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यूसीसी बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का कानून: भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा, MP में जुलाई सत्र में प्रारूप पेश होगा

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यूसीसी बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का कानून: भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा, MP में जुलाई सत्र में प्रारूप पेश होगा

सारांश

मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे बेटियों के सम्मान का कानून बताया, अंबेडकर की विरासत का हवाला दिया। मोहन यादव सरकार जुलाई सत्र में मसौदा पेश करेगी, जनता से 9 लाख से अधिक सुझाव मिल चुके हैं।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने 24 जून 2026 को यूसीसी को बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का कानून बताया।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार जुलाई विधानसभा सत्र में यूसीसी का प्रारूप पेश करने की तैयारी में है।
प्रदेशवासियों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं; अब तक 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।
सरकार के अनुसार प्राप्त सुझावों में से 90 प्रतिशत यूसीसी के पक्ष में हैं।
बाबासाहेब अंबेडकर को यूसीसी का समर्थक बताते हुए नेहरू-युग की सरकार पर इसे रोकने का आरोप लगाया।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने 24 जून 2026 को भोपाल में कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) वास्तव में बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का कानून है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार जुलाई में प्रस्तावित विधानसभा सत्र में यूसीसी का मसौदा पेश करने की तैयारी में जुटी है।

विधायक शर्मा का बयान

संवाददाताओं से बात करते हुए रामेश्वर शर्मा ने कहा, 'यह कानून सच में बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का कानून है और जो अबोध बच्चे हैं, उनकी शिक्षा और सुरक्षा का कानून है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे वह बेटी हिंदू की हो, जैन की हो, बौद्ध की हो, ईसाई की हो या मुसलमान की हो — वह बेटी हिंदुस्तान की है और यूसीसी उसे समान अधिकार देगा।

शर्मा का यह भी दावा है कि यूसीसी मौलवियों की कथित जबरदस्ती को समाप्त करेगा और हर धर्म की बेटी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित करेगा।

अंबेडकर और यूसीसी का ऐतिहासिक संदर्भ

शर्मा ने संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि समान नागरिक कानून लागू करने की मंशा स्वयं बाबासाहेब की थी। उनके अनुसार, जवाहरलाल नेहरू और उस दौर की सरकार तथा नेता इस कानून को लागू नहीं करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब हमेशा 'एक देश, एक विधान, एक प्रधान और एक निशान' के सिद्धांत पर जोर देते थे।

गौरतलब है कि यूसीसी का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति-निर्देशक तत्त्वों के रूप में है, जो इसे लागू करने की सिफारिश करता है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाता।

मध्य प्रदेश में यूसीसी की तैयारी

मोहन यादव सरकार ने राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया है। इसी क्रम में प्रदेशवासियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि अब तक 9 लाख से अधिक लोगों के सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत सुझाव इस कानून के पक्ष में बताए जा रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि यूसीसी का प्रारूप आगामी जुलाई विधानसभा सत्र में पेश किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है।

व्यापक राजनीतिक परिदृश्य

यूसीसी का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से विवादास्पद रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे अपने चुनावी घोषणापत्र और वैचारिक एजेंडे का हिस्सा मानती है, जबकि विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप बताते हैं। मध्य प्रदेश में यूसीसी की दिशा में उठाया गया यह कदम राज्य की राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करता है।

आगे क्या होगा

जुलाई विधानसभा सत्र में यूसीसी का मसौदा पेश होने के बाद इस पर विस्तृत विधायी बहस होने की संभावना है। प्रदेश में प्राप्त सुझावों को मसौदे में शामिल करने का दावा सरकार कर रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि मसौदे में किन प्रावधानों को स्थान मिलता है और विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो व्यापक जनसमर्थन जुटाने की रणनीति है। हालाँकि, 9 लाख सुझावों में से 90% के पक्ष में होने का दावा सत्यापन-योग्य नहीं है — यह आँकड़ा सरकार द्वारा स्व-घोषित है और किसी स्वतंत्र एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की। उत्तराखंड के अनुभव से यह भी स्पष्ट है कि यूसीसी का मसौदा पेश होना और उसका क्रियान्वयन दो अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। असली परीक्षा यह होगी कि मध्य प्रदेश का मसौदा अल्पसंख्यक समुदायों की आपत्तियों और संवैधानिक जाँच को किस हद तक झेल पाता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) क्या है और मध्य प्रदेश में इसे क्यों लाया जा रहा है?
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एक ऐसा कानून है जो विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों पर धर्म-निरपेक्ष एकसमान नियम लागू करेगा। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार इसे जुलाई विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी में है और इसके लिए जनता से सुझाव माँगे जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में यूसीसी पर जनता से कितने सुझाव मिले हैं?
सरकार के अनुसार अब तक 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत यूसीसी के पक्ष में बताए जा रहे हैं। यह आँकड़ा सरकारी दावे पर आधारित है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी को लेकर क्या कहा?
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने 24 जून 2026 को कहा कि यूसीसी बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का कानून है, चाहे वह किसी भी धर्म की हो। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को इस कानून का समर्थक बताया और कहा कि नेहरू-युग की सरकार ने इसे लागू होने से रोका।
मध्य प्रदेश में यूसीसी का मसौदा कब पेश होगा?
मोहन यादव सरकार की कोशिश है कि यूसीसी का प्रारूप जुलाई 2026 में आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाए। सत्र की तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
क्या भारत में यूसीसी पहले किसी राज्य में लागू हो चुका है?
हाँ, उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने यूसीसी लागू किया है। मध्य प्रदेश इस दिशा में कदम उठाने वाला अगला राज्य बन सकता है, यदि जुलाई सत्र में मसौदा पारित हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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