नृसिंह द्वादशी पर विशेष त्रिपुष्कर योग और राहुकाल का ध्यान रखें

Click to start listening
नृसिंह द्वादशी पर विशेष त्रिपुष्कर योग और राहुकाल का ध्यान रखें

सारांश

नृसिंह द्वादशी का पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन नृसिंह भगवान की पूजा से भक्त संकटों से मुक्ति और समृद्धि की प्राप्ति करते हैं। जानें त्रिपुष्कर योग और राहुकाल का महत्व।

Key Takeaways

  • नृसिंह द्वादशी का महत्व धार्मिक आस्था के लिए है।
  • त्रिपुष्कर योग पूजा के लिए फलदायी है।
  • राहुकाल के समय का ध्यान रखें।
  • विशेष मुहूर्तों का उपयोग करें।
  • सुख-समृद्धि की प्रार्थना का महत्व।

नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित नृसिंह द्वादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और नृसिंह भगवान से शत्रुओं का नाश, संकटों का निवारण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

धर्म शास्त्रों में नृसिंह द्वादशी को गोविन्द द्वादशी भी कहा जाता है, और इस दिन गोविन्द की पूजा की जाती है। इस वर्ष शनिवार को नृसिंह द्वादशी पर एक त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो पूजा, दान और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। दृक पंचांग के अनुसार, 28 फरवरी को द्वादशी तिथि है, जो 27 फरवरी की रात 10 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 28 फरवरी की रात 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।

शनिवार को सूर्योदय 6 बजकर 47 मिनट पर, और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 20 मिनट पर होगा। नक्षत्र पुनर्वसु सुबह 9 बजकर 35 मिनट तक फिर पुष्य होगा, योग सौभाग्य शाम 5 बजकर 2 मिनट तक, और करण बव सुबह 9 बजकर 36 मिनट तक फिर बालव रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 8 मिनट से 5 बजकर 58 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 15 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 43 मिनट तक और अमृत काल सुबह 7 बजकर 18 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक है। त्रिपुष्कर योग सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ है।

वहीं, शनिवार के अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 9 बजकर 41 मिनट से 11 बजकर 7 मिनट तक, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 8 बजकर 14 मिनट तक, और दुर्मुहूर्त सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक है।

Point of View

जो न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करता है, बल्कि समाज में शांति और समृद्धि की कामना भी करता है। इस प्रकार के पर्व हमारे सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

नृसिंह द्वादशी क्यों मनाई जाती है?
यह पर्व भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की पूजा के लिए मनाया जाता है।
त्रिपुष्कर योग का क्या महत्व है?
त्रिपुष्कर योग शुभ कार्यों और पूजा के लिए फलदायी माना जाता है।
राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल वह समय होता है, जब कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।
इस दिन पूजा के लिए कौन से मुहूर्त विशेष होते हैं?
ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, विजय मुहूर्त, और गोधूलि मुहूर्त विशेष होते हैं।
क्या नृसिंह द्वादशी पर व्रत करना आवश्यक है?
हां, भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं।
Nation Press