भारत में ईंधन मूल्य वृद्धि 4.4% — प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम, अमेरिका में 45% तक उछाल

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भारत में ईंधन मूल्य वृद्धि 4.4% — प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम, अमेरिका में 45% तक उछाल

सारांश

जहाँ अमेरिका में पेट्रोल 45% और पाकिस्तान में 55% महंगा हुआ, वहीं भारत ने ₹3.91/लीटर की वृद्धि से काम चलाया — 76 दिनों तक सरकारी तेल कंपनियाँ रोज़ ₹1,000 करोड़ का घाटा सहती रहीं। यह संयम उपभोक्ताओं के लिए राहत है, लेकिन कंपनियों पर वित्तीय बोझ अभी भी भारी है।

मुख्य बातें

15 मई 2026 से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ₹3.91 प्रति लीटर (4.4%) बढ़ीं — प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम वृद्धि।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने 23 फरवरी से 15 मई 2026 तक 76 दिन कीमतें स्थिर रखकर प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ का नुकसान उठाया।
मूल्य वृद्धि के बाद भी दैनिक नुकसान ₹750 करोड़ बना हुआ है; कच्चे तेल की लागत की भरपाई केवल 25% हुई।
अमेरिका में पेट्रोल 45% , पाकिस्तान में 55% , मलेशिया में 56% और सिंगापुर में डीजल 65% महंगा हुआ।
GlobalPetrolPrices.com के आंकड़ों के अनुसार, बाकी दुनिया में ईंधन कीमतों में 10 से 90 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।

भारत में 15 मई 2026 को लागू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3.91 प्रति लीटर यानी 4.4 प्रतिशत की वृद्धि, तेल उत्पादक देशों को छोड़कर किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था में दर्ज की गई सबसे कम बढ़ोतरी है। GlobalPetrolPrices.com द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, जहाँ दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की खुदरा कीमतें 10 से 90 प्रतिशत तक बढ़ी हैं, वहीं भारत ने इस दबाव को काफी हद तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर वहन करते हुए उपभोक्ताओं को राहत दी।

76 दिन की कम वसूली के बाद उठाया गया कदम

इंडियन ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 23 फरवरी 2026 से 15 मई 2026 तक — यानी 76 दिनों तक — सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग अपरिवर्तित रखीं और रिफाइनरी गेट पर कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत स्वयं वहन की। इस दौरान इन कंपनियों को प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ की कम वसूली हो रही थी।

अधिकारी के अनुसार, ₹3.91 प्रति लीटर की मौजूदा वृद्धि के बाद भी यह दैनिक नुकसान घटकर ₹750 करोड़ रह गया है — अर्थात खुदरा मूल्य वृद्धि से नुकसान में केवल 25 प्रतिशत की कमी आई है और कच्चे तेल की लागत की भरपाई आंशिक ही हुई है।

वैश्विक तुलना: भारत बनाम बाकी दुनिया

आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 45 प्रतिशत और डीजल की कीमतें 48 प्रतिशत बढ़ी हैं। यूके में पेट्रोल 19 प्रतिशत और डीजल 34 प्रतिशत महंगा हुआ है। जर्मनी में पेट्रोल में 14 प्रतिशत और डीजल में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फ्रांस में क्रमशः 21 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में स्थिति और भी विकट रही। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत तीन महीने पहले की तुलना में 55 प्रतिशत, मलेशिया में 56 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात में 52 प्रतिशत अधिक हो गई है। म्यांमार में भी पेट्रोल की कीमत युद्ध-पूर्व स्तर से आधे से अधिक बढ़ गई है। सिंगापुर में डीजल की कीमत 65 प्रतिशत उछली है, जो वैश्विक व्यापार और माल ढुलाई से डीजल के प्रत्यक्ष संबंध को दर्शाता है।

जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर की स्थिति

जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी 20 प्रतिशत से कम रही है, हालांकि डीजल की कीमतों में इन देशों में भी तेज उछाल देखा गया। यह प्रवृत्ति वैश्विक माल ढुलाई श्रृंखला पर डीजल की कीमतों के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करती है।

आगे क्या

इंडियन ऑयल के अधिकारी ने संकेत दिया कि ₹750 करोड़ प्रतिदिन का नुकसान अभी भी जारी है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं और घरेलू मुद्रास्फीति पर नज़र रखना सरकार की प्राथमिकता है। आने वाले महीनों में यदि कच्चे तेल की कीमतें नहीं घटतीं, तो कंपनियों पर एक और मूल्य समीक्षा का दबाव बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ रोज़ का घाटा सहकर कीमतें स्थिर रखना राजनीतिक रूप से समझ में आता है, लेकिन यह नीति सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की बैलेंसशीट को चुपचाप कमज़ोर करती है — जिसका बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ता है। ₹750 करोड़ प्रतिदिन का चालू नुकसान बताता है कि राहत अधूरी है और अगली मूल्य समीक्षा की ज़रूरत बनी हुई है। वैश्विक तुलना प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह अंतर कब तक टिकाऊ है — और क्या इसे पारदर्शी सब्सिडी नीति के रूप में स्वीकार किया जाएगा या केवल चुनावी गणित के रूप में।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कितनी बढ़ी हैं?
भारत में 15 मई 2026 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹3.91 प्रति लीटर यानी 4.4 प्रतिशत बढ़ाई गई हैं। GlobalPetrolPrices.com के आंकड़ों के अनुसार यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम वृद्धि है।
भारत की ईंधन वृद्धि अन्य देशों की तुलना में कम क्यों है?
इंडियन ऑयल के अधिकारी के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने 76 दिनों तक कच्चे तेल की बढ़ी लागत स्वयं वहन की और प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ की कम वसूली दर्ज की। इससे उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के पूरे असर से बचाया गया।
दूसरे देशों में ईंधन कितना महंगा हुआ है?
आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में पेट्रोल 45% और डीजल 48% महंगा हुआ है। पाकिस्तान में पेट्रोल 55%, मलेशिया में 56% और संयुक्त अरब अमीरात में 52% बढ़ा है। सिंगापुर में डीजल की कीमत 65% उछली है।
क्या भविष्य में भारत में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं?
इंडियन ऑयल के अधिकारी के अनुसार मौजूदा वृद्धि के बाद भी तेल कंपनियों को प्रतिदिन ₹750 करोड़ का नुकसान हो रहा है और कच्चे तेल की लागत की भरपाई केवल 25% हुई है। यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं, तो आगे और मूल्य समीक्षा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
GlobalPetrolPrices.com क्या है और इसके आंकड़े कितने विश्वसनीय हैं?
GlobalPetrolPrices.com एक अंतरराष्ट्रीय डेटा प्लेटफॉर्म है जो विश्वभर के देशों में ईंधन की खुदरा कीमतों को संकलित और तुलनात्मक रूप से प्रस्तुत करता है। इस रिपोर्ट में भारत की ईंधन वृद्धि की तुलना अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, पाकिस्तान सहित अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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