14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश यूसीसी रिपोर्ट: सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर लगाया वोट-बैंक राजनीति का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश यूसीसी रिपोर्ट: सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर लगाया वोट-बैंक राजनीति का आरोप

सारांश

मध्य प्रदेश में यूसीसी हाई-लेवल कमेटी ने तीन वॉल्यूम में रिपोर्ट और 404 सेक्शन वाला ड्राफ्ट बिल सौंपा। सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा कि विपक्ष अपना रुख साफ क्यों नहीं करता। 9.58 लाख से अधिक सुझावों के बाद अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

मुख्य बातें

सीएम मोहन यादव ने 14 जुलाई 2026 को कांग्रेस पर यूसीसी और भोजशाला विवाद को वोट-बैंक की नजर से देखने का आरोप लगाया।
हाई-लेवल कमेटी ने यूसीसी पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तीन वॉल्यूम में सौंपी; ड्राफ्ट बिल में 4 हिस्से, 404 सेक्शन और 7 शेड्यूल हैं।
जन-परामर्श प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए।
समिति ने अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की।
कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 14 जुलाई 2026 को भोपाल में मीडिया से बात करते हुए प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर कांग्रेस को घेरा और विपक्षी दल से अपना रुख स्पष्ट करने की माँग की। यह बयान राज्य सरकार की हाई-लेवल कमेटी द्वारा यूसीसी पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के ठीक एक दिन बाद आया।

मुख्यमंत्री का आरोप

विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में मोहन यादव ने कहा, 'समिति ने मुझे यूसीसी की रिपोर्ट सौंप दी है। अब कांग्रेस को भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करना चाहिए।' उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे यूसीसी हो या भोजशाला विवाद, कांग्रेस हर मामले को 'सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति और वोट-बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है।' यादव ने यह भी रेखांकित किया कि समिति की परामर्श प्रक्रिया में अलग-अलग धर्मों के लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी, जिसे उन्होंने 'अच्छी बात' बताया।

रिपोर्ट की संरचना और मुख्य सिफारिशें

राज्य सरकार के अनुसार, यह रिपोर्ट तीन वॉल्यूम में तैयार की गई है। पहले वॉल्यूम में संवैधानिक प्रावधानों, अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीकों, केंद्र व राज्य के कानूनों और मौजूदा रीति-रिवाजों की समीक्षा के बाद समिति की सिफारिशें हैं। दूसरे वॉल्यूम में मध्य प्रदेश के लिए तैयार यूसीसी बिल का ड्राफ्ट है, जिसमें 4 हिस्से, 404 सेक्शन और 7 शेड्यूल शामिल हैं।

तीसरे वॉल्यूम में जिला और राज्य स्तर पर बातचीत तथा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए गए व्यापक जन-परामर्श का विवरण है। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका विश्लेषण सवालों, लिंग और समुदायों के आधार पर किया गया।

पैनल की एक प्रमुख सिफारिश यह है कि अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए, क्योंकि आदिवासी समुदायों को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है और उनकी अपनी विशिष्ट रीति-रिवाज हैं।

समिति की संरचना

इस हाई-लेवल कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की। समिति के सदस्यों में प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठनकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया शामिल रहे। इस कमेटी का गठन मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में यूसीसी लागू करने की संभावनाओं की जाँच और कानूनी ढाँचा सुझाने के उद्देश्य से किया था।

आगे की राह

रिपोर्ट सौंपा जाना मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की कोशिश में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकार विधानसभा में बिल पेश करने से पहले सुझावों और ड्राफ्ट कानून की विस्तृत समीक्षा करेगी। यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख कब और कैसे स्पष्ट करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आक्रामक फ्रेमिंग है — विपक्ष को या तो यूसीसी का समर्थन करने या अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोप का सामना करने के बीच फँसाने की कोशिश। हालाँकि, असली परीक्षा यह है कि 404 सेक्शन का यह ड्राफ्ट बिल संवैधानिक चुनौतियों, विशेषकर अनुच्छेद 25-28 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के प्रश्नों, को कैसे संबोधित करता है। अनुसूचित जनजातियों को दायरे से बाहर रखने की सिफारिश यह भी दर्शाती है कि एक 'समान' संहिता व्यवहार में कितनी जटिल और खंडित हो सकती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश यूसीसी हाई-लेवल कमेटी ने क्या रिपोर्ट सौंपी है?
कमेटी ने तीन वॉल्यूम में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें संवैधानिक समीक्षा, एक 404-सेक्शन वाला ड्राफ्ट बिल और व्यापक जन-परामर्श का विवरण शामिल है। रिपोर्ट में 9.58 लाख से अधिक सुझावों का विश्लेषण भी किया गया है।
सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस यूसीसी और भोजशाला विवाद जैसे मुद्दों को हिंदू-मुस्लिम राजनीति और वोट-बैंक की नजर से देखती है। उन्होंने विपक्षी दल से यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करने की माँग की।
क्या अनुसूचित जनजातियों पर यूसीसी लागू होगा?
नहीं, कमेटी ने सिफारिश की है कि अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए। इसका कारण यह है कि आदिवासी समुदायों को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है और उनकी अपनी विशिष्ट परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं।
यूसीसी कमेटी की अध्यक्षता किसने की और इसके सदस्य कौन थे?
कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की। इसके सदस्यों में प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठनकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया शामिल थे।
मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल कब विधानसभा में पेश होगा?
अभी तक कोई आधिकारिक तिथि तय नहीं हुई है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद राज्य सरकार से ड्राफ्ट बिल और सुझावों की समीक्षा करने के बाद विधानसभा में पेश करने की दिशा में अगला कदम उठाने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले