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भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता: शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रालय ने साझा की सालभर की उपलब्धियाँ

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भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता: शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रालय ने साझा की सालभर की उपलब्धियाँ

सारांश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले विदेश मंत्रालय ने भारत की अध्यक्षता का लेखा-जोखा पेश किया — 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें, 4 से 11 देशों तक विस्तारित मंच, और ग्लोबल साउथ को नेतृत्व की भूमिका में लाने की स्पष्ट रणनीति। यह भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 1 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत की अध्यक्षता की सालभर की उपलब्धियाँ साझा कीं।
भारत की अध्यक्षता के चार मुख्य स्तंभ: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता ।
सदस्य देशों के 30 शहरों में 400 से अधिक ब्रिक्स बैठकें आयोजित हुईं।
ब्रिक्स 4 देशों से बढ़कर अब 11 देशों का मंच बन चुका है; भारत चौथी बार अध्यक्षता कर रहा है।
भारत ने ग्लोबल साउथ को नेतृत्व की भूमिका में लाने और हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार, 1 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के एक वर्ष की गतिविधियों और उपलब्धियों की एक विस्तृत झलक साझा की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस पूरी अध्यक्षता का केंद्र लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — ये चार स्तंभ रहे हैं, जिनके इर्द-गिर्द सदस्य देशों के साथ संवाद और साझेदारी को आकार दिया गया।

सालभर की यात्रा: संवाद और सहभागिता

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें भारत की अध्यक्षता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया गया है। इस क्लिप की शुरुआत एक सशक्त संदेश से होती है — 'भविष्य पहले से तय नहीं होता, इसका हम निर्माण करते हैं।' वीडियो में यह भी रेखांकित किया गया कि आज के अनिश्चित वैश्विक परिवेश में एकजुटता और सामूहिक संवाद ही समस्याओं के समाधान की असली शक्ति है।

गौरतलब है कि अब तक सदस्य देशों के 30 शहरों में ब्रिक्स की 400 से अधिक बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। यह आँकड़ा इस मंच की बढ़ती सक्रियता और भारत की अध्यक्षता में उसे मिली नई ऊर्जा का प्रमाण है।

चार स्तंभ: भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताएँ

मंत्रालय ने अपने कमल आकार के प्रतीक चिन्ह के माध्यम से चारों स्तंभों को परिभाषित किया। पहला स्तंभ — लचीलापन — वैश्विक संकटों से निपटने की सामूहिक क्षमता से जुड़ा है, जहाँ किसी भी विपरीत परिस्थिति में सभी सदस्य देश तत्परता से जोखिम से पार पाने की दिशा में एकजुट होते हैं।

दूसरा स्तंभ — नवाचार — स्टार्टअप फंड की व्यवस्था और नए विचारों को पनपने का अवसर देने पर केंद्रित है। तीसरा स्तंभ — सहयोग — ग्लोबल साउथ को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए उसे नेतृत्व की भूमिका में लाने की सोच को दर्शाता है। चौथा स्तंभ — स्थिरता — सतत और समावेशी विकास के साथ-साथ हरित और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता को सामने रखता है।

ब्रिक्स का विस्तार और भारत की चौथी अध्यक्षता

वीडियो में यह भी दर्शाया गया है कि दो दशक पहले महज 4 देशों के गठबंधन के रूप में शुरू हुआ ब्रिक्स अब 11 देशों का एक विस्तृत मंच बन चुका है। भारत इस समूह की चौथी बार अध्यक्षता कर रहा है — और इस बार की अध्यक्षता में जिम्मेदारी किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत के कई राज्यों ने अलग-अलग समय पर विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों की मेज़बानी की।

वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूती

भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विकासशील देशों के साझा हितों और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को प्रमुखता देने पर विशेष जोर दिया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना इस समूह की प्रासंगिकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

आने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की इस वर्षभर की अध्यक्षता के निष्कर्षों और आगे की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इन बैठकों से ठोस नीतिगत परिणाम कितने निकले। ब्रिक्स का 4 से 11 देशों तक विस्तार इस मंच की बढ़ती प्रासंगिकता दर्शाता है, पर बड़े समूह में सहमति बनाना कहीं अधिक जटिल होता है — यह चुनौती आने वाले शिखर सम्मेलन में स्पष्ट होगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के चार मुख्य स्तंभ कौन से हैं?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के चार स्तंभ हैं — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता। इन्हीं चार प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द सदस्य देशों के साथ संवाद, साझेदारी और विकास के नए अवसर तलाशे गए हैं।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में कितनी बैठकें हुईं?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सदस्य देशों के 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। यह आँकड़ा इस मंच की बढ़ती सक्रियता और भारत के नेतृत्व में हुई व्यापक सहभागिता को दर्शाता है।
ब्रिक्स में अब कितने देश हैं और भारत कितनी बार अध्यक्षता कर चुका है?
ब्रिक्स, जो पहले 4 देशों का गठबंधन था, अब बढ़कर 11 देशों का मंच बन चुका है। भारत इस समूह की चौथी बार अध्यक्षता कर रहा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रालय ने क्या साझा किया?
विदेश मंत्रालय ने 1 सितंबर को एक्स (X) पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के एक वर्ष की गतिविधियों, उपलब्धियों और चारों स्तंभों की झलक प्रस्तुत की गई। इस वीडियो में ग्लोबल साउथ के नेतृत्व और सतत विकास पर भारत के जोर को भी रेखांकित किया गया।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को क्या महत्व दिया गया?
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए उसे नेतृत्व की भूमिका में लाने पर जोर दिया। विकासशील देशों के साझा हितों — आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक सहयोग — को प्रमुखता दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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