पेट्रोल-डीजल ₹3 बढ़े, फिर भी दुनिया में सबसे कम वृद्धि भारत में — भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार

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पेट्रोल-डीजल ₹3 बढ़े, फिर भी दुनिया में सबसे कम वृद्धि भारत में — भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार

सारांश

पश्चिम एशिया युद्ध और होर्मुज संकट के बाद जब दुनिया भर में ईंधन 10% से 112% तक महंगा हुआ, तब भारत ने 76 दिन कीमतें थामे रखीं और फिर केवल 3.2% की बढ़ोतरी की। BJP ने इसे नीतिगत सफलता बताया; कांग्रेस पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹3 प्रति लीटर बढ़ाई गईं — लगभग चार वर्षों में पहली बार।
BJP नेता अमित मालवीय के दावे के अनुसार, भारत में वृद्धि केवल 3.2% (पेट्रोल) और 3.4% (डीजल) रही, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है।
इसी अवधि में अमेरिका में पेट्रोल 44.5% , पाकिस्तान में 54.9% और म्यांमार में 89.7% महंगा हुआ।
पश्चिम एशिया संकट के बाद सार्वजनिक तेल कंपनियों ने 76 दिन तक कीमतें स्थिर रखीं; रिपोर्टों के अनुसार प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी हुई।
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर 'हर मुद्दे का राजनीतिकरण' करने का आरोप लगाया।

15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस फैसले का जोरदार बचाव किया है। BJP नेताओं का दावा है कि 23 फरवरी से 15 मई के बीच वैश्विक तेल संकट के दौरान भारत में ईंधन मूल्य वृद्धि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम रही। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।

वैश्विक तेल संकट और भारत की स्थिति

BJP के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद ब्रेंट क्रूड अप्रैल और मई के अधिकांश समय 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इस वैश्विक उथल-पुथल का असर लगभग हर देश के पेट्रोल पंपों पर दिखा, लेकिन मालवीय के अनुसार भारत एक 'उल्लेखनीय अपवाद' बनकर उभरा।

मालवीय के दावों के अनुसार, इसी अवधि में अमेरिका में पेट्रोल 44.5% और डीजल 48.1% महंगा हुआ। पाकिस्तान में पेट्रोल 54.9% और डीजल 44.9%, मलेशिया में 56%, ब्रिटेन में पेट्रोल 19.2% और डीजल 34.2%, जर्मनी में पेट्रोल 13.7% और डीजल 19.8%, तथा जापान में पेट्रोल 9.7% और डीजल 11.2% बढ़े। सबसे अधिक वृद्धि म्यांमार में दर्ज की गई, जहाँ पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% महंगा हुआ।

भारत में कितनी बढ़ी कीमतें

मालवीय के अनुसार, इन सभी देशों की तुलना में भारत में पेट्रोल की कीमत केवल 3.2% और डीजल की कीमत 3.4% बढ़ी — जो लगभग ₹95 प्रति लीटर के आधार मूल्य पर 3.5% की वृद्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि 15 मई को घोषित यह बढ़ोतरी करीब चार वर्षों में पहली बार हुई है।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद 76 दिनों तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों — जिनकी खुदरा बाज़ार में लगभग 90% हिस्सेदारी है — ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ तक की अंडर-रिकवरी हो रही थी।

भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी एक्स पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि 'कांग्रेस पार्टी को हर चीज का राजनीतिकरण करने पर शर्म आनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर वैश्विक संकट में राजनीतिक अवसर तलाशती है। भंडारी ने इसे 'आर्थिक राष्ट्रभक्ति का समय' करार दिया और कहा कि 140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं।

ईंधन कीमतों का व्यापक असर

मालवीय ने तर्क दिया कि ईंधन मूल्य नियंत्रण का सीधा अर्थ महंगाई पर नियंत्रण है, क्योंकि ईंधन की कीमतें परिवहन, खाद्य वस्तुओं, लॉजिस्टिक्स, निर्माण लागत और आम परिवारों के बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। गौरतलब है कि केवल सऊदी अरब में इस अवधि में कोई वृद्धि नहीं हुई, क्योंकि वहाँ प्रत्यक्ष सरकारी सब्सिडी व्यवस्था लागू है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं और पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह कम नहीं हुआ है। विपक्ष की आलोचना और सत्ता पक्ष के बचाव के बीच यह बहस आने वाले हफ्तों में और तेज होने की संभावना है, खासकर यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण संदर्भ छूट जाता है — भारत की सार्वजनिक तेल कंपनियाँ पहले से ही अंडर-रिकवरी की स्थिति में थीं, और ₹1,000 करोड़ प्रतिदिन का यह बोझ अंततः सरकारी बैलेंस शीट पर पड़ता है, यानी करदाताओं पर। 'कम वृद्धि' की कहानी अधूरी है यदि यह न बताया जाए कि यह लागत टाली गई है या माफ। इसके अलावा, सऊदी अरब जैसे तेल-उत्पादक देश से तुलना भ्रामक है। असली सवाल यह है कि अंडर-रिकवरी की भरपाई कैसे होगी — और क्या आगे और बढ़ोतरी की गुंजाइश है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

15 मई 2026 को भारत में पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ?
15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतें ₹3 प्रति लीटर बढ़ाई गईं। BJP नेता अमित मालवीय के अनुसार यह लगभग ₹95 प्रति लीटर के आधार मूल्य पर करीब 3.5% की वृद्धि है और चार वर्षों में पहली बार हुई है।
दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में तेल कितना कम बढ़ा?
BJP नेता अमित मालवीय के दावों के अनुसार, 23 फरवरी से 15 मई के बीच भारत में पेट्रोल 3.2% और डीजल 3.4% बढ़ा, जबकि अमेरिका में 44.5%, पाकिस्तान में 54.9% और म्यांमार में 89.7% तक वृद्धि हुई। ये आँकड़े BJP नेता के एक्स पोस्ट पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
भारत में 76 दिन तक कीमतें क्यों नहीं बढ़ाई गईं?
रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला। इस दौरान प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी होती रही।
कांग्रेस ने तेल मूल्य वृद्धि पर क्या रुख अपनाया?
स्रोत सामग्री में कांग्रेस के विशिष्ट आरोपों का विवरण नहीं दिया गया है। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर 'हर चीज का राजनीतिकरण' करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी हर वैश्विक संकट में राजनीतिक अवसर तलाशती है।
ईंधन कीमतों का आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
BJP नेता अमित मालवीय के अनुसार, ईंधन की कीमतें परिवहन, खाद्य वस्तुओं, लॉजिस्टिक्स, निर्माण लागत और आम परिवारों के बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। उनका तर्क है कि ईंधन मूल्य नियंत्रण का अर्थ महंगाई पर नियंत्रण है।
राष्ट्र प्रेस
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