22 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास: सीएम मोहन यादव बोले — महिलाओं के हक में ऐतिहासिक कदम, विपक्ष ने उठाए सवाल

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मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास: सीएम मोहन यादव बोले — महिलाओं के हक में ऐतिहासिक कदम, विपक्ष ने उठाए सवाल

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को यूसीसी बिल पास कर दिया — उत्तराखंड के बाद ऐसा करने वाला दूसरा राज्य। सीएम मोहन यादव ने इसे महिलाओं के हक में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने पर्याप्त बहस न होने पर सवाल उठाए। आदिवासी समुदायों को दायरे से बाहर रखा गया है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे महिलाओं के अधिकारों और देश की एकता-अखंडता से जुड़ा अहम कदम बताया।
विधेयक में आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पर्याप्त चर्चा न होने और विधेयक को समिति के पास न भेजने पर आपत्ति जताई।
मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, यूसीसी लागू होने पर बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगेगी।
मध्य प्रदेश, उत्तराखंड के बाद यूसीसी की दिशा में कदम उठाने वाला दूसरा राज्य बना।

मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे देश की एकता, अखंडता और महिलाओं के अधिकारों की दिशा में निर्णायक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने पर्याप्त विचार-विमर्श न होने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री और BJP का पक्ष

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधेयक के पारित होने पर कहा, 'यह कानून देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।' BJP विधायक उषा ठाकुर ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, 'यूसीसी देश की एकता, अखंडता और पहचान के लिए आवश्यक है। इसे आज़ादी के तुरंत बाद लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन अब इतने वर्षों बाद इसे लागू किया जा रहा है।'

BJP विधायक चिंतामणि मालवीय ने संवैधानिक आधार का हवाला देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है और समय-समय पर न्यायपालिका ने भी इस विषय पर अपनी राय दी है। BJP विधायक अभिलाष पांडे ने अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने इन्हीं संवैधानिक प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया है।

विपक्ष की आपत्तियाँ

विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, 'सरकार इस विषय पर पर्याप्त चर्चा नहीं करना चाहती और विधेयक को समिति के पास भेजने से बच रही है।' उन्होंने माँग की कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था।

यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस जारी है। उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है और मध्य प्रदेश इस दिशा में कदम उठाने वाला दूसरा राज्य बन गया है।

सरकार का विपक्ष पर पलटवार

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सरकार ने विधेयक आसानी से पारित करा लिया और सदन में समर्थन का माहौल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष न तो खुलकर बिल का विरोध कर पाया और न ही समर्थन कर पाया, जिससे उसके भीतर मतभेद उजागर हुए। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद सभी नागरिकों के लिए समान नियम होंगे और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगेगी।

BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है, फिर भी कांग्रेस (INC) ने इसका विरोध किया। उन्होंने इस विरोध को राजनीतिक कारणों से प्रेरित बताया।

आम जनता और आदिवासी समुदाय पर असर

गौरतलब है कि विधेयक में आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है, जो एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह कानून लागू होता है तो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों पर एक समान नियम लागू होंगे। महिला अधिकार संगठनों ने इसे सकारात्मक संकेत बताया है, हालाँकि क्रियान्वयन की बारीकियों पर उनकी नज़र बनी हुई है।

आगे की राह

विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार की भूमिका और संभावित कानूनी चुनौतियाँ इस विधेयक की असली परीक्षा तय करेंगी। आलोचकों का कहना है कि बिना व्यापक सार्वजनिक परामर्श के पारित किया गया यह विधेयक न्यायिक समीक्षा का सामना कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — न कि विधानसभा में। उत्तराखंड का अनुभव बताता है कि कानून बनाना और उसे ज़मीन पर उतारना दो अलग चुनौतियाँ हैं। विपक्ष की 'पर्याप्त चर्चा नहीं' वाली आपत्ति तब और वज़नदार लगती है जब इतने संवेदनशील व्यक्तिगत कानूनों को बिना व्यापक सार्वजनिक परामर्श के पारित किया जाए। आदिवासी समुदायों को छूट देना एक व्यावहारिक समझौता है, लेकिन यह 'समान' संहिता की अवधारणा में अंतर्विरोध भी पैदा करता है — जिस पर न्यायिक समीक्षा में सवाल उठ सकते हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल क्या है?
मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा विधेयक पारित किया, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
यूसीसी बिल पर विपक्ष ने क्यों आपत्ति जताई?
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराई और इसे संसदीय समिति के पास भेजने से परहेज किया। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील विषय पर व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था।
क्या आदिवासी समुदाय मध्य प्रदेश के यूसीसी के दायरे में आएंगे?
नहीं। विधेयक में स्पष्ट प्रावधान है कि आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए कांग्रेस के विरोध को राजनीतिक करार दिया।
यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा?
मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में समान नियम होंगे और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगेगी। विधेयक अब राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश के अलावा किस राज्य ने यूसीसी लागू किया है?
उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है। मध्य प्रदेश विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद यह इस दिशा में कदम उठाने वाला दूसरा राज्य बन गया है, हालाँकि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही यह कानून का रूप लेगा।
राष्ट्र प्रेस
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