छत्तीसगढ़: चिंतागुफा में नक्सल मुक्त जीवन की दिशा में सीआरपीएफ की पहल
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सुकमा, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का चिंतागुफा गांव, जो पहले नक्सल गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब विकास की नई दिशा में अग्रसर है। गांव में सीआरपीएफ कैंप की स्थापना के बाद स्थानीय निवासियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। सीआरपीएफ ने चिंतागुफा में बुधवार को एक सिविक एक्शन कार्यक्रम
सीआरपीएफ के सेकेंड-इन-कमांड विवेक सक्सेना ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि सिविक एक्शन कार्यक्रम को विभिन्न चरणों में लागू किया जा रहा है और इसका वर्तमान चरण चिंतागुफा में चल रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार के कार्यक्रम अन्य गांवों में भी आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को सौर लालटेन, सौर लाइट, खेती के उपकरण, बीज और खाद, बच्चों के लिए कपड़े और किताबें प्रदान की गई हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जनता, सुरक्षा बल और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
विवेक सक्सेना ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कमी होने की संभावना को देखते हुए सौर और पवन ऊर्जा के विकल्पों पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि देश के प्रधानमंत्री भी इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी महादेव कुंजम ने भी बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि कैंप की स्थापना से गांव में व्याप्त डर का माहौल समाप्त हो गया है। अब जरूरतमंदों को मुफ्त में दवाएं और कपड़े मिल रहे हैं। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है, तो कैंप में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि यह सुरक्षा और विकास की संयुक्त पहल क्षेत्र को नई दिशा दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब मेडिकल इमरजेंसी और अन्य आवश्यकताओं के लिए वे सीधे कैंप का रुख करते हैं। सुरक्षा बलों की उपस्थिति से सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है और विकासात्मक गतिविधियों को भी गति मिली है। सीआरपीएफ ने गांव में नक्सलियों की गतिविधियों को चुनौती देने वाले संदेश भी लगाए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में हालात बदल रहे हैं।