाणु हथियार तक पहुँचाने का रास्ता था, इसीलिए उन्होंने 2018 में उसे खत्म किया। उनके अनुसार नया संभावित समझौता इस खामी को दूर करेगा।
होर्मुज़ स्ट्रेट इस बातचीत में क्यों अहम है?
होर्मुज़ स्ट्रेट विश्व का सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्ग है जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। ट्रंप ने कहा कि परमाणु समझौते के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट तुरंत खुल जाएगा, जो इसे बातचीत का एक प्रमुख आर्थिक आयाम बनाता है।
क्या ट्रंप ईरान के नए नेता से मिलने को तैयार हैं?
ट्रंप ने कहा कि वे मिलना नहीं चाहते, लेकिन यदि मुलाकात होती है तो उन्हें सम्मान महसूस होगा और वे देखेंगे कि क्या कोई समझौता संभव है। यह बयान ईरान के नए सर्वोच्च नेतृत्व के साथ कूटनीतिक संवाद की संभावना खुली रखता है।
ईरान द्वारा अमेरिकी सैनिकों पर हमले की स्थिति में ट्रंप क्या करेंगे?
ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि यदि ईरान अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुँचाता है, तो वे 'बहुत जल्दी कार्रवाई' करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है और उसे किसी यूरोपीय सहयोगी की मदद की ज़रूरत नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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