21 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक पारित: भाजपा ने कहा 'ऐतिहासिक', कांग्रेस ने बताया 'ध्यान भटकाने की कोशिश'

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मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक पारित: भाजपा ने कहा 'ऐतिहासिक', कांग्रेस ने बताया 'ध्यान भटकाने की कोशिश'

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित होते ही भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गईं। भाजपा ने इसे महिला अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, तो कांग्रेस ने इसे किसान, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की चाल करार दिया। आदिवासी समुदाय को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया।
भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार का 'ऐतिहासिक' कदम बताया।
विधेयक के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का एक महीने के भीतर अनिवार्य पंजीकरण और उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं।
आदिवासी समुदाय को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है; उनके रीति-रिवाज और परंपराएँ अप्रभावित रहेंगी।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघर ने आरोप लगाया कि सरकार किसान, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह विधेयक लाई।
उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार, 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होते ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई। सत्ता पक्ष ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति करार दिया।

भाजपा की प्रतिक्रिया: 'इतिहास रच दिया'

राज्य भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने यूसीसी लागू कर मध्य प्रदेश में इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि यह कानून सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मज़बूत करेगा तथा महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षा और समान अधिकार सुनिश्चित करेगा।

खंडेलवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि नए कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण एक महीने के भीतर करना होगा और उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है और उनके रीति-रिवाज तथा परंपराएँ पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी।

कांग्रेस का विरोध: 'असली मुद्दों से भटकाव'

विधानसभा परिसर में प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले विपक्ष के नेता उमंग सिंघर ने सरकार पर किसानों की दुर्दशा, बेरोज़गारी, महिलाओं के विरुद्ध अपराध, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

सिंघर ने कहा, 'भाजपा सरकार जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। किसानों, बेरोज़गार युवाओं, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा करने के बजाय वह यूसीसी जैसे मुद्दों को उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राज्य की चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए जल्दबाज़ी में यह विधेयक पारित कराया।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ

यूसीसी विधेयक का उद्देश्य विभिन्न धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों — जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से जुड़े नियमों — को एकसमान कानूनी ढाँचे में समाहित करना है। गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र स्तर पर भी यूसीसी को लेकर बहस जारी है।

आदिवासी समुदाय को कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का बड़ा हिस्सा है।

विधानसभा में माहौल

मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही में यूसीसी विधेयक केंद्रबिंदु रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद विधेयक को पारित किया गया। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया, जिससे दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा हो गया।

आगे क्या होगा

विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा। कानून के क्रियान्वयन के लिए नियम और विनियम तैयार किए जाएँगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून न्यायालयों में चुनौती का सामना कर सकता है, विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता और आदिवासी अधिकारों के संदर्भ में।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की सुनियोजित राजनीतिक चाल भी है — जो हिंदुत्व एजेंडे को ठोस कानूनी रूप देती है। विडंबना यह है कि जो कानून 'समानता' के नाम पर लाया गया, उसमें आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया — यह राजनीतिक व्यावहारिकता की स्वीकृति है, न कि सार्वभौमिक समानता के सिद्धांत की। कांग्रेस का विरोध नैतिक रूप से सही लग सकता है, लेकिन उसके पास यूसीसी के विकल्प में कोई ठोस नीतिगत एजेंडा नहीं दिखता। असली कसौटी यह होगी कि क्रियान्वयन के दौरान यह कानून न्यायालयों की समीक्षा और ज़मीनी विरोध दोनों को झेल पाता है या नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में पारित यूसीसी विधेयक क्या है?
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक एक ऐसा कानून है जो सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एकसमान कानूनी ढाँचा स्थापित करता है। मध्य प्रदेश विधानसभा ने इसे 21 जुलाई को मानसून सत्र में पारित किया।
क्या मध्य प्रदेश का यूसीसी आदिवासियों पर भी लागू होगा?
नहीं, भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के अनुसार आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है और उनके रीति-रिवाज तथा परंपराएँ पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह प्रावधान राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी बड़ी है।
यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर क्या प्रावधान है?
विधेयक के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।
कांग्रेस ने यूसीसी विधेयक का विरोध क्यों किया?
विपक्ष के नेता उमंग सिंघर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों की दुर्दशा, बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जल्दबाज़ी में यह विधेयक लाई। कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन भी किया।
यूसीसी पारित करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश का स्थान क्या है?
उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। विधेयक को अब राज्यपाल की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसके क्रियान्वयन के लिए नियम तैयार किए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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