असम यूसीसी विधेयक 2025: भाजपा विधायक बिमल बोरा बोले — सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता की नींव है यह कानून
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक बिमल बोरा ने बुधवार, 27 मई को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर चल रही बहस में हिस्सा लेते हुए इसे सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करार दिया। गुवाहाटी में विधानसभा के चालू सत्र के दौरान बोरा ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक महज एक कानूनी प्रस्ताव नहीं, बल्कि भारत की विविधता में एकता की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब है।
विधेयक का संवैधानिक आधार
बोरा ने संविधान के अनुच्छेद 44 — राज्य के नीति निदेशक तत्वों — का हवाला देते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने स्वयं पूरे देश में एक समान नागरिक ढाँचा लागू करने की कल्पना की थी। उन्होंने कहा, 'यूसीसी का विचार अचानक या मनमाना नहीं है। यह संविधान निर्माताओं की सोच का हिस्सा था।' उनके अनुसार, यह विधेयक उसी संवैधानिक दृष्टि को व्यावहारिक रूप देने का प्रयास है।
उन्होंने जोर देकर कहा, 'यह विधेयक केवल कानूनी ढाँचा नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक चेतना को दर्शाता है।' गौरतलब है कि UCC को लेकर देश में वर्षों से बहस चली आ रही है और असम इसे विधायी स्तर पर आगे बढ़ाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
विविधता में एकता का तर्क
भाजपा विधायक ने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार करते हुए कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर से देश के अन्य हिस्सों तक भाषाएँ, परंपराएँ और रीति-रिवाज भले ही अलग हों, किंतु राष्ट्र की आत्मा एक ही है। उन्होंने कहा, 'भारत विविधताओं में एकता वाला राष्ट्र है। भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी भावना एक ही है।'
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को लेकर दीर्घकालिक सामाजिक विमर्श चल रहा है। असम में जनजातीय और गैर-जनजातीय समुदायों की बहुलता को देखते हुए यह विधेयक राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी माना जा रहा है।
महिलाओं के अधिकार और लैंगिक समानता
बोरा ने विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य सभी समुदायों की महिलाओं को सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने लैंगिक समानता और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में कई कानूनी प्रावधान महिलाओं के साथ असमानता पैदा करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विवाह और परिवार की परंपराएँ समाज की मजबूत नींव हैं और यह विधेयक परिवारों में सामाजिक जिम्मेदारी और स्थिरता को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।
मुख्यमंत्री सरमा का वादा और 'एक राष्ट्र, एक कानून'
बोरा ने 'एक राष्ट्र, एक कानून' की अवधारणा को BJP की वैचारिक प्रतिबद्धता बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में UCC विधेयक लाने का अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने इस विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।
आगे की राह में यह विधेयक विधानसभा में पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी और संभावित कानूनी चुनौतियों से गुजरेगा। विपक्षी दलों और कुछ समुदायों की आपत्तियाँ इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं।