पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं: भारत की 22 रिफाइनरियाँ 258.1 MT क्षमता के साथ पूरी तरह सक्षम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 27 मई 2026 को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है और घरेलू माँग से अधिक आपूर्ति उपलब्ध है। सरकार के अनुसार, कुछ स्थानों पर दिख रही स्थानीय कमी का कारण आपूर्ति संकट नहीं, बल्कि ईंधन की जमाखोरी और खुदरा चैनलों का दुरुपयोग है। भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता और उत्पादन
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, देश में इस समय 22 रिफाइनरियाँ सक्रिय हैं, जिनकी कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की घरेलू खपत 243.2 मिलियन टन रही, जबकि इसी अवधि में 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया गया। यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक निर्यातकों की अग्रिम पंक्ति में भी है।
सरकार की सक्रियता और समन्वय
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (पीएसयू ओएमसी), राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध बनी रहे। पेट्रोलियम सचिव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ-साथ FICCI और CII के प्रतिनिधियों के साथ भी स्थिति की समीक्षा की।
उपभोक्ताओं को राहत, कंपनियों का नुकसान
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, पीएसयू तेल कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ खुदरा उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पीएसयू ओएमसी फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग ₹550 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। यह राहत विशेष रूप से आम परिवारों, किसानों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए है।
जमाखोरी और चैनल-दुरुपयोग की समस्या
सरकार ने चिंता जताई है कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता अपने निर्धारित औद्योगिक चैनल के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं, ताकि सब्सिडीयुक्त कम कीमत का लाभ उठा सकें। इससे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए बने खुदरा नेटवर्क पर अनुचित दबाव पड़ रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, निजी तेल कंपनियों की हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) बिक्री में इस महीने करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आई है, क्योंकि उनके दाम अधिक हैं — यह माँग पूरी तरह पीएसयू रिटेल आउटलेट्स की ओर स्थानांतरित हो रही है। इसी तरह पीएसयू के बल्क ग्राहकों की बिक्री में भी करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
सख्त कार्रवाई के निर्देश
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे विशेष टीमें गठित करें और जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण तथा खुदरा आपूर्ति के दुरुपयोग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें। उद्योग संगठनों से भी अपने सदस्यों को नियमों और उल्लंघन के परिणामों के बारे में जागरूक करने को कहा गया है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता का माहौल है और घरेलू स्तर पर माँग-आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखना नीतिगत प्राथमिकता बन गई है।