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पंकज उधास ने जब भारत-चीन युद्ध में गाया 'ऐ मेरे वतन के लोगों', तोहफा मिला दर्शकों से

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पंकज उधास ने जब भारत-चीन युद्ध में गाया 'ऐ मेरे वतन के लोगों', तोहफा मिला दर्शकों से

सारांश

पंकज उधास का संगीत सफर अद्भुत है। उनकी पहली स्टेज परफॉर्मेंस ने उन्हें पहचान दिलाई, जब उन्होंने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाया। जानिए उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में।

मुख्य बातें

पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को हुआ था।
उन्होंने युद्ध के समय 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाया।
उनकी पहली स्टेज परफॉर्मेंस दस साल की उम्र में हुई थी।
उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे पुरस्कार मिले।
उनका निधन 26 फरवरी 2024 को हुआ।

नई दिल्ली, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय संगीत की दुनिया में पंकज उधास एक ऐसे अद्वितीय गायक हैं, जिनकी गज़लें और रोमांटिक गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। उनका यात्रा आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत और संगीत के प्रति अपनी लगन से हर चुनौती का सामना किया। उनका जन्म 17 मई 1951 को गुजरात के जेतपुर में हुआ। बचपन से ही पंकज ने संगीत की ओर कदम बढ़ाया और उनकी पहली स्टेज परफॉर्मेंस का किस्सा उनके प्रशंसकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

पंकज के पिता, केशुभाई उधास, सरकारी नौकरी करते थे और उन्हें संगीत का शौक था। उनकी माता, जीतूबेन उधास, भी गाने में रुचि रखती थीं। पंकज के दो बड़े भाई, मनहर और निर्जल उधास, पहले से ही गायक थे। इस संगीत प्रेमी परिवार में पंकज ने संगीत की ओर रुझान विकसित किया।

दस वर्ष की आयु में, पंकज ने अपनी पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी। उस समय भारत-चीन युद्ध चल रहा था, और उन्होंने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना गाया, जो उस समय देशभक्ति का प्रतीक बन गया था। उनके गायन ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया, और एक दर्शक ने उन्हें 51 रुपए का इनाम दिया। यह छोटा सा पुरस्कार पंकज के लिए एक बड़े सम्मान जैसा था, जिसने उनके संगीत के सफर की नींव रखी।

संगीत में रुचि होने के बावजूद, पंकज ने शिक्षा को भी महत्व दिया और मुंबई में एक कॉलेज से बीएससी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने राजकोट की संगीत अकादमी में दाखिला लिया, जहां उन्होंने तबला बजाना सीखा और बाद में उस्ताद गुलाम कादिर खान से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिकी का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद, पंकज मुंबई गए और वहां उन्होंने नवरंग नागपुरकर के मार्गदर्शन में संगीत का अभ्यास किया।

पंकज का फिल्मी करियर 1972 में शुरू हुआ जब उन्होंने फिल्म 'कामना' के गानों में आवाज दी, लेकिन फिल्म असफल रही। इसके बाद, वे कुछ समय के लिए विदेश गए। वहां उन्होंने कई बड़े मंचों पर प्रदर्शन किया और लौटने पर बॉलीवुड और गज़ल की दुनिया में कदम रखा। 1986 में आई फिल्म 'नाम' में गाया 'चिट्ठी आई है' गज़ल एक बड़ी हिट साबित हुई।

पंकज ने सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि गज़ल के कई एल्बमों में भी नाम कमाया। उनके पहले एल्बम 'आहट' (1980) ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने 'मुकर्रर', 'तरन्नुम', 'महफिलन', और 'आफरीन' जैसे कई हिट एल्बम दिए। उनकी गज़लों में प्यार, रोमांस, और जज़्बातों का अद्भुत मिश्रण होता था।

पंकज उधास को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार भी मिले हैं। 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया और उनके संगीत के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 2025 में पद्मभूषण से भी नवाजा गया।

पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को मुंबई में हुआ। उनकी आयु 72 वर्ष थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उनका योगदान हमेशा याद रहेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकज उधास का जन्म कब हुआ?
पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को गुजरात के जेतपुर में हुआ।
उन्होंने अपनी पहली स्टेज परफॉर्मेंस कब दी?
पंकज उधास ने केवल दस साल की उम्र में अपनी पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी।
'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाने का महत्व क्या है?
'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना उस समय देशभक्ति का प्रतीक बन गया था।
पंकज उधास को कौन से पुरस्कार मिले?
उन्हें 2006 में पद्मश्री और 2025 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
पंकज उधास का निधन कब हुआ?
पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को मुंबई में हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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