असम यूसीसी विधेयक पर BJP प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया का कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के असम प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने 14 मई को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी 'तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति' के चलते यूसीसी का विरोध कर रही है। उल्लेखनीय है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि राज्य सरकार 25 मई को विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करेगी।
सैकिया का पक्ष: 'एक देश, एक कानून'
सैकिया ने कहा कि प्रस्तावित यूसीसी का मकसद सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, जिससे समाज में समानता और एकता को बल मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी भी धार्मिक समुदाय के विरुद्ध नहीं है और किसी वर्ग को इससे नुकसान नहीं होगा। उनके अनुसार, 'एक देश, एक कानून' की अवधारणा को मजबूत करना समय की माँग है, क्योंकि इससे लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड का उदाहरण
सैकिया ने अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए उत्तराखंड का हवाला दिया, जहाँ यूसीसी पहले ही लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद कोई उल्लेखनीय नकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, जो यह दर्शाता है कि इस कानून को लेकर जो भय फैलाया जा रहा है, वह निराधार है।
कांग्रेस पर सीधा प्रहार
सैकिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस की राजनीति समाज को बाँटने और समुदायों के बीच खाई पैदा करने पर टिकी है। बाद में उन्होंने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित कई वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस का रुख पूरी तरह विरोधात्मक और राजनीतिक लाभ से प्रेरित है। सैकिया ने यह भी कहा कि कांग्रेस राज्य में बदलते राजनीतिक माहौल को भाँपने में विफल रही है।
विधानसभा सत्र और विधेयक की तैयारी
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की थी कि असम विधानसभा का आगामी सत्र 21 मई से शुरू होगा। राज्य सरकार 25 मई को सदन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करेगी। सैकिया ने मुख्यमंत्री सरमा का आभार जताया, जिन्होंने चुनावों से पहले ही राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
आगे क्या
असम विधानसभा में 25 मई को यूसीसी विधेयक पेश होने के साथ ही राज्य की राजनीति नए मोड़ पर आ जाएगी। यदि विधेयक पारित होता है, तो असम उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन जाएगा। विपक्ष की प्रतिक्रिया और सदन में होने वाली बहस इस दिशा में निर्णायक होगी।