तेलंगाना पुलिस ने साइबर अपराध रोकने के लिए 'ऑपरेशन क्रैकडाउन' की शुरुआत की
सारांश
Key Takeaways
- ऑपरेशन क्रैकडाउन ने साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।
- इस अभियान का लक्ष्य अवैध बैंक खातों का पता लगाना है।
- पुलिस ने १६ जिलों में कार्रवाई की है।
- संदिग्ध खातों की जांच जारी है।
- साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हैदराबाद, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना पुलिस ने बुधवार को पूरे राज्य में साइबर अपराध के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए 'ऑपरेशन क्रैकडाउन' नामक एक विशेष अभियान की शुरुआत की।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवधर रेड्डी ने बताया कि तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) के द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन क्रैकडाउन' में आने वाले कुछ महीनों में कई अभियान शामिल होंगे। यह अभियान टीजीसीएसबी, जिलों और आयुक्त कार्यालयों के सहयोग से राज्य में साइबर अपराध नेटवर्क और इसकी संरचना को निशाना बना कर उन्हें समाप्त करने और साइबर अपराध पर नियंत्रण पाने का प्रयास करेगा।
यह अभियान बुधवार को १६ जिलों/इकाइयों में आरंभ किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य अवैध बैंक खातों को ढूंढना था।
टीजीसीएसबी द्वारा किए गए आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि २०२५ के दौरान राज्य में कुल ४,७७५ अवैध खाते संचालित हो रहे थे।
डीजीपी के अनुसार, इस अभियान के तहत, १६ जिलों/इकाइयों में फैली १३७ बैंक शाखाओं में खोले गए १,८८८ संदिग्ध अवैध खातों की जांच की गई। ये खाते ९,४३१ आपराधिक गतिविधियों से जुड़े पाए गए, जिनमें तेलंगाना के ७८२ मामले शामिल हैं।
इस समन्वित अभियान में कुल १३७ पुलिस टीमों ने भाग लिया, जिसमें ५१२ अधिकारी/कर्मी शामिल थे। इन टीमों ने १३७ बैंक शाखाओं का दौरा किया और संदिग्ध अवैध खाताधारकों के केवाईसी विवरण एकत्र किए।
जांच और सत्यापन का कार्य वर्तमान में जारी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इनमें से कई शाखाओं में कई अवैध खाते हैं, कुछ मामलों में तो उनकी संख्या सैकड़ों में हो सकती है। इससे बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत और संगठित एजेंटों के नेटवर्क की आशंका पैदा होती है।
हैदराबाद के सुल्तान बाजार से संचालित एक खाते का संबंध विभिन्न अधिकार क्षेत्रों में दर्ज ४९६ आपराधिक शिकायतों से पाया गया है। वहीं, सूर्यापेट जिले में बैंक की चार शाखाओं में विभिन्न अधिकार क्षेत्रों से जुड़े २९८ खाते पाए गए हैं। जहाँ आवश्यक हो, मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
पुलिस प्रमुख ने बताया कि यह भी देखा गया है कि कुछ छोटे बैंक, जिनके पास आरटीजीएस संचालित करने की तकनीकी क्षमता नहीं है, धन हस्तांतरण के लिए राष्ट्रीय बैंकों के आरटीजीएस का उपयोग कर रहे हैं। इन बैंकों में खाते खोलने वाले व्यक्तियों का उचित सत्यापन और प्रमाणीकरण नहीं होता है और साइबर अपराधी इसी कमी का फायदा उठा रहे हैं।
'ऑपरेशन क्रैकडाउन' गहन सत्यापन, वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण, खाताधारकों के विवरण की प्रोफाइलिंग और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ जारी रहेगा।