3 अगस्त 2026
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वैश्विक तनाव के बीच भारत में ईंधन सप्लाई सामान्य, अप्रैल 2026 में 1.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक गैस बिकी

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वैश्विक तनाव के बीच भारत में ईंधन सप्लाई सामान्य, अप्रैल 2026 में 1.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक गैस बिकी

सारांश

पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि भारत में ईंधन की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अप्रैल 2026 में 1.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक गैस बिक चुकी है, 1,800 छापे पड़े हैं और 71 एजेंसियाँ निलंबित हैं — सरकार की तैयारी व्यापक है, लेकिन नागरिकों की घबराहट रोकना अभी भी बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को पुष्टि की कि पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारत में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य है।
अप्रैल 2026 में अब तक 1.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक कमर्शियल गैस की बिक्री हो चुकी है।
प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो के छोटे सिलेंडर की आपूर्ति दोगुनी की गई; ऑनलाइन बुकिंग 99% और डीएसी डिलीवरी 93% तक पहुँची।
मार्च 2026 से 5.52 लाख नए पीएनजी कनेक्शन सक्रिय; 42,600 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया।
देशभर में 1,800 से अधिक छापे; 310 डिस्ट्रीब्यूटर्स पर जुर्माना और 71 एजेंसियाँ निलंबित।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराकर अनावश्यक खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा रखें।

मौजूदा सप्लाई की स्थिति

सरकार के अनुसार, घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी (ट्रांसपोर्ट) की 100 प्रतिशत आपूर्ति निर्बाध जारी है। अप्रैल 2026 में अब तक 1.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक कमर्शियल गैस की बिक्री हो चुकी है। देश में किसी भी स्थान पर गैस की कमी (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं आई है।

कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति में अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, फार्मा, स्टील, ऑटोमोबाइल और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (एफटीएल) की आपूर्ति दोगुनी कर दी गई है।

सप्लाई संतुलन के लिए उठाए गए कदम

सरकार ने माँग और आपूर्ति को संतुलित करने के लिए रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाया है। गैस बुकिंग के अंतराल को शहरी क्षेत्रों में 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन कर दिया गया है। एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन भी उपलब्ध कराए गए हैं।

ऑनलाइन गैस बुकिंग बढ़कर 99 प्रतिशत तक पहुँच गई है और डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) के माध्यम से लगभग 93 प्रतिशत डिलीवरी की जा रही है, जिससे गड़बड़ी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाया जा सके।

पीएनजी कनेक्शन में तेज़ी

सरकार ने प्राकृतिक गैस (पीएनजी) को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। मार्च 2026 से अब तक करीब 5.52 लाख नए पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं और 2.63 लाख अतिरिक्त कनेक्शन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। इसके अलावा 6.21 लाख से अधिक नए उपभोक्ता पंजीकृत हो चुके हैं।

गौरतलब है कि 42,600 से अधिक लोगों ने पीएनजी अपनाने के बाद अपना एलपीजी कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर कर दिया है, जो वैकल्पिक ईंधन की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई

पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पर निगरानी रखें। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 के तहत जमाखोरी व कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

देशभर में 1,800 से अधिक छापे मारे गए हैं और कई मामलों में कार्रवाई की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने 310 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर जुर्माना लगाया है तथा 71 एजेंसियाँ निलंबित की गई हैं। देशभर में कंट्रोल रूम और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटियाँ गठित की गई हैं।

आम नागरिकों के लिए सलाह

सरकार ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की अनावश्यक खरीदारी से बचें और अफवाहों पर ध्यान न दें। एलपीजी उपभोक्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर भीड़ न लगाने की सलाह दी गई है। सरकार ने पीएनजी, इलेक्ट्रिक और इंडक्शन कुकटॉप जैसे वैकल्पिक ईंधन अपनाने और ऊर्जा की बचत करने के लिए भी प्रेरित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा आँकड़ों की पारदर्शिता में है। 1,800 छापे और 71 एजेंसियों का निलंबन बताता है कि जमाखोरी की समस्या केवल अफवाह नहीं थी — यह वास्तविक थी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए मध्य-पूर्व पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर है और वैश्विक तनाव किसी भी क्षण गहरा सकता है। पीएनजी की ओर 42,600 उपभोक्ताओं का स्वैच्छिक बदलाव एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जब तक वैकल्पिक ईंधन अवसंरचना देशव्यापी और सुलभ नहीं होती, तब तक संकट की स्थिति में घरेलू उपभोक्ता ही सबसे अधिक असुरक्षित रहेंगे।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में एलपीजी और पेट्रोल की सप्लाई अभी सामान्य है या नहीं?
हाँ, पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार 27 अप्रैल 2026 तक पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति 100 प्रतिशत सामान्य है। देश में कहीं भी गैस की कमी (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं आई है।
अप्रैल 2026 में भारत में कितनी गैस की बिक्री हुई?
सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 में अब तक 1.65 लाख मीट्रिक टन से अधिक कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हो चुकी है। इसके साथ ही 5 किलो के छोटे सिलेंडर की बिक्री में भी तेज़ी दर्ज की गई है।
क्या जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई हो रही है?
हाँ, देशभर में 1,800 से अधिक छापे मारे गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 310 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर जुर्माना लगाया है और 71 एजेंसियाँ निलंबित की गई हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 के तहत कार्रवाई जारी है।
भारत में पीएनजी कनेक्शन की स्थिति क्या है?
मार्च 2026 से अब तक 5.52 लाख नए पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए गए हैं और 2.63 लाख अतिरिक्त कनेक्शन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। 6.21 लाख से अधिक नए उपभोक्ता पंजीकृत हो चुके हैं और 42,600 से अधिक लोगों ने पीएनजी अपनाने के बाद एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है।
नागरिकों को एलपीजी बुकिंग के लिए क्या करना चाहिए?
सरकार ने नागरिकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से गैस बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर अनावश्यक भीड़ न लगाने की सलाह दी है। साथ ही अफवाहों पर ध्यान न देते हुए केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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