ब्रिक्स समिट 2026: जयशंकर आज 10 देशों के मंत्रियों से करेंगे द्विपक्षीय वार्ता, रात्रिभोज भी होस्ट करेंगे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ब्रिक्स समिट 2026: जयशंकर आज 10 देशों के मंत्रियों से करेंगे द्विपक्षीय वार्ता, रात्रिभोज भी होस्ट करेंगे

सारांश

ब्रिक्स समिट 2026 के दूसरे दिन विदेश मंत्री जयशंकर ने एक ही दोपहर में 10 देशों के राजनयिकों से मुलाकात की और रात्रिभोज होस्ट किया — भारत की बहुपक्षीय कूटनीति की तेज़ रफ्तार का स्पष्ट संकेत।

मुख्य बातें

15 मई 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का तीसरा सत्र आयोजित हुआ।
जयशंकर ने मलेशिया, UAE, बेलारूस, सऊदी अरब, कजाकिस्तान, नाइजीरिया, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, क्यूबा और युगांडा के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं।
जयशंकर ने ब्रिक्स के 20 वर्षों के सफर और भविष्य की दिशा पर विदेश मंत्रियों के साथ चर्चा की।
भारत की चार प्राथमिकताएं — मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — ब्रिक्स एजेंडे में प्रस्तुत की गईं।
जयशंकर ने सभी भाग लेने वाले नेताओं के लिए रात्रिभोज भी आयोजित किया।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के तीसरे सत्र में मलेशिया, क्यूबा, युगांडा सहित 10 देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ राजनयिकों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। सम्मेलन के दूसरे दिन जयशंकर ने सभी भाग लेने वाले नेताओं के लिए रात्रिभोज भी आयोजित किया।

द्विपक्षीय बैठकों का क्रम

दोपहर 2.30 बजे से शुरू हुई बैठकों की श्रृंखला में जयशंकर ने मलेशिया के विदेश मंत्री से 25 मिनट की विस्तृत वार्ता की। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात के राज्य मंत्री, बेलारूस के उपविदेश मंत्री, सऊदी अरब के उपमंत्री, कजाकिस्तान के उपविदेश मंत्री, नाइजीरिया के स्थायी सचिव, उज्बेकिस्तान के उपविदेश मंत्री और वियतनाम के उपविदेश मंत्री के साथ क्रमशः संक्षिप्त बैठकें हुईं।

दोपहर 3.45 से 4.10 बजे के बीच क्यूबा के विदेश मंत्री और 4.15 से 4.40 बजे के बीच युगांडा के विदेश मंत्री के साथ विस्तृत द्विपक्षीय चर्चा हुई।

उद्घाटन सत्र में जयशंकर का संबोधन

इससे पहले जयशंकर ने ब्रिक्स समिट के उद्घाटन समारोह में सभी नेताओं को संबोधित किया और ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक में संगठन के 20 वर्षों के सफर, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श किया।

जयशंकर ने कहा, 'पिछले 20 वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए आज हम अपने सहयोग की प्रकृति और उसके भविष्य की दिशा पर चर्चा कर रहे हैं। साझेदार देशों की मौजूदगी ने हमारे सामूहिक प्रयासों को और मजबूत किया है तथा आपसी जुड़ाव को गहरा किया है। अपनी सामूहिक ताकत का इस्तेमाल करके हम ब्रिक्स को और अधिक मजबूत, प्रभावी और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बना सकते हैं।'

ब्रिक्स के विस्तार पर भारत का नज़रिया

जयशंकर ने रेखांकित किया कि ब्रिक्स का दायरा और महत्व दोनों समय के साथ बढ़े हैं। उन्होंने कहा, 'यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की उस इच्छा को दर्शाता है, जिसमें वे अधिक संतुलित और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार ब्रिक्स ने अपने एजेंडे और सदस्यता दोनों का विस्तार किया है, लेकिन इसका ध्यान हमेशा लोगों के विकास और व्यावहारिक सहयोग पर केंद्रित रहा है।'

भारत की चार प्राथमिकताएं

जयशंकर ने ब्रिक्स के लिए भारत की चार प्राथमिकताएंमजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — को विस्तार से रखा।

मजबूती के तहत सप्लाई चेन को सुदृढ़ करना, बाजारों में विविधता लाना, शुरुआती चेतावनी प्रणाली में सुधार और जलवायु-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना शामिल है। नवाचार के अंतर्गत ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी और यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म जैसी पहल शामिल हैं।

सहयोग के क्षेत्र में ब्रिक्स एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल, ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम और कृषि व स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी जमीनी स्तर पर परिणाम देने के लिए प्रस्तावित हैं। स्थिरता के मोर्चे पर जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को केंद्र में रखा गया है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय मंचों की प्रासंगिकता पर बहस तेज हो रही है। ब्रिक्स के विस्तारित ढांचे में भारत की सक्रिय भूमिका और जयशंकर की गहन कूटनीतिक व्यस्तता यह संकेत देती है कि नई दिल्ली इस मंच को अपनी विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ब्रिक्स के विस्तार की चुनौती को भी उजागर करती है। जब संगठन में नए सदस्य और साझेदार देश जुड़ते हैं, तो हर बैठक महज पाँच मिनट की होती है — जो गहरे जुड़ाव के बजाय औपचारिक उपस्थिति का संकेत देती है। गौरतलब है कि ब्रिक्स का विस्तार जितना इसकी ताकत है, उतना ही इसकी एकजुटता की परीक्षा भी — विविध भू-राजनीतिक हितों वाले देशों को एक साझा एजेंडे पर लाना आसान नहीं। भारत की चार प्राथमिकताओं का ढांचा महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये पहल कागज़ से ज़मीन तक कितनी उतरती हैं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का तीसरा सत्र कब और कहाँ हुआ?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का तीसरा सत्र 15 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। यह सम्मेलन का दूसरा दिन था।
जयशंकर ने ब्रिक्स समिट में किन-किन देशों के मंत्रियों से मुलाकात की?
विदेश मंत्री जयशंकर ने मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, सऊदी अरब, कजाकिस्तान, नाइजीरिया, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, क्यूबा और युगांडा के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं। कुल 10 देशों के साथ वार्ता हुई।
ब्रिक्स में भारत की चार प्राथमिकताएं क्या हैं?
भारत ने ब्रिक्स के लिए मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — ये चार प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें सप्लाई चेन सुदृढ़ीकरण, स्टार्टअप प्लेटफॉर्म, एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल और जलवायु कार्रवाई जैसी पहल शामिल हैं।
जयशंकर ने ब्रिक्स के 20 वर्षों पर क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स का दायरा और महत्व दोनों समय के साथ बढ़े हैं और यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की इच्छा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संगठन का ध्यान हमेशा लोगों के विकास और व्यावहारिक सहयोग पर केंद्रित रहा है।
ब्रिक्स समिट 2026 में जयशंकर की भूमिका क्या रही?
जयशंकर ने उद्घाटन समारोह में सभी नेताओं को संबोधित किया, ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया, 10 देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और सभी नेताओं के लिए रात्रिभोज होस्ट किया। वे इस समिट में भारत के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 16 घंटे पहले
  3. 18 घंटे पहले
  4. 21 घंटे पहले
  5. कल
  6. कल
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले