13 जुलाई 2026
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पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं: भारत की 22 रिफाइनरियाँ 258.1 MT क्षमता के साथ पूरी तरह सक्षम

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पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं: भारत की 22 रिफाइनरियाँ 258.1 MT क्षमता के साथ पूरी तरह सक्षम

सारांश

केंद्र सरकार ने साफ किया कि पेट्रोल-डीजल की कमी असली नहीं, बल्कि जमाखोरी और चैनल-दुरुपयोग की देन है। भारत की 22 रिफाइनरियाँ 258.1 MT क्षमता के साथ घरेलू माँग से कहीं आगे हैं। पीएसयू कंपनियाँ रोज़ाना ₹550 करोड़ का नुकसान उठाकर आम उपभोक्ताओं को राहत दे रही हैं।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 27 मई 2026 को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है।
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है; 22 रिफाइनरियाँ कुल 258.1 मिलियन टन वार्षिक क्षमता के साथ सक्रिय।
वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू खपत 243.2 मिलियन टन ; 61.5 मिलियन टन का निर्यात भी किया गया।
पीएसयू ओएमसी प्रतिदिन लगभग ₹550 करोड़ का नुकसान उठाकर खुदरा उपभोक्ताओं को राहत दे रही हैं।
निजी कंपनियों की एचएसडी बिक्री में 38% और पीएसयू बल्क बिक्री में 29% की गिरावट; माँग खुदरा पंपों की ओर स्थानांतरित।
राज्यों को जमाखोरी व कालाबाजारी के विरुद्ध विशेष टीमें गठित करने के निर्देश।

केंद्र सरकार ने 27 मई 2026 को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है और घरेलू माँग से अधिक आपूर्ति उपलब्ध है। सरकार के अनुसार, कुछ स्थानों पर दिख रही स्थानीय कमी का कारण आपूर्ति संकट नहीं, बल्कि ईंधन की जमाखोरी और खुदरा चैनलों का दुरुपयोग है। भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता और उत्पादन

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, देश में इस समय 22 रिफाइनरियाँ सक्रिय हैं, जिनकी कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की घरेलू खपत 243.2 मिलियन टन रही, जबकि इसी अवधि में 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया गया। यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक निर्यातकों की अग्रिम पंक्ति में भी है।

सरकार की सक्रियता और समन्वय

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (पीएसयू ओएमसी), राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध बनी रहे। पेट्रोलियम सचिव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ-साथ FICCI और CII के प्रतिनिधियों के साथ भी स्थिति की समीक्षा की।

उपभोक्ताओं को राहत, कंपनियों का नुकसान

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, पीएसयू तेल कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ खुदरा उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पीएसयू ओएमसी फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग ₹550 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। यह राहत विशेष रूप से आम परिवारों, किसानों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए है।

जमाखोरी और चैनल-दुरुपयोग की समस्या

सरकार ने चिंता जताई है कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता अपने निर्धारित औद्योगिक चैनल के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं, ताकि सब्सिडीयुक्त कम कीमत का लाभ उठा सकें। इससे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए बने खुदरा नेटवर्क पर अनुचित दबाव पड़ रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, निजी तेल कंपनियों की हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) बिक्री में इस महीने करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आई है, क्योंकि उनके दाम अधिक हैं — यह माँग पूरी तरह पीएसयू रिटेल आउटलेट्स की ओर स्थानांतरित हो रही है। इसी तरह पीएसयू के बल्क ग्राहकों की बिक्री में भी करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

सख्त कार्रवाई के निर्देश

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे विशेष टीमें गठित करें और जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण तथा खुदरा आपूर्ति के दुरुपयोग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें। उद्योग संगठनों से भी अपने सदस्यों को नियमों और उल्लंघन के परिणामों के बारे में जागरूक करने को कहा गया है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता का माहौल है और घरेलू स्तर पर माँग-आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखना नीतिगत प्राथमिकता बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल वितरण-तंत्र की खामियों का है — जिसे स्वीकार भी किया गया है। पीएसयू कंपनियों का रोज़ाना ₹550 करोड़ का नुकसान दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है, और यह मूल्य-नीति की समीक्षा की माँग करता है। औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा चैनल के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र की ज़रूरत है, जो अभी तक कागज़ों पर ही दिखती है। जब तक कीमत-अंतर बना रहेगा, तब तक चैनल-विचलन की समस्या बनी रहेगी — केवल टीमें बनाने से स्थायी समाधान नहीं मिलेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की सच में कमी है?
केंद्र सरकार के अनुसार नहीं — देश में पर्याप्त से अधिक आपूर्ति उपलब्ध है। कुछ स्थानों पर दिख रही कमी जमाखोरी और खुदरा चैनलों के दुरुपयोग के कारण है, न कि वास्तविक आपूर्ति संकट के कारण।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता कितनी है?
भारत में 22 रिफाइनरियाँ सक्रिय हैं, जिनकी कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू खपत 243.2 मिलियन टन रही और 61.5 मिलियन टन का निर्यात भी किया गया।
पीएसयू तेल कंपनियाँ कितना नुकसान उठा रही हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पीएसयू ओएमसी पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग ₹550 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। यह नुकसान आम उपभोक्ताओं, किसानों और दोपहिया वाहन चालकों को राहत देने के उद्देश्य से वहन किया जा रहा है।
खुदरा पेट्रोल पंपों पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?
निजी तेल कंपनियों के दाम अधिक होने के कारण औद्योगिक उपभोक्ता अपने निर्धारित चैनल छोड़कर सस्ते पीएसयू खुदरा पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं। इससे निजी कंपनियों की एचएसडी बिक्री में 38% और पीएसयू बल्क बिक्री में 29% की गिरावट आई है।
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विशेष टीमें गठित करने और जमाखोरी, कालाबाजारी व अनधिकृत भंडारण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उद्योग संगठनों से भी सदस्यों को नियमों और उल्लंघन के परिणामों के बारे में जागरूक करने को कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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