असम यूसीसी विधेयक 2026: कांग्रेस विधायक जुबैर अनाम का आरोप, कई प्रावधान असमान
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक जुबैर अनाम ने सोमवार, 25 मई 2026 को असम विधानसभा में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026' पेश किए जाने के तुरंत बाद इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून के कई प्रावधान समानता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते और विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इन पर विस्तृत चर्चा अनिवार्य है। यह विधेयक असम को देश का पहला राज्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम है जो राज्य स्तर पर यूसीसी लागू करने का प्रयास कर रहा है।
विधायक अनाम की मुख्य आपत्तियाँ
कांग्रेस विधायक जुबैर अनाम ने कहा, 'यह बिल अपने आप में समान नहीं है। इसमें कई मुद्दे समान नहीं हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान अपनी सभी चिंताएँ विधिवत रूप से उठाएगा। उनका तर्क है कि जिस कानून को 'समान' कहा जा रहा है, उसके भीतर ही विषमता के बीज छिपे हैं।
कांग्रेस का व्यापक विरोध
कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी इस विधेयक की मुखर आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप करने वाले किसी भी कानून का वह पुरज़ोर विरोध करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी यूसीसी को लेकर बहस तेज़ है और विभिन्न दल इसके दायरे व प्रभाव पर एकमत नहीं हैं।
सरकार का पक्ष और विधेयक की प्रस्तुति
असम सरकार की ओर से मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के निर्देश पर यह विधेयक सदन में रखा। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दावा है कि प्रस्तावित यूसीसी कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करेगा और विवाह, तलाक, विरासत तथा गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एकरूपता लाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद असम यूसीसी की राह पर चलने वाला दूसरा प्रमुख राज्य बन सकता है।
मुख्यमंत्री सरमा का बयान
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि विधानसभा में यह विधेयक पेश होने से इस बात पर रिकॉर्ड पर चर्चा का रास्ता खुल गया है कि यूसीसी असम की आज की ज़रूरत क्यों है और यह देश के संस्थापकों द्वारा दिखाए गए रास्ते को साकार करने में कैसे मदद करेगा। उन्होंने इस कदम को संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित निदेशक सिद्धांतों की दिशा में ठोस प्रयास बताया।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे विधानसभा में विधेयक के हर प्रावधान की गहन जाँच करेंगे और असमान धाराओं को संशोधित करने की माँग रखेंगे। विधेयक पर अंतिम मतदान से पहले सदन में तीखी बहस की पूरी संभावना है, और यह प्रक्रिया असम में यूसीसी के भविष्य की दिशा तय करेगी।