29 जुलाई 2026
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ट्रंप का दावा: ईरान परमाणु समझौते को बेताब, विफलता पर बुनियादी ढाँचे पर बड़े हमले की चेतावनी

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ट्रंप का दावा: ईरान परमाणु समझौते को बेताब, विफलता पर बुनियादी ढाँचे पर बड़े हमले की चेतावनी

सारांश

ट्रंप का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार न रखने पर 'असल में सहमत' हो गया है — लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। साथ में चेतावनी: समझौता न हुआ तो पुल, बिजलीघर और 'पिकएक्स माउंटेन' निशाने पर। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी जारी।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जुलाई को दावा किया कि ईरान परमाणु समझौते के लिए 'बेहद इच्छुक' है।
ट्रंप के अनुसार ईरान ने 'असल में' परमाणु हथियार न रखने की बात मान ली है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
विफलता की स्थिति में ट्रंप ने ईरान के पुलों, बिजलीघरों और अन्य बुनियादी ढाँचे पर बड़े हमलों की चेतावनी दी।
'पिकएक्स माउंटेन' को भी निशाना बनाने की धमकी दी, जहाँ कथित तौर पर ईरान किलेबंदी कर रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी फिर से लागू है; केवल चुनिंदा जहाज़ों को ही गुज़रने की अनुमति।
2015 के JCPOA समझौते से ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को बाहर किया था; यह उसी की पृष्ठभूमि में नई कूटनीतिक कशमकश है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जुलाई को दावा किया कि ईरान वाशिंगटन के साथ परमाणु समझौता करने का 'बेहद इच्छुक' है और उसने 'मूल रूप से' स्वीकार कर लिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं रख सकता। साथ ही उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि यदि वार्ता विफल रही तो अमेरिकी सेनाएँ ईरान के पुलों, बिजलीघरों और अन्य बुनियादी ढाँचे पर बड़े पैमाने पर हमले फिर से शुरू करेंगी।

ट्रंप के बयान का संदर्भ

ट्रंप ने ये बातें दो अलग-अलग मंचों पर कहीं — रिपब्लिकन कांग्रेसमैन एंडी ओगल्स के लिए आयोजित एक वर्चुअल कैंपेन रैली और फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में। टेनेसी के मतदाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'उनके (ईरान) पास कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे और वे यह बात समझते हैं। हमने उन पर बहुत जोरदार प्रहार किया है और वे किसी भी तरह डील करना चाहते हैं।'

फॉक्स न्यूज़ साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान के उन सार्वजनिक बयानों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि परमाणु मामलों पर कोई बातचीत नहीं हो रही। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी ऐसा होता है कि हम किसी बहुत अच्छी चर्चा के बीच में होते हैं और वे बाहर आकर कहते हैं कि हम बात नहीं कर रहे — जबकि हमने सिर्फ उसी पर चर्चा की, क्योंकि उनके पास कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे।'

ट्रंप का दावा — ईरान 'मान गया है'

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने 'असल में' अमेरिका की मूल माँग — परमाणु हथियार न रखना — स्वीकार कर ली है, लेकिन उसने इसे अभी तक आधिकारिक रूप से पक्का नहीं किया है। उनके शब्दों में, 'मैं बस इतना चाहता हूँ — उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, बस इतनी सी बात है। वे असल में इस बात के लिए मान गए हैं, हमें बस उनसे इसे आधिकारिक करवाना है।' यह दावा ईरान के आधिकारिक रुख से मेल नहीं खाता, जिसने सार्वजनिक रूप से परमाणु वार्ता से इनकार किया है।

हमले की चेतावनी और होर्मुज़ नाकेबंदी

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे सैन्य कार्रवाई की बजाय समझौते को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन विफलता की स्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, 'अगर वे समझौता नहीं करते हैं, तो मैं वापस जाऊँगा और अपना काम पूरा करूँगा।' उन्होंने 'पिकएक्स माउंटेन' का भी उल्लेख किया, जहाँ कथित तौर पर ईरान निर्माण और किलेबंदी का काम कर रहा है। ट्रंप ने कहा, 'हमने उनके परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दिया था और अगर समझौता नहीं हुआ तो हमें 'पिकएक्स' को भी नष्ट करना होगा।'

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी के बारे में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना वहाँ से केवल चुनिंदा जहाज़ों को गुज़रने दे रही है। समझौते की रूपरेखा बनने पर नाकेबंदी में ढील दी गई थी, लेकिन ईरान द्वारा समझौता तोड़ने के बाद इसे फिर से लागू कर दिया गया। उनके अनुसार, 'सिर्फ वही जहाज़ गुज़र पाते हैं जिन्हें हम गुज़रने देना चाहते हैं।'

पृष्ठभूमि: 2015 का परमाणु समझौता और उसके बाद

गौरतलब है कि 2015 में ईरान और दुनिया की छह बड़ी ताकतों के बीच एक परमाणु समझौता (JCPOA) हुआ था, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत के बदले तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएँ लगाई गई थीं। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में अमेरिका को उस समझौते से बाहर कर लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और ईरान के परमाणु ठिकानों पर पहले ही हमले हो चुके हैं।

आगे क्या होगा

ट्रंप के इन बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। ईरान के आधिकारिक बयानों और ट्रंप के दावों के बीच गहरा विरोधाभास बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज़ नाकेबंदी और 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमले की धमकी वार्ता में दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों के कदम यह तय करेंगे कि यह कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। ईरान के सार्वजनिक बयान और ट्रंप के दावे एकदम उलट हैं, और इतिहास बताता है कि 2018 में JCPOA से एकतरफा निकासी के बाद से अमेरिका की विश्वसनीयता वार्ता मेज़ पर कमज़ोर हुई है। होर्मुज़ नाकेबंदी और 'पिकएक्स माउंटेन' की धमकी दबाव की रणनीति हो सकती है, लेकिन इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति पर जोखिम भी बढ़ता है — जिसका असर भारत जैसे तेल-आयातक देशों पर सीधे पड़ सकता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते पर क्या कहा?
ट्रंप ने 29 जुलाई को दावा किया कि ईरान वाशिंगटन के साथ परमाणु समझौता करने का 'बेहद इच्छुक' है और उसने 'मूल रूप से' स्वीकार कर लिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं रख सकता। हालाँकि ईरान ने सार्वजनिक रूप से परमाणु वार्ता से इनकार किया है।
ट्रंप ने ईरान पर हमले की चेतावनी क्यों दी?
ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान समझौता करने से इनकार करता है तो अमेरिकी सेनाएँ ईरान के पुलों, बिजलीघरों और 'पिकएक्स माउंटेन' सहित अन्य बुनियादी ढाँचे पर बड़े पैमाने पर हमले फिर से शुरू करेंगी। यह चेतावनी उन्होंने फॉक्स न्यूज़ साक्षात्कार और एक वर्चुअल रैली में दी।
'पिकएक्स माउंटेन' क्या है और यह क्यों चर्चा में है?
ट्रंप के अनुसार 'पिकएक्स माउंटेन' वह स्थान है जहाँ कथित तौर पर ईरान निर्माण और किलेबंदी का काम कर रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि समझौता न होने पर इसे भी नष्ट किया जाएगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी की स्थिति क्या है?
ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना होर्मुज़ जलडमरूमध्य से केवल चुनिंदा जहाज़ों को गुज़रने दे रही है। समझौते की रूपरेखा बनने पर नाकेबंदी में ढील दी गई थी, लेकिन ईरान द्वारा समझौता तोड़ने के बाद इसे फिर से लागू कर दिया गया।
2015 का ईरान परमाणु समझौता (JCPOA) क्या था और इसका क्या हुआ?
2015 में ईरान और छह बड़ी वैश्विक शक्तियों के बीच JCPOA समझौता हुआ था, जिसके तहत प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएँ लगाई गई थीं। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में अमेरिका को इस समझौते से एकतरफा बाहर कर लिया था।
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