युवाओं में बढ़ता हाई ब्लड प्रेशर: एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती
सारांश
Key Takeaways
- जीवनशैली में सुधार करें।
- तनाव को कम करने के उपाय खोजें।
- संतुलित आहार का पालन करें।
- नियमित व्यायाम करें।
- स्वास्थ्य की नियमित जांच कराते रहें।
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पहले हाई ब्लड प्रेशर की चिंता केवल ४० वर्ष की उम्र के बाद ही होती थी, लेकिन आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली में २० से ३० साल के लोग भी इसे अनुभव कर रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी बीमारी है जो अक्सर बिना किसी संकेत के शरीर को नुकसान पहुँचाती रहती है। इसीलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। जब तक व्यक्ति को इसका पता चलता है, तब तक इसके दुष्प्रभाव दिल, दिमाग या किडनी पर प्रभाव डालने लगते हैं।
युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ने का मुख्य कारण उनकी जीवनशैली है। पहले की तुलना में आज शारीरिक गतिविधियाँ बहुत कम हो गई हैं। घंटों कंप्यूटर और मोबाइल के सामने बैठकर काम करना, देर रात तक जागना और फिर सुबह जल्दी उठकर काम पर जाना, सब मिलकर शरीर को थका देते हैं। नींद की कमी से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है।
इसके अलावा, जंक फूड, पैकेट वाला खाना और अधिक नमक का सेवन शरीर में पानी और फैट को रोकने लगते हैं, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है।
तनाव भी हाई ब्लड प्रेशर का एक महत्वपूर्ण कारण है। पढ़ाई का दबाव, नौकरी की चिंता और भविष्य के बारे में सोचने से दिमाग में तनाव बना रहता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो नसों को सिकोड़ देते हैं। इसका परिणाम ये होता है कि खून को बहने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। आयुर्वेद भी मानता है कि मन की अशांति शरीर की बीमारियों का कारण बनती है, और हाई बीपी इसका एक उदाहरण है।
मोटापे का बढ़ना भी हाई ब्लड प्रेशर का एक और कारण बन रहा है। कम उम्र में वजन बढ़ना अब आम हो गया है। अधिक वजन के कारण दिल को खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यही अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे हाई ब्लड प्रेशर में बदल जाता है। साथ ही, धूम्रपान और शराब जैसी आदतें नसों को कमजोर करती हैं और बीपी को असंतुलित कर देती हैं। यदि परिवार में पहले से हाई बीपी की समस्या हो, तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ संकेतों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। सुबह उठते ही सिर भारी लगना, बिना कारण थकान महसूस करना, आंखों के सामने धुंधलापन, घबराहट या कभी-कभी नाक से खून आना इसके संकेत हो सकते हैं। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी खराब होने, आंखों की रोशनी कमजोर होने और दिमागी क्षमता पर प्रभाव डाल सकती है।
यदि कुछ आदतें अपनाई जाएं, तो हाई ब्लड प्रेशर से बचा जा सकता है। रोजाना के आहार में ताजे फल, सब्जियाँ, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। बहुत अधिक नमक और प्रोसेस्ड भोजन से दूरी बनाएं। शरीर को सक्रिय रखने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा चलें और योग करें। इसके अलावा, रोजाना ७ से ९ घंटे की अच्छी नींद लें। संभव हो तो मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाकर रखें। धूम्रपान और शराब का सेवन कम करना भी आवश्यक है।