21 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पेश, 21 जुलाई को होगी सदन में चर्चा

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मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पेश, 21 जुलाई को होगी सदन में चर्चा

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन यूसीसी विधेयक 2026 पेश हुआ — 21 जुलाई को चर्चा तय है। न्यायमूर्ति देसाई समिति की सिफारिशों पर आधारित इस विधेयक में सभी विवाहों का पंजीकरण और संपत्ति में महिलाओं को समान अधिकार शामिल हैं। पारित हुआ तो MP देश का चौथा यूसीसी राज्य बनेगा।

मुख्य बातें

20 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन यूसीसी विधेयक 2026 सदन में पेश किया गया।
राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने विधेयक पटल पर रखा; विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 21 जुलाई को चर्चा की तारीख तय की।
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 27 अप्रैल 2026 को गठित सात सदस्यीय समिति ने मसौदा तैयार किया; 50 जन-परामर्श बैठकों और 3.49 करोड़ एसएमएस के ज़रिए 1,134 से अधिक सुझाव लिए गए।
विधेयक में सभी विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण , महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार और विवाहित व्यक्ति के लिव-इन संबंध पर अधिकतम पाँच वर्ष की सजा का प्रावधान है।
पारित होने पर मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बनेगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधेयक सोमवार की कार्यसूची में शामिल नहीं था; मानसून सत्र 24 जुलाई 2026 तक चलेगा।

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन, 20 जुलाई 2026 को, राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 सदन में पेश कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है। यह मानसून सत्र 24 जुलाई 2026 तक चलेगा।

विधेयक कैसे पहुँचा सदन तक

सरकार की ओर से राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने यूसीसी विधेयक सदन के पटल पर रखा। इससे एक दिन पहले, रविवार 19 जुलाई को जगदीशपुर में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक को औपचारिक मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट ने तय किया था कि यूसीसी विधेयक समेत अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को मानसून सत्र के दौरान पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।

हालाँकि, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सोमवार की विधानसभा की कार्यसूची में इस विधेयक का कोई उल्लेख नहीं था, जिसे विपक्ष ने प्रक्रियागत अनियमितता बताया।

मसौदा समिति और जन-परामर्श प्रक्रिया

राज्य में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल किए गए।

सरकार के अनुसार, जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल बनाया गया। इसके अलावा 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए और जिला व राज्य स्तर पर 50 जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं, जिनसे 1,134 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया में लगभग 94 प्रतिशत लोगों ने प्रदेश में यूसीसी लागू करने का समर्थन किया।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

राज्य सरकार ने इस विधेयक को नारी सशक्तिकरण और महिलाओं के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। महिलाओं को संपत्ति में पुरुषों के समान अधिकार मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, विवाहित व्यक्ति के लिव-इन संबंध में रहने पर अधिकतम पाँच वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में मध्य प्रदेश

यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी देश में एक व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश से पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम की विधानसभाएँ यूसीसी विधेयक पारित कर चुकी हैं। यदि यह विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा से भी पारित हो जाता है, तो मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने यूसीसी को विधायी स्वरूप दिया था।

आगे क्या होगा

21 जुलाई 2026 को सदन में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होनी है, जिसके बाद मतदान की संभावना है। विपक्षी कांग्रेस के तेवर देखते हुए सदन में तीखी बहस की उम्मीद है। सत्र 24 जुलाई तक चलेगा, इसलिए सरकार के पास विधेयक पारित कराने के लिए सीमित समय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश यूसीसी विधेयक 2026 क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 20 जुलाई 2026 को विधानसभा में पेश किया गया समान नागरिक संहिता विधेयक है, जो राज्य में विवाह, संपत्ति और लिव-इन संबंधों के लिए एक समान कानूनी ढाँचा लागू करने का प्रयास करता है। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने इसका मसौदा तैयार किया।
मध्य प्रदेश यूसीसी विधेयक पर चर्चा कब होगी?
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 21 जुलाई 2026 को इस विधेयक पर चर्चा की तारीख तय की है। मानसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा, इस दौरान विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
यूसीसी विधेयक में महिलाओं के लिए क्या प्रावधान हैं?
प्रस्तावित विधेयक में महिलाओं को संपत्ति में पुरुषों के समान अधिकार और सभी विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है। सरकार ने इसे नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
कांग्रेस ने यूसीसी विधेयक पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई की विधानसभा की कार्यसूची में यूसीसी विधेयक का उल्लेख नहीं था, यानी इसे बिना पूर्व सूचना के अचानक पेश किया गया। विपक्ष इसे प्रक्रियागत अनियमितता मान रहा है।
यूसीसी लागू करने वाले भारत के कौन-कौन से राज्य हैं?
अब तक उत्तराखंड, गुजरात और असम यूसीसी विधेयक पारित कर चुके हैं। यदि मध्य प्रदेश विधानसभा भी इसे पारित कर देती है, तो मध्य प्रदेश देश का चौथा यूसीसी राज्य बन जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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