मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक पारित: CM मोहन यादव का इंदौर में सर्वधर्म स्वागत, MP बना चौथा राज्य
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक ध्वनि मत से पारित होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव जब 23 जुलाई को इंदौर पहुँचे, तो विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों सहित आम नागरिकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस विधेयक के पारित होने के साथ मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य बन गया है जहाँ यूसीसी को विधायी मंजूरी मिली है।
मानसून सत्र में पारित हुआ ऐतिहासिक विधेयक
राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार ने यह विधेयक सदन के पटल पर रखा और ध्वनि मत से इसे पारित करा लिया। यूसीसी के दायरे में विवाह, विवाह-विच्छेद और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनी मामले आते हैं, जो अब तक अलग-अलग धार्मिक कानूनों के अंतर्गत संचालित होते थे।
मुख्यमंत्री का इंदौर में सर्वधर्म अभिनंदन
इंदौर में हुए स्वागत समारोह में हिंदू, मुस्लिम, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, 'अभी यहाँ सभी धर्मों के लोगों ने यूसीसी का समर्थन करते हुए राज्य सरकार का अभिनंदन किया।' उन्होंने बताया कि यूसीसी के लिए राज्य सरकार ने साढ़े तीन करोड़ से अधिक लोगों से संपर्क किया और इसके समर्थन में 10 लाख सुझाव प्राप्त हुए।
क्रांतिकारियों की विरासत से जोड़ा यूसीसी का संदेश
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि 23 जुलाई को अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जो सभी नागरिकों को समान अवसर और समान दृष्टि से देखे। उन्होंने यूसीसी को उसी सपने की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'एक देश-एक विधान-एक निशान-एक प्रधान' की नीति पर काम हो रहा है।
इंदौर के विकास पर भी की चर्चा
यूसीसी के अलावा मुख्यमंत्री ने इंदौर के बुनियादी ढाँचे की तारीफ करते हुए डबल-डेकर ब्रिज का उल्लेख किया, जिसमें नीचे सड़क पुल, बीच में रेल और ऊपर एक और पुल है। उन्होंने इसे आधुनिक तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण बताया और कहा कि इंदौर पूरे प्रदेश के लिए प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
आगे क्या होगा
विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी और केंद्र सरकार की अधिसूचना की प्रक्रिया से गुज़रना होगा। यूसीसी लागू होने के बाद मध्य प्रदेश उन बड़े राज्यों में शामिल हो जाएगा जो समान कानून के तहत नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा कर रहे हैं। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी बहस को नई दिशा दे सकता है।