भोटेकोशी बाढ़: नेपाल नेशनल असेंबली में विशेष प्रस्ताव पारित, 1,003 शव बरामद, 4 हजार से अधिक लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल की नेशनल असेंबली ने 1 सितंबर को भोटेकोशी बाढ़ पर एक विशेष प्रस्ताव पारित किया, जिसमें सरकार से बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों में तेज़ी लाने का आग्रह किया गया है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई इस विनाशकारी बाढ़ को सात दिन बीत चुके हैं और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार अब तक 1,003 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
विशेष प्रस्ताव में क्या है
नेशनल असेंबली के स्पीकर नारायण प्रसाद दहल ने मंगलवार की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। प्रस्ताव में रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति को दुखद बताते हुए मृतकों और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।
प्रस्ताव में नेपाल सरकार से अनुरोध किया गया कि वह 'लापता लोगों की खोज, घायलों का मुफ्त इलाज, शवों का वैज्ञानिक प्रबंधन और भौतिक संरचनाओं के पुनर्निर्माण पर विशेष ध्यान दे।' साथ ही सभी स्तरों की सरकारों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच समन्वय सुनिश्चित करने की बात कही गई।
सांसद की तीखी टिप्पणी — 'दूसरों के विकास की कीमत'
चर्चा के दौरान नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद मदन कुमारी शाह ने जलवायु परिवर्तन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, 'हमें जहर दिया गया है। हमें दूसरों के विकास की वजह से तबाही झेलनी पड़ रही है। भोटेकोशी में बाढ़ के दर्द से देश कराह रहा है।'
उनका इशारा इस तथ्य की ओर था कि जलवायु परिवर्तन के कारण नेपाल के पहाड़ और ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे अचानक बाढ़ की घटनाएँ बढ़ रही हैं — जबकि इसके लिए ज़िम्मेदार उत्सर्जन बड़े औद्योगिक देशों का है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक जलवायु वार्ताओं में 'हानि और क्षति' (Loss and Damage) के मुद्दे पर विकासशील देश लगातार दबाव बना रहे हैं।
प्रभावित क्षेत्र और बचाव अभियान
रसुवा, चितवन, धाडिंग, तनहुं, गोरखा, नुवाकोट और नवलपरासी ईस्ट सहित कई जिलों में शव मिल रहे हैं। नेपाल सेना सहित अनेक स्वयंसेवी दल बचाव और खोज कार्यों में जुटे हैं। अधिकांश बचाव उड़ानें रसुवा, तिमुरे, त्रिशूली और धुंचे इलाकों पर केंद्रित हैं।
मौसम वैज्ञानिक और पहाड़-ग्लेशियर विशेषज्ञ अभी भी अचानक आई इस बाढ़ के सटीक कारणों की जाँच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मृत्यु, घायल और लापता लोगों की एक संयुक्त आधिकारिक रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है।
सरकार की राहत नीति
नेपाल सरकार ने राहत वितरण के लिए 'सिंगल-डोर पॉलिसी' लागू की है, जिसके तहत सहायता राशि सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में भेजी जा सकती है। यह व्यवस्था राहत कार्यों में बिखराव को रोकने और समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
गौरतलब है कि नेपाल हर मानसून सीज़न में भीषण बाढ़ और भूस्खलन का सामना करता है, परंतु इस वर्ष भोटेकोशी बाढ़ की तीव्रता और मृत्यु संख्या असाधारण रूप से अधिक है। आने वाले दिनों में बचाव अभियान जारी रहने और मृतक संख्या में बदलाव की आशंका बनी हुई है।