12 जुलाई 2026
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असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 6 महीने में लागू होगा कानून

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असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक 2026 पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 6 महीने में लागू होगा कानून

सारांश

असम विधानसभा ने यूसीसी विधेयक 2026 पास कर दिया — बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 6 महीने में लागू होने की उम्मीद। CM सरमा ने इसे 'ऐतिहासिक' बताया, विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 पारित किया।
विधेयक अब राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के लिए जाएगा।
राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।
कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है।
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे में सभी धर्मों पर समान नागरिक ढाँचा लागू होगा।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कुछ प्रावधानों और छूटों पर चिंता जताई है।

असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 पारित कर दिया — जिससे असम देश का पहला ऐसा राज्य बनने की दिशा में अग्रसर हो गया जो उत्तराखंड के बाद यूसीसी को विधायी रूप देगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधेयक पारित होने के तुरंत बाद पत्रकारों को बताया कि इसे अब राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

विधेयक में क्या है

प्रस्तावित कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी धर्मों पर एक समान नागरिक ढाँचा लागू करेगा। विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण भी शामिल है। गौरतलब है कि ये प्रावधान मौजूदा धर्म-विशेष पर्सनल लॉ को सीधे प्रभावित करेंगे।

आगे की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि विधेयक पहले राज्यपाल के पास जाएगा, उसके बाद राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति के लिए अग्रेषित होगा। उन्होंने कहा, "अब यह विधेयक महामहिम राष्ट्रपति जी की मंजूरी के लिए जाएगा। मंजूरी मिलते ही असम में इस कानून को पूरी तरह लागू किया जाएगा।"

सरमा ने यह भी बताया कि कानून लागू करने से जुड़े छह से सात नियम पहले से तैयार हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले अधिसूचित नहीं किया जा सकता। इन नियमों को अधिसूचित करने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी भी आवश्यक होगी। प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में तीन से छह महीने का समय लग सकता है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सरमा ने विधेयक के पारित होने को 'ऐतिहासिक' कदम बताया। उन्होंने कहा, "आज असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 पारित किया है। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ और इस ऐतिहासिक कानून को अपनाने के लिए विधानसभा के सभी सदस्यों का धन्यवाद करता हूँ।" उन्होंने सदन के सभी सदस्यों का समर्थन के लिए आभार जताया।

विपक्ष और संगठनों की चिंताएँ

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत असम सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। हालाँकि, विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों और छूटों को लेकर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि कुछ समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं और अधिकारों पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया है।

राष्ट्रीय संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया में है और केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी की संभावना तलाश रही है। असम का यह कदम भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण विधायी मिसाल बन सकता है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद असम में यूसीसी का पूर्ण क्रियान्वयन देश की नज़रों में रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ कई समुदायों की परंपरागत प्रथाएँ इस कानून से सीधे टकरा सकती हैं। विपक्ष की आपत्तियाँ केवल राजनीतिक नहीं हैं — छूटों और प्रावधानों की अस्पष्टता वास्तविक कानूनी जटिलताएँ पैदा कर सकती है। राष्ट्रपति की मंजूरी और नियमों की अधिसूचना के बाद असम का अनुभव तय करेगा कि यूसीसी का राष्ट्रीय रोलआउट कितना व्यावहारिक है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम यूसीसी विधेयक 2026 क्या है?
यह असम विधानसभा द्वारा 27 मई 2026 को पारित समान नागरिक संहिता विधेयक है, जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी धर्मों पर एक समान कानूनी ढाँचा लागू करेगा। इसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण भी शामिल है।
असम में यूसीसी कब लागू होगा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, विधेयक को पहले राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक व कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद असम में यूसीसी पूरी तरह लागू किया जाएगा।
यूसीसी विधेयक अब किस प्रक्रिया से गुजरेगा?
विधानसभा से पास होने के बाद विधेयक राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के पास जाएगा और उसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अंतिम स्वीकृति के लिए अग्रेषित होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही राज्य सरकार 6-7 नियमों को मंत्रिमंडल की मंजूरी से अधिसूचित करेगी।
विपक्ष और संगठनों ने यूसीसी पर क्या आपत्तियाँ जताई हैं?
विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों और छूटों को लेकर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि कुछ समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं पर इसके प्रभाव का पर्याप्त आकलन नहीं हुआ है, हालाँकि सरकार ने इसे समानता और सामाजिक न्याय का कदम बताया है।
असम यूसीसी का राष्ट्रीय महत्त्व क्या है?
उत्तराखंड के बाद असम यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जो भाजपा शासित राज्यों में इस कानून की विधायी मिसाल स्थापित करता है। यह कदम केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय यूसीसी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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