18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रिकॉर्ड भागीदारी, भारत की अध्यक्षता पर जताया वैश्विक भरोसा: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 12 सितंबर 2026 को कहा कि नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य एवं साझेदार देशों की अभूतपूर्व भागीदारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भरोसा मज़बूत हुआ है। मंत्रालय के अनुसार यह भागीदारी ब्रिक्स के बढ़ते वैश्विक महत्व और ग्लोबल साउथ के साथ उसके गहरे जुड़ाव को भी रेखांकित करती है।
आठ महीने की तैयारी का परिणाम
विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने शिखर सम्मेलन के समानांतर आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यह आयोजन जनवरी 2026 से चली आ रही व्यापक तैयारियों की परिणति है, जब भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की थी। दलेला ने कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यमों से 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया, जिनमें मंत्रिस्तरीय वार्ताएँ, कार्य समूह सत्र, व्यापारिक बैठकें, जन-केंद्रित गतिविधियाँ और विभिन्न विषयगत पहलें शामिल रहीं।
पहले सत्र में वैश्विक शासन सुधार पर आम सहमति
शनिवार को ब्रिक्स नेताओं का पहला सत्र 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मज़बूत करना' विषय पर हुआ। दलेला ने बताया कि सभी नेताओं ने अपने-अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किए, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि वैश्विक शासन संस्थानों को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी, प्रभावी और वर्तमान भूराजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार तथा विकासशील देशों व ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने की ज़रूरत को दोहराया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार करके विकासशील देशों की आवाज़ को और सशक्त बनाने पर भी बल दिया गया। गौरतलब है कि ब्रिक्स सहयोग के मूल सिद्धांतों — आपसी सम्मान, समानता, एकजुटता, खुलापन, समावेशिता और सहमति — की फिर से पुष्टि की गई और मतभेदों के समाधान के लिए संवाद व परामर्श का रास्ता अपनाने पर सहमति जताई गई।
PM मोदी ने प्रस्तावित कीं चार नई पहलें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ की आवाज़ को सशक्त बनाने और वैश्विक शासन व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को व्यावहारिक सहयोग और विकासोन्मुख परिणामों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए, जिससे आम लोगों के जीवन में वास्तविक सकारात्मक बदलाव आ सके।
विदेश मंत्रालय के अनुसार मोदी ने ब्रिक्स सहयोग के लिए चार नई पहलें प्रस्तावित कीं:
1. ब्रिक्स ट्रोइका तंत्र — अध्यक्षता की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए।
2. वैश्विक शासन सुधार के लिए ब्रिक्स रोडमैप — बहुपक्षीय संस्थाओं में ठोस परिवर्तन का खाका।
3. सीफेयरर इमरजेंसी सपोर्ट इनिशिएटिव नेटवर्क — संकटग्रस्त नाविकों को तत्काल सहायता प्रदान करने हेतु।
4. ग्लोबल साउथ नेगोशिएशन सपोर्ट पहल — विकासशील देशों के अधिकारियों और युवा पेशेवरों की वार्ता-क्षमता को मज़बूत करने के लिए।
नई दिल्ली घोषणा-2026 सर्वसम्मति से अपनाई गई
दलेला ने नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से अपनाए जाने को भारत की अध्यक्षता की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि ब्रिक्स देश वैश्विक महत्व के जटिल मुद्दों पर भी आम सहमति बनाने में सक्षम हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहमति बनाना उत्तरोत्तर कठिन होता जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स की चार प्राथमिकताओं — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — के अंतर्गत 50 से अधिक व्यावहारिक परिणाम सामने आए हैं।
भारत इनोवेट प्रदर्शनी और आगे की राह
ब्रिक्स नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों को भारत इनोवेट प्रदर्शनी का भी दौरा कराया गया, जिसमें भारत की नवाचार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और विकास संबंधी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।
ब्रीफिंग के अंत में दलेला ने कहा कि किसी भी अध्यक्षता की सफलता केवल बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि भागीदारी की गुणवत्ता, सहमति बनाने की क्षमता और ठोस परिणामों से आंकी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नई दिल्ली घोषणा और शिखर सम्मेलन के सभी निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले हफ्तों में इन निर्णयों के कार्यान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।