ब्रिक्स 2026: जयशंकर बोले — वैश्विक अस्थिरता में उभरते देशों को ब्रिक्स से 'रचनात्मक व स्थिर' भूमिका की उम्मीद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ब्रिक्स 2026: जयशंकर बोले — वैश्विक अस्थिरता में उभरते देशों को ब्रिक्स से 'रचनात्मक व स्थिर' भूमिका की उम्मीद

सारांश

वैश्विक संघर्षों और आर्थिक उथल-पुथल के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रिक्स को विकासशील दुनिया की उम्मीदों का केंद्र बताया। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई इस बैठक में जलवायु, तकनीक, आतंकवाद और शांति — चारों मोर्चों पर ब्रिक्स की भूमिका को परिभाषित करने की कोशिश हुई।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 14 मई 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की।
2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है; जयशंकर ने उभरते बाज़ारों की ओर से ब्रिक्स से 'रचनात्मक और स्थिर' भूमिका की बढ़ती अपेक्षा को रेखांकित किया।
जयशंकर ने जलवायु परिवर्तन पर CBDR सिद्धांत, तकनीक के समावेशी उपयोग और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग पर ज़ोर दिया।
विदेश मंत्री ने कहा कि बातचीत और कूटनीति चल रहे वैश्विक संघर्षों के समाधान की अनिवार्य शर्त हैं।
भारत ने ब्रिक्स ढाँचे के भीतर खुली और रचनात्मक वार्ता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 मई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों के बीच यह अपेक्षा तेज़ी से बढ़ रही है कि ब्रिक्स वैश्विक अनिश्चितता, सक्रिय संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों के बीच एक 'रचनात्मक और स्थिर करने वाली' शक्ति के रूप में उभरे। 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, और यह बैठक उस अध्यक्षता के तहत एक अहम कूटनीतिक पड़ाव है।

मौजूदा वैश्विक परिदृश्य पर जयशंकर का आकलन

जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव हैं, चल रहे झगड़े, आर्थिक अनिश्चितताएं और व्यापार, तकनीक और जलवायु को लेकर चुनौतियां वैश्विक माहौल को बना रही हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूरोप में युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार में व्यवधान एक साथ जारी हैं।

उन्होंने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि इस जटिल दौर में ब्रिक्स जैसे मंच का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह विकासशील दुनिया की सामूहिक आवाज़ को एकजुट करने की क्षमता रखता है।

जलवायु परिवर्तन और तकनीक पर साझा जिम्मेदारी

विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को एक अनिवार्य वैश्विक प्राथमिकता बताते हुए कहा, 'क्लाइमेट चेंज एक बड़ी चिंता बनी हुई है। हमारी बातचीत में बराबरी और आम लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाना चाहिए।' यह सिद्धांत — जिसे अंग्रेज़ी में CBDR (Common But Differentiated Responsibilities) कहा जाता है — विकासशील देशों की दीर्घकालिक मांग रही है।

तकनीकी प्रगति के वैश्विक प्रभाव पर जयशंकर ने कहा कि इन विकासों का उपयोग सुशासन और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए — न कि असमानता को गहरा करने के लिए।

शांति, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग

जयशंकर ने शांति और सुरक्षा के मुद्दों को वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में बताया। उन्होंने कहा, 'शांति और सुरक्षा के मुद्दे ग्लोबल ऑर्डर के लिए सेंट्रल बने हुए हैं। हाल के झगड़े बातचीत और कूटनीति के महत्व को और दिखाते हैं।' साथ ही उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से आतंकवाद के विरुद्ध ठोस और समन्वित सहयोग की अपील की — एक ऐसा मुद्दा जो भारत की विदेश नीति में हमेशा केंद्रीय रहा है।

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का एजेंडा

ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में जयशंकर ने कहा कि भारत बातचीत के दौरान 'खुली और रचनात्मक वार्ता' को सुगम बनाएगा। उन्होंने सभी भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों को उनकी उपस्थिति और ब्रिक्स ढाँचे के भीतर सहयोग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि इस बैठक में सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के अवसर भी थे।

जयशंकर ने कहा, 'आपके इनपुट हमारी बातचीत को गाइड करने और अच्छे नतीजों में मदद करेंगे।' आने वाले महीनों में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी के मद्देनज़र यह बैठक नीतिगत दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संदेश है — भारत चाहता है कि ब्रिक्स पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र, बहुध्रुवीय आवाज़ के रूप में स्थापित हो। आतंकवाद पर सहयोग की अपील सीधे तौर पर पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद के संदर्भ में पढ़ी जा सकती है, हालांकि जयशंकर ने किसी देश का नाम नहीं लिया। असली चुनौती यह है कि ब्रिक्स के विस्तार के बाद इसके सदस्यों के हित अक्सर टकराते हैं — चीन और भारत के बीच सीमा विवाद से लेकर रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों तक — और इस विविधता में 'कन्वर्जेंस' बनाना भारत की अध्यक्षता की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 विदेश मंत्रियों की बैठक कहाँ और कब हुई?
यह बैठक 14 मई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुई। 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसकी अध्यक्षता की।
जयशंकर ने ब्रिक्स की भूमिका को लेकर क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों के बीच यह उम्मीद बढ़ रही है कि ब्रिक्स वैश्विक अनिश्चितता, संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों के बीच एक 'रचनात्मक और स्थिर करने वाली' भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे इस जटिल दौर की ज़रूरत बताया।
ब्रिक्स बैठक में जलवायु परिवर्तन पर भारत का रुख क्या था?
जयशंकर ने जलवायु परिवर्तन को एक अनिवार्य वैश्विक मुद्दा बताया और CBDR — यानी 'आम लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों' — के सिद्धांत को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया। यह विकासशील देशों की दीर्घकालिक माँग है कि विकसित देश ऐतिहासिक उत्सर्जन की अधिक जिम्मेदारी लें।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में क्या प्राथमिकताएँ हैं?
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स की प्राथमिकताओं में जलवायु परिवर्तन, तकनीकी विकास का समावेशी उपयोग, आतंकवाद विरोधी सहयोग और वैश्विक शांति व सुरक्षा शामिल हैं। जयशंकर ने सदस्य देशों के बीच खुली और रचनात्मक वार्ता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।
ब्रिक्स बैठक में आतंकवाद पर क्या संदेश दिया गया?
विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रिक्स सदस्य देशों से आतंकवाद के विरुद्ध मजबूत और समन्वित सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि चल रहे वैश्विक संघर्ष बातचीत और कूटनीति की अनिवार्यता को और स्पष्ट करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले