नेपाल बाढ़: 1,344 शव बरामद, 4,886 लापता — ग्यारहवें दिन भी जारी है बचाव अभियान
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या 1,344 तक पहुँच गई है। नेपाल पुलिस के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, ग्यारहवें दिन — शनिवार, 5 सितंबर 2026 की सुबह 8 बजे तक — इतने शव बरामद किए जा चुके हैं। हर गुज़रते दिन के साथ अलग-अलग ज़िलों से नए शव मिल रहे हैं, और मृतक संख्या में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है।
लापता लोगों की स्थिति
अब तक 4,886 लोग लापता हैं, जिनमें 606 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है जो भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर पर बने 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फँसे हुए हैं। बचाव दल इन सुरंगों में अभियान जारी रखे हुए हैं।
एक उत्साहजनक खबर यह रही कि शुक्रवार को रसुवा ज़िले में 60 मेगावाट के अपर त्रिशूली 3ए प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जीवित बचाया गया।
बचाव और राहत अभियान
नेपाल सरकार ने कहा है कि लापता लोगों की तलाश, शवों की बरामदगी, उनकी पहचान और राहत कार्य एक साथ जारी हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान तेज़ कर दिए हैं। अब तक 8,962 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जिनमें 1,552 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
नेपाल पुलिस ने बचाव, खोज और राहत कार्यों के लिए 7,912 कर्मियों को तैनात किया है। इस आपदा में पुलिस के 65 कर्मी भी काल के गाल में समा गए, जबकि 25 पुलिसकर्मी अभी भी लापता हैं।
शवों की पहचान के प्रयास
बरामद शवों की पहचान के लिए डीएनए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, 1,260 मृतकों और उनके 1,012 रिश्तेदारों से डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं, जिससे कुल सैंपल की संख्या 2,272 हो गई है। यह प्रक्रिया पीड़ित परिवारों को उनके प्रियजनों के अंतिम संस्कार में सहायता करेगी।
बुनियादी ढाँचे को नुकसान
बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के आस-पास के बुनियादी ढाँचे और निजी संपत्ति को भारी क्षति पहुँचाई है। मध्य नेपाल में इन दोनों नदी कॉरिडोर के किनारे बसे समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील
नेपाल सरकार ने संकेत दिया है कि बचाव और राहत कार्य पूरा होने के बाद वह पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की माँग करेगी। गौरतलब है कि यह बाढ़ नेपाल के हाल के दशकों की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन गई है। आने वाले दिनों में लापता लोगों की खोज जारी रहने के साथ मृतक संख्या में और बदलाव की संभावना है।