पश्चिम बंगाल में यूसीसी पर सियासी संग्राम: विपक्ष बोला — असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है सरकार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में 29 जून को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया, जब शिवसेना (यूबीटी), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेताओं ने एकजुट होकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि यूसीसी को जानबूझकर ऐसे समय उठाया जा रहा है जब जनता के बुनियादी मुद्दे — रोज़गार, महंगाई और सामाजिक न्याय — हाशिये पर हैं।
शिवसेना (यूबीटी) का रुख: चर्चा हाँ, बेईमानी नहीं
शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा, "विपक्ष देश से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। यूसीसी बिल हो या देश से जुड़ा कोई भी बिल, विपक्ष हमेशा देश के साथ खड़ा रहता है। आप बेईमानी करेंगे तो हम उसके खिलाफ भी खड़े होंगे। बिल लाइए, उस पर सकारात्मक ढंग से चर्चा करते हैं।"
दुबे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और आलोचनाओं से बचने के लिए बड़े मुद्दे सामने लाती है। उनके अनुसार विपक्ष किसी भी महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक बहस से पीछे नहीं हटता, लेकिन नीतिगत खामियों पर विरोध भी उतना ही ज़रूरी है।
TMC सांसद का संवैधानिक तर्क
TMC सांसद डोला सेन ने यूसीसी के विरोध में संविधान और भारत की बहुलतावादी परंपरा का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "किसी भी सुधार की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए।" उन्होंने सवाल किया कि क्या यूसीसी की पैरवी करने वाले दल और संगठन खुद अपने भीतर जेंडर, धर्म और जाति के आधार पर समानता सुनिश्चित करते हैं।
सेन ने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविध भाषाओं, विचारों और परंपराओं में है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत का संविधान 'विविधता में एकता' के सिद्धांत पर टिका है और ऊपर से एकरूप व्यवस्था थोपने की कोशिश इस मूल भावना के विरुद्ध हो सकती है। उनके अनुसार यूसीसी से संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस का आरोप: सुर्खियाँ बदलने की कोशिश
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने सीधे शब्दों में कहा, "यह मुद्दा जनता का ध्यान अन्य मामलों से हटाने के लिए उठाया जा रहा है। सरकार केवल सुर्खियाँ बदलने की कोशिश कर रही है और वास्तविक मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।" खेड़ा का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद का सत्र नज़दीक है और विपक्ष कई मोर्चों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी का मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है, जहाँ विविध धार्मिक और सांस्कृतिक समुदाय एक साथ रहते हैं। TMC सरकार पहले भी यूसीसी के प्रति अपना विरोध दर्ज करा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में यूसीसी को लेकर बहस तेज़ हो रही है और उत्तराखंड पहले ही इसे लागू कर चुका है।
आगे क्या
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे संसद में यूसीसी पर खुली और विस्तृत बहस के लिए तैयार हैं, बशर्ते सरकार पारदर्शिता के साथ विधेयक का मसौदा सामने रखे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बहस आगामी चुनावों की रणनीतिक ज़मीन तैयार करने का भी हिस्सा हो सकती है।