29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल में यूसीसी पर सियासी संग्राम: विपक्ष बोला — असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है सरकार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल में यूसीसी पर सियासी संग्राम: विपक्ष बोला — असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है सरकार

सारांश

पश्चिम बंगाल में यूसीसी की बहस महज़ कानूनी सवाल नहीं रही — यह सीधे राजनीतिक रणभूमि बन चुकी है। TMC, शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने एकसुर में सरकार पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष ने संसद में खुली बहस की चुनौती भी दी है।

मुख्य बातें

29 जून को कोलकाता में TMC , शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने यूसीसी पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा — विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन 'बेईमानी' बर्दाश्त नहीं होगी।
TMC सांसद डोला सेन ने संविधान की 'विविधता में एकता' की भावना का हवाला देते हुए यूसीसी को देश की बहुलता के विरुद्ध बताया।
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यूसीसी का मुद्दा जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाया जा रहा है।
उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है; पश्चिम बंगाल में इसे लेकर राजनीतिक विरोध सबसे मुखर है।

कोलकाता में 29 जून को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया, जब शिवसेना (यूबीटी), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेताओं ने एकजुट होकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि यूसीसी को जानबूझकर ऐसे समय उठाया जा रहा है जब जनता के बुनियादी मुद्दे — रोज़गार, महंगाई और सामाजिक न्याय — हाशिये पर हैं।

शिवसेना (यूबीटी) का रुख: चर्चा हाँ, बेईमानी नहीं

शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा, "विपक्ष देश से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। यूसीसी बिल हो या देश से जुड़ा कोई भी बिल, विपक्ष हमेशा देश के साथ खड़ा रहता है। आप बेईमानी करेंगे तो हम उसके खिलाफ भी खड़े होंगे। बिल लाइए, उस पर सकारात्मक ढंग से चर्चा करते हैं।"

दुबे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और आलोचनाओं से बचने के लिए बड़े मुद्दे सामने लाती है। उनके अनुसार विपक्ष किसी भी महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक बहस से पीछे नहीं हटता, लेकिन नीतिगत खामियों पर विरोध भी उतना ही ज़रूरी है।

TMC सांसद का संवैधानिक तर्क

TMC सांसद डोला सेन ने यूसीसी के विरोध में संविधान और भारत की बहुलतावादी परंपरा का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "किसी भी सुधार की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए।" उन्होंने सवाल किया कि क्या यूसीसी की पैरवी करने वाले दल और संगठन खुद अपने भीतर जेंडर, धर्म और जाति के आधार पर समानता सुनिश्चित करते हैं।

सेन ने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविध भाषाओं, विचारों और परंपराओं में है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत का संविधान 'विविधता में एकता' के सिद्धांत पर टिका है और ऊपर से एकरूप व्यवस्था थोपने की कोशिश इस मूल भावना के विरुद्ध हो सकती है। उनके अनुसार यूसीसी से संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

कांग्रेस का आरोप: सुर्खियाँ बदलने की कोशिश

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने सीधे शब्दों में कहा, "यह मुद्दा जनता का ध्यान अन्य मामलों से हटाने के लिए उठाया जा रहा है। सरकार केवल सुर्खियाँ बदलने की कोशिश कर रही है और वास्तविक मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।" खेड़ा का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद का सत्र नज़दीक है और विपक्ष कई मोर्चों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी का मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है, जहाँ विविध धार्मिक और सांस्कृतिक समुदाय एक साथ रहते हैं। TMC सरकार पहले भी यूसीसी के प्रति अपना विरोध दर्ज करा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में यूसीसी को लेकर बहस तेज़ हो रही है और उत्तराखंड पहले ही इसे लागू कर चुका है।

आगे क्या

विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे संसद में यूसीसी पर खुली और विस्तृत बहस के लिए तैयार हैं, बशर्ते सरकार पारदर्शिता के साथ विधेयक का मसौदा सामने रखे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बहस आगामी चुनावों की रणनीतिक ज़मीन तैयार करने का भी हिस्सा हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह चुनावी ध्रुवीकरण की अगली पारी की तैयारी है। दिलचस्प बात यह है कि TMC और कांग्रेस — जो कई मुद्दों पर एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं — यूसीसी पर एक ही सुर में बोल रहे हैं, जो बताता है कि यह मुद्दा विपक्षी एकजुटता का अस्थायी सेतु बन रहा है। डोला सेन का 'सुधार घर से शुरू हो' वाला तर्क नैतिक रूप से दमदार है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है कि जो दल विविधता की दुहाई देते हैं, उनके अपने संगठनों में समानता की स्थिति क्या है। यूसीसी की बहस अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की सियासी पहचान की लड़ाई भी बन चुकी है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में यूसीसी पर विवाद क्यों है?
पश्चिम बंगाल में यूसीसी का विरोध मुख्य रूप से राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के कारण है। TMC समेत कई विपक्षी दलों का मानना है कि यूसीसी संविधान की 'विविधता में एकता' की भावना के विरुद्ध है और इसे थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।
TMC सांसद डोला सेन ने यूसीसी पर क्या कहा?
TMC सांसद डोला सेन ने कहा कि किसी भी सुधार की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए और यूसीसी की पैरवी करने वाले पहले अपनी पार्टियों में जेंडर, धर्म और जाति के आधार पर समानता लागू करें। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों का हवाला देते हुए भारत की विविधता को उसकी असली ताकत बताया।
कांग्रेस के पवन खेड़ा ने यूसीसी पर क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यूसीसी का मुद्दा जानबूझकर जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाने के लिए उठाया जा रहा है। उनके अनुसार सरकार केवल सुर्खियाँ बदलने की कोशिश कर रही है।
शिवसेना (यूबीटी) का यूसीसी पर क्या रुख है?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा कि विपक्ष यूसीसी सहित किसी भी विधेयक पर सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सरकार की नीतिगत खामियों का विरोध भी जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े मुद्दे उठाकर अपनी नाकामियों से ध्यान हटाती है।
भारत में यूसीसी अभी कहाँ लागू है?
अभी तक उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जिसने यूसीसी लागू किया है। केंद्र स्तर पर यूसीसी विधेयक अभी संसद में पेश नहीं हुआ है, हालाँकि सरकार की ओर से इस पर ज़ोर दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. 23 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले