मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पेश, 21 जुलाई को होगी सदन में चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन, 20 जुलाई 2026 को, राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 सदन में पेश कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है। यह मानसून सत्र 24 जुलाई 2026 तक चलेगा।
विधेयक कैसे पहुँचा सदन तक
सरकार की ओर से राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने यूसीसी विधेयक सदन के पटल पर रखा। इससे एक दिन पहले, रविवार 19 जुलाई को जगदीशपुर में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक को औपचारिक मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट ने तय किया था कि यूसीसी विधेयक समेत अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को मानसून सत्र के दौरान पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
हालाँकि, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सोमवार की विधानसभा की कार्यसूची में इस विधेयक का कोई उल्लेख नहीं था, जिसे विपक्ष ने प्रक्रियागत अनियमितता बताया।
मसौदा समिति और जन-परामर्श प्रक्रिया
राज्य में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल किए गए।
सरकार के अनुसार, जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल बनाया गया। इसके अलावा 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए और जिला व राज्य स्तर पर 50 जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं, जिनसे 1,134 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया में लगभग 94 प्रतिशत लोगों ने प्रदेश में यूसीसी लागू करने का समर्थन किया।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
राज्य सरकार ने इस विधेयक को नारी सशक्तिकरण और महिलाओं के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। महिलाओं को संपत्ति में पुरुषों के समान अधिकार मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, विवाहित व्यक्ति के लिव-इन संबंध में रहने पर अधिकतम पाँच वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में मध्य प्रदेश
यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी देश में एक व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश से पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम की विधानसभाएँ यूसीसी विधेयक पारित कर चुकी हैं। यदि यह विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा से भी पारित हो जाता है, तो मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने यूसीसी को विधायी स्वरूप दिया था।
आगे क्या होगा
21 जुलाई 2026 को सदन में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होनी है, जिसके बाद मतदान की संभावना है। विपक्षी कांग्रेस के तेवर देखते हुए सदन में तीखी बहस की उम्मीद है। सत्र 24 जुलाई तक चलेगा, इसलिए सरकार के पास विधेयक पारित कराने के लिए सीमित समय है।