पंकज उधास की गज़ल 'चिट्ठी आई है' ने राज कपूर को किया भावुक और बदल दी संगीत की दुनिया
सारांश
Key Takeaways
- 'चिट्ठी आई है' गाना पंकज उधास की पहचान बना।
- राज कपूर ने इसे गाने के लिए उधास को प्रेरित किया।
- उधास को कई पुरस्कार मिले, जिनमें पद्मश्री और पद्मभूषण शामिल हैं।
- उनकी गज़लें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
- उन्हें भारतीय संगीत जगत में गज़ल के जादूगर के रूप में जाना जाता है।
नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पंकज उधास भारतीय संगीत के उन सितारों में से एक हैं, जिन्होंने अपने गाने से करोड़ों लोगों का दिल जीता है। उन्होंने अपने करियर में कई बेहतरीन गाने और गज़लें गाईं, लेकिन एक गाना ऐसा है जिसने उन्हें असली पहचान दिलाई। वह गाना है 'चिट्ठी आई है', जो १९८६ में रिलीज़ हुई फिल्म 'नाम' का है। इस गाने की कहानी काफी दिलचस्प है।
शुरुआत में पंकज उधास को इस गज़ल को गाने में कोई खास रुचि नहीं थी। उन्हें लगा कि यह गाना उनके लिए कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं लाएगा, लेकिन भाग्य में कुछ और ही लिखा था।
जब यह गाना राज कपूर के पास पहुंचा और उन्होंने इसे पंकज उधास से गाने की इच्छा व्यक्त की, तब पंकज जब इसे गाने लगे, तो वह भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि इस गाने में जो भावनाएँ हैं, वह किसी और के लिए गाना संभव नहीं है। राज कपूर की यह प्रतिक्रिया पंकज उधास के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई।
पंकज उधास के करियर को 'चिट्ठी आई है' ने एक नई दिशा दे दी। इस गाने के बाद उन्हें फिल्मों और गज़ल के मंचों पर लगातार अवसर मिलने लगे। लोग उन्हें सिर्फ फिल्मों के गायक के रूप में नहीं, बल्कि गज़ल के जादूगर के रूप में भी जानने लगे। उनकी गज़लों में प्यार, रोमांस और जज़्बातों की मिठास होती थी।
पंकज उधास को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें २००६ में पद्मश्री और २०२५ में पद्मभूषण शामिल हैं। उनके गाने और गज़लें देश-विदेश में प्रसिद्ध हो गईं।
उनका निधन २६ फरवरी २०२४ को मुंबई में हुआ, लेकिन उनकी आवाज़ और गज़लें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।