भीमेश्वर मंदिर: महाभारत के पांडवों से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल
सारांश
Key Takeaways
- भीमेश्वर मंदिर कर्नाटक का एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है।
- यह मंदिर महाभारत के पांडवों से जुड़ा हुआ है।
- भगवान शिव यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।
- भीमेश्वर झरना भगवान शिव को ठंडी जलधारा अर्पित करता है।
- मंदिर तक पहुँचने के लिए ट्रैकिंग करनी पड़ती है।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जहाँ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। हरे-भरे पश्चिमी घाटों में स्थित ये मंदिर केवल भक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटन के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण हैं। आज हम एक ऐसे मंदिर के बारे में चर्चा करेंगे, जिसका इतिहास महाभारत के पांडवों से जुड़ा हुआ है।
कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिले के सागर में स्थित भीमेश्वर मंदिर, प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है। यहाँ भगवान शिव हर भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं और जीवन की हर कठिनाई से मुक्ति दिलाते हैं। यह कर्नाटक के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है, लेकिन जंगलों में होने के कारण इसका रखरखाव सही से नहीं हो पाता है।
लोककथा के अनुसार, मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। जब पांडवों को अज्ञातवास मिला, तो उन्होंने इस स्थान पर शरण ली थी।
कहा जाता है कि महाबली भीम ने इस मंदिर की स्थापना की थी और उन्होंने ही शिवलिंग को यहाँ लाया था। भगवान शिव को ठंडी जलधारा अर्पित करने के लिए अर्जुन ने बाण चलाकर भीमेश्वर झरने का निर्माण किया था, जो आज भी शिव को ठंडी जलधारा अर्पित कर रहा है। यही कारण है कि मंदिर का नाम भीम रखा गया।
मंदिर का निर्माण काले पत्थर से किया गया है। इसके भीतर कई मजबूत स्तंभ हैं, जिन पर महाभारत काल की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। मंदिर का निर्माण चालुक्य राजा भद्देगा ने कराया था। यहाँ शिवलिंग, भगवान गणेश, नंदी महाराज और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। आज भी यहाँ पूजा-अर्चना की जाती है और सावन तथा शिवरात्रि के अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर की बहुत मान्यता है। चूंकि यह जंगलों के बीच स्थित है, इसलिए यहाँ तक पहुँचने के लिए ट्रैकिंग करनी पड़ती है, क्योंकि वाहन यहाँ तक नहीं पहुँच पाते। निकटतम रेलवे स्टेशन थलागुप्पा से यह मंदिर 53 किलोमीटर दूर है, जबकि शिमोगा से 138 किमी और बेंगलुरु से 462 किमी दूर है। मुख्य सड़क से मंदिर तक पहुँचने के लिए दो किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।