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मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी बिल: भाजपा नेताओं ने बताया 'वर्तमान और भविष्य के लिए अनिवार्य'

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मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी बिल: भाजपा नेताओं ने बताया 'वर्तमान और भविष्य के लिए अनिवार्य'

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी बिल पेश होने की तैयारी के साथ भाजपा नेताओं ने एकजुट मोर्चा खोला। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से लेकर विधायक रामेश्वर शर्मा तक — सभी ने इसे मुस्लिम महिलाओं की मुक्ति और सामाजिक समानता का कदम बताया। कांग्रेस के विरोध को भाजपा ने कुप्रथाओं के समर्थन के रूप में पेश किया।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश सरकार ने 20 जुलाई 2026 को यूसीसी ड्राफ्ट को मंजूरी देकर विधानसभा में पेश किया।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा — यूसीसी विरोधी नेता जनता की नज़रों से उतर जाएंगे; किसानों को जल्द ₹1,400 करोड़ बैंक खातों में भेजे जाएंगे।
मंत्री विश्वास सारंग ने यूसीसी को 'वर्तमान और भविष्य के लिए अनिवार्य' बताया।
विधायक रामेश्वर शर्मा ने चेतावनी दी — एक से अधिक विवाह करने वालों को जेल जाना होगा; हलाला जैसी कुप्रथा देश में नहीं चलेगी।
विधायक चिंतामणि मालवीय ने यूसीसी को 'समानता का कानून' बताया, कांग्रेस के विरोध को मुस्लिम महिला-विरोधी करार दिया।

मध्य प्रदेश सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के ड्राफ्ट को मंजूरी देते हुए इसे 20 जुलाई 2026 को विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर ली है। इस ऐतिहासिक कदम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट समर्थन जताया और कहा कि यह कानून देश की महिलाओं — विशेषकर मुस्लिम महिलाओं — के अधिकारों की रक्षा के लिए नितांत आवश्यक है।

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का बयान

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि यूसीसी का विरोध करने वाले नेता जनता की नज़रों से गिर जाएंगे। उन्होंने कहा, 'भाजपा की सरकार में सभी मुद्दों का समाधान हो रहा है।' किसान कल्याण पर बोलते हुए शुक्ला ने बताया कि सिंचाई, बीज-खाद की व्यवस्था और फसल बीमा योजना के माध्यम से जल्द ही ₹1,400 करोड़ किसानों के बैंक खातों में भेजे जाएंगे।

मंत्री विश्वास सारंग की प्रतिबद्धता

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'वर्तमान और भविष्य के लिए यूसीसी बहुत ज़रूरी है।' उन्होंने दोहराया कि सरकार यूसीसी को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भाजपा विधायकों की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यूसीसी बिल आज विधानसभा में पास किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हलाला जैसी कुप्रथाओं को बढ़ावा देना चाहती है और मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव करती है। शर्मा ने कहा, 'हम डंके की चोट पर कह रहे हैं कि हलाला जैसी कुप्रथा देश में नहीं चलेगी। मुस्लिम बहन-बेटियों को भी सम्मान की ज़िंदगी जीने का हक और अधिकार है।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एक से अधिक विवाह करने वालों को जेल जाना होगा।

भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने यूसीसी को 'समानता का कानून' बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में समानता हमेशा स्वीकार्य होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि कांग्रेस इस बिल का विरोध करती है तो इसका अर्थ है कि वह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के विरुद्ध है। मालवीय ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर मुस्लिम महिलाओं को विभिन्न प्रकार के तलाक से मुक्ति मिलेगी।

यूसीसी का संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है, और अब मध्य प्रदेश इस दिशा में दूसरा बड़ा राज्य बनने की ओर अग्रसर है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज़ है।

आगे क्या होगा

विधानसभा में बिल पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। विपक्षी दल कांग्रेस के रुख पर सबकी नज़रें टिकी हैं, जो इस बिल का विरोध करने की स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा आगामी चुनावों में भी केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो 'समान नागरिक संहिता' को चुनावी और वैचारिक धुरी बनाने पर टिकी है। आलोचकों का कहना है कि बिल के प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण किए बिना केवल राजनीतिक बयानबाजी से असली सवाल — क्रियान्वयन तंत्र, अल्पसंख्यक समुदायों की आपत्तियाँ, और संवैधानिक वैधता — दब जाते हैं। उत्तराखंड के यूसीसी अनुभव से सीख लेना ज़रूरी है, जहाँ कानून बनने के बाद भी ज़मीनी अमल की गति धीमी रही। मध्य प्रदेश की असली परीक्षा विधानसभा में मतदान नहीं, बल्कि बिल के बाद का क्रियान्वयन ढाँचा होगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक ऐसा कानून है जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू करता है। मध्य प्रदेश सरकार ने 20 जुलाई 2026 को इसके ड्राफ्ट को मंजूरी देकर विधानसभा में पेश किया।
भाजपा नेता यूसीसी का समर्थन क्यों कर रहे हैं?
भाजपा नेताओं का कहना है कि यूसीसी मुस्लिम महिलाओं को हलाला जैसी कुप्रथाओं और एकतरफा तलाक से मुक्ति दिलाएगा और उन्हें समान अधिकार देगा। उनके अनुसार यह 'समानता का कानून' है जो लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप है।
कांग्रेस यूसीसी बिल का विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस ने यूसीसी बिल का विरोध किया है, हालाँकि उसने अपने विरोध के विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से रखे हैं। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस का विरोध मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है, जिसे कांग्रेस ने अस्वीकार किया है।
यूसीसी लागू होने से मुस्लिम महिलाओं पर क्या असर पड़ेगा?
भाजपा नेताओं के अनुसार, यूसीसी लागू होने पर मुस्लिम महिलाओं को विभिन्न प्रकार के एकतरफा तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं से कानूनी सुरक्षा मिलेगी। एक से अधिक विवाह करने वालों के लिए जेल का प्रावधान भी इस बिल में शामिल बताया जा रहा है।
मध्य प्रदेश से पहले किस राज्य ने यूसीसी लागू किया?
उत्तराखंड भारत का पहला राज्य है जिसने यूसीसी लागू किया। मध्य प्रदेश इस दिशा में कदम उठाने वाला दूसरा बड़ा राज्य बनने की ओर अग्रसर है।
राष्ट्र प्रेस
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