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अगस्त में डीजल खपत 6.46% और पेट्रोल 7.88% बढ़ी, एलपीजी में 16% की गिरावट

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अगस्त में डीजल खपत 6.46% और पेट्रोल 7.88% बढ़ी, एलपीजी में 16% की गिरावट

सारांश

अगस्त में डीजल की खपत 6.46% और पेट्रोल की 7.88% बढ़ी — आर्थिक सक्रियता का संकेत। लेकिन दूसरी तरफ, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान से एलपीजी आयात बाधित हुआ और खपत 16.15% लुढ़क गई। सरकार ने पीएनजी की ओर रुख करने के लिए प्रोत्साहन शुरू किए।

मुख्य बातें

डीजल की खपत अगस्त में 6.46% बढ़कर 7.00 मिलियन टन हुई, जो पिछले वर्ष 6.58 मिलियन टन थी।
पेट्रोल की खपत 7.88% उछलकर 3.82 मिलियन टन पर पहुँची; पिछले वर्ष 3.54 मिलियन टन थी।
कमज़ोर मानसून के कारण किसानों की डीजल-चालित सिंचाई पंपों पर निर्भरता बढ़ी।
एलपीजी खपत 16.15% गिरकर 2.42 मिलियन टन रही; होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान प्रमुख कारण।
भारत सामान्यतः अपनी 50% से अधिक एलपीजी होर्मुज़ मार्ग से आयात करता है।
सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि दी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के योजना प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत की डीजल खपत सालाना आधार पर 6.46 प्रतिशत बढ़कर 7.00 मिलियन टन हो गई, जबकि पेट्रोल की खपत 7.88 प्रतिशत उछलकर 3.82 मिलियन टन पर पहुँच गई। यह वृद्धि देश में बढ़ती आर्थिक सक्रियता का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।

डीजल खपत में उछाल के कारण

डीजल भारत का सर्वाधिक बिकने वाला पेट्रोलियम उत्पाद है, जिसका उपयोग मुख्यतः परिवहन और कृषि क्षेत्रों में होता है। पिछले वर्ष अगस्त में यह खपत 6.58 मिलियन टन थी, जो इस वर्ष बढ़कर 7.00 मिलियन टन हो गई।

आंकड़ों के अनुसार, देश के राजमार्ग नेटवर्क के तीव्र विस्तार से माल-परिवहन में वृद्धि हुई है, जिसने डीजल की माँग को बल दिया। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2026 में कमज़ोर मानसून के चलते किसानों को सिंचाई के लिए डीजल-चालित पंपों पर अधिक निर्भर रहना पड़ा। देश में ट्रैक्टरों की बढ़ती संख्या ने भी कृषि क्षेत्र में ईंधन की माँग को ऊपर धकेला।

पेट्रोल माँग में तेज़ी

पेट्रोल की खपत पिछले वर्ष के 3.54 मिलियन टन से बढ़कर 3.82 मिलियन टन हो गई — 7.88 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि। विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों बाज़ारों में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री में तेज़ी ने इस उछाल को आधार दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब उपभोक्ता खर्च में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

एलपीजी खपत में भारी गिरावट

इसके विपरीत, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खपत अगस्त में सालाना आधार पर 16.15 प्रतिशत घटकर 2.42 मिलियन टन रह गई, जो पिछले वर्ष 2.89 मिलियन टन थी।

आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित हुई है — यह वह मार्ग है जिससे दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात होता है। सामान्य परिस्थितियों में भारत अपनी 50 प्रतिशत से अधिक एलपीजी इसी मार्ग से आयात करता है, परंतु अब उसे वैकल्पिक और अधिक दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

आपूर्ति संकट से निपटने के लिए सरकार ने उपभोक्ताओं को एलपीजी से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को घरेलू पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

आगे क्या

गौरतलब है कि एलपीजी आपूर्ति का यह व्यवधान तब तक जारी रह सकता है जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता। विश्लेषकों के अनुसार, पीएनजी अवसंरचना का विस्तार दीर्घकालिक समाधान हो सकता है, लेकिन निकट भविष्य में एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका एक हिस्सा कमज़ोर मानसून की मजबूरी से उपजा है — न कि शुद्ध विकास से। एलपीजी की 16% गिरावट अधिक चिंताजनक है: होर्मुज़ निर्भरता एक पुरानी संरचनात्मक कमज़ोरी है जिसे नीति-निर्माता वर्षों से जानते हैं, फिर भी आपूर्ति विविधीकरण अधूरा रहा। पीएनजी की ओर धकेलना दीर्घकालिक रूप से सही दिशा है, लेकिन यह तब तक अपर्याप्त राहत है जब तक बुनियादी ढाँचा पर्याप्त पैमाने पर तैयार नहीं हो जाता।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में भारत की डीजल खपत कितनी रही?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में डीजल की खपत 6.46% बढ़कर 7.00 मिलियन टन हो गई, जो पिछले वर्ष 6.58 मिलियन टन थी। परिवहन क्षेत्र की बढ़ती गतिविधि और कृषि में सिंचाई पंपों के बढ़े उपयोग को इसका प्रमुख कारण बताया गया है।
अगस्त में एलपीजी की खपत क्यों घटी?
अगस्त 2026 में एलपीजी खपत 16.15% गिरकर 2.42 मिलियन टन रह गई। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा आई, जिससे उस मार्ग से एलपीजी आयात प्रभावित हुआ — भारत सामान्यतः अपनी 50% से अधिक एलपीजी इसी रास्ते से मँगाता है।
सरकार एलपीजी संकट से निपटने के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने उपभोक्ताओं को एलपीजी से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया है और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को घरेलू पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने हेतु विशेष प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
अगस्त में पेट्रोल की खपत में बढ़ोतरी का क्या कारण है?
अगस्त 2026 में पेट्रोल की खपत 7.88% बढ़कर 3.82 मिलियन टन हो गई। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य भारत की एलपीजी आपूर्ति को कैसे प्रभावित करता है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात होता है। भारत अपनी 50% से अधिक एलपीजी इसी मार्ग से आयात करता है, इसलिए वहाँ किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारत की घरेलू गैस आपूर्ति पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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