जयशंकर की जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों से मुलाकात, पश्चिम एशिया संकट पर अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं और उभरते पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है और भारत एक सक्रिय वार्ताकार की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
जॉर्डन के विदेश मंत्री से बैठक
जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी के साथ बैठक के बाद डॉ. जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पश्चिम एशिया-मध्य पूर्व पर हमारी चर्चा वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण रही।' गौरतलब है कि जॉर्डन खाड़ी क्षेत्र की सीमा पर स्थित एक रणनीतिक देश है, जो खाड़ी संघर्ष के दौरान ईरान के हमलों का शिकार भी हुआ। इस संदर्भ में भारत और जॉर्डन के बीच यह संवाद विशेष कूटनीतिक महत्व रखता है।
मिस्र के विदेश मंत्री से मुलाकात
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देल अत्ती के साथ अपनी बैठक को डॉ. जयशंकर ने 'क्षेत्रीय घटनाक्रमों की एक उपयोगी समीक्षा' बताया। भारत और मिस्र के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, और मिस्र पश्चिम एशिया में एक बड़ी राजनीतिक व सामरिक शक्ति मानी जाती है। दोनों देशों के बीच यह बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में भारत की कूटनीतिक सक्रियता को रेखांकित करती है।
दो-राज्य समाधान पर भारत की स्थिति
पश्चिम एशिया से जुड़े एक अन्य अहम घटनाक्रम में, विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने दो-राज्य समाधान लागू करने के लिए 'ग्लोबल अलायंस' की उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक की अध्यक्षता सऊदी अरब ने की, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीन और इजरायल को स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्रों के रूप में शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व सुनिश्चित कराना था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'भारत ने दो-राज्य समाधान के लिए अपने स्पष्ट और निरंतर समर्थन की पुष्टि की। भारत का दृष्टिकोण राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ व्यावहारिक समर्थन को जोड़ता है।' यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा भी दो-राज्य समाधान के विचार का लगातार समर्थन करती रही है।
एंटीगुआ और बारबुडा से भी बातचीत
एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन से मुलाकात में डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) की सफलता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह बैठक नवंबर 2026 में एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित होनी है। डॉ. जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और जलवायु परिवर्तन सहयोग आगे बढ़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि भारत ने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से एंटीगुआ को 10 लाख डॉलर की सहायता दी है, इसके अतिरिक्त तूफान से तबाह हुए अस्पताल के पुनर्निर्माण जैसे कार्यक्रमों में भी सीधा सहयोग किया है।
आगे क्या
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र में डॉ. जयशंकर की ये बैठकें भारत की बहुआयामी पश्चिम एशिया नीति को प्रतिबिंबित करती हैं — एक ओर मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान का समर्थन, दूसरी ओर क्षेत्रीय शक्तियों के साथ सीधा कूटनीतिक संपर्क। आने वाले हफ्तों में CHOGM और पश्चिम एशिया की स्थिति दोनों मोर्चों पर भारत की कूटनीतिक दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।