क्या विदेश मंत्री जयशंकर ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात की?

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क्या विदेश मंत्री जयशंकर ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात की?

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई बातचीत में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रमों पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। जानें इस मुलाकात के प्रमुख बिंदु।

Key Takeaways

  • भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया गया।
  • वैश्विक घटनाक्रमों पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ।
  • बदलते शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा की गई।
  • दोनों नेताओं ने साझा रणनीतिक तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • फ्रांस को भारत का एक पुराना रणनीतिक साझेदार बताया गया।

नई दिल्ली/पेरिस, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत की। इस अवसर पर भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के साथ-साथ दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों पर चर्चा की।

इस बातचीत के दौरान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और वैश्विक चुनौतियों जैसे कि बदलते शक्ति संतुलन, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं और समान विचारधारा वाले सहयोगियों के बीच आवश्यक रणनीतिक तालमेल पर विचार किया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया, "फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं देकर बहुत खुशी हुई। समकालीन वैश्विक घटनाक्रमों पर उनके विचार और हमारी रणनीतिक साझेदारी के प्रति उनकी सकारात्मकता की मैं सराहना करता हूं।"

यह ध्यान देने योग्य है कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, सिविल न्यूक्लियर सहयोग, क्लीन एनर्जी और इंडो-पैसिफिक जैसे क्षेत्रों में एक पुरानी और मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों ने इस रिश्ते को बदलती दुनिया में स्थिरता का एक महत्वपूर्ण कारक बताया है, जिसमें पेरिस और नई दिल्ली ने रणनीतिक स्वायत्तता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को बढ़ावा दिया है।

पेरिस में, एस. जयशंकर ने फ्रांस के राजदूतों के सम्मेलन में भी अपनी बात रखी। उन्होंने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि व्यापार, वित्त, तकनीक, ऊर्जा, संसाधन और कनेक्टिविटी आज की दुनिया में बदलाव के प्रमुख कारक हैं। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि बदलावों का सामना करने के लिए देशों में मानसिकता में बदलाव एक निर्णायक तत्व बन गया है।

उन्होंने बहुध्रुवीयता और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने में भारत-फ्रांस साझेदारी को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

इससे पहले, एस. जयशंकर ने पेरिस में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ पहली भारत-वीमर फॉर्मेट बैठक में भाग लिया। यह बैठक भारत की पहली भागीदारी थी, जो प्रमुख यूरोपीय शक्तियों के साथ महत्वपूर्ण संवाद को नया दिशा देने का संकेत देती है।

विदेश मंत्री ने कहा, "हम पिछले कुछ वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हो रही उथल-पुथल का अवलोकन कर रहे हैं। यूरोप भी कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है, जिनके कई रणनीतिक परिणाम हैं। इसके अलावा, कुछ बड़ी घटनाएं भी हुई हैं जो वैश्विक व्यवस्था को पुनः परिभाषित कर सकती हैं। हम विभिन्न हिस्सों में हों, लेकिन इसके बावजूद, हमारे लिए नियमित रूप से विचारों का आदान-प्रदान करना और आकलन साझा करना बहुत फायदेमंद है।"

जयशंकर ने यह भी कहा, "फ्रांस हमारे सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक है। हमारी निरंतर बातचीत इस रिश्ते को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।"

Point of View

दोनों देशों का एकजुट होना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की बातचीत से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि वैश्विक स्थिरता में भी योगदान होता है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

विदेश मंत्री जयशंकर ने किन विषयों पर चर्चा की?
उन्होंने भू-राजनीतिक बदलाव, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं, और समान विचारधारा वाले देशों के बीच रणनीतिक तालमेल पर चर्चा की।
भारत और फ्रांस के बीच की साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र क्या हैं?
रक्षा, अंतरिक्ष, सिविल न्यूक्लियर सहयोग, क्लीन एनर्जी और इंडो-पैसिफिक जैसे क्षेत्र साझेदारी के प्रमुख तत्व हैं।
इस मुलाकात का वैश्विक स्तर पर क्या महत्व है?
इस मुलाकात से भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत होंगे, जो कि वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देगा।
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